150 साल की सेवा यात्रा को सेलिब्रेट करते हुए बॉम्बे YMCA (Young Men’s Christian Association) ने एक बार फिर साबित कर दिया कि असली सामाजिक सेवा धर्म, जाति या समुदाय की सीमाओं में बंधी नहीं होती। मुंबई के एनसीपीए के जमशेद भाभा थिएटर में आयोजित इस भव्य सेस्क्विसेंटेनरी (Sesquicentennial) समारोह में महाराष्ट्र के राज्यपाल सी. पी. राधाकृष्णन ने बॉम्बे YMCA के योगदान की सराहना की। राज्यपाल राधाकृष्णन ने अपने संबोधन में कहा, “बॉम्बे YMCA ने 150 वर्षों से समाज की सेवा करते हुए हमेशा समावेशिता (Inclusivity) और मानवता को प्राथमिकता दी है।” उन्होंने विशेष रूप से युवाओं के विकास, खेलों और समुदाय को सशक्त बनाने में संस्था के योगदान को प्रेरणादायक बताया।
ईसाई नाम के बावजूद, सेक्युलर मिशन को निभाया – गवर्नर
राज्यपाल ने 1990 के दशक की याद भी ताजा की जब कई भारतीय उद्यमी लंदन में YMCA होस्टल में ठहरते थे। इसके साथ ही उन्होंने हाल ही में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के पीड़ितों को श्रद्धांजलि अर्पित की और पोप फ्रांसिस के प्रति सम्मान व्यक्त किया। इस मौके पर वर्ल्ड YMCA की प्रेसिडेंट सोहेला हायक ने बॉम्बे YMCA को “संख्या नहीं, बल्कि एक समृद्ध परंपरा” बताया। उन्होंने कहा, “1975 से यह संस्था शिक्षा (Education), स्वास्थ्य (Healthcare), खेल (Sports) और जीवन कौशल (Life Skills) के ज़रिए मुंबई के लिए एक जीवन रेखा (Life Line) बनी हुई है।”
समर्पण और सेवा से रचा गया है 150 सालों का इतिहास
एशिया पैसिफिक YMCA के महासचिव नम बू वोन ने भी बॉम्बे YMCA की मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक विकास पहलों की तारीफ करते हुए कहा कि यह संस्था वंचित वर्गों को मुख्यधारा में लाने का अनूठा काम कर रही है। नेशनल YMCA के प्रेसिडेंट विंसेंट जॉर्ज ने पूर्व और वर्तमान सभी ऑफिस-बेयरर्स के समर्पण को संस्था की सफलता का श्रेय दिया। वहीं पूर्व जनरल सेक्रेटरी स्टेनली कारकाडा ने उम्मीद जताई कि बॉम्बे YMCA की यह विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा बनी रहेगी। कार्यक्रम में YMCA के 1875 से अब तक के ऐतिहासिक सफर पर बनी एक डॉक्युमेंट्री भी दिखाई गई। इसके बाद राज्यपाल ने एक Coffee Table Book और Commemorative Souvenir का विमोचन किया।
150 साल का सामाजिक उजाला, जो अभी भी फैला रहा है रोशनी
आज जब दुनिया सामाजिक विभाजन और असमानताओं से जूझ रही है, ऐसे समय में बॉम्बे YMCA जैसे संगठन समाज में आशा (Hope), समावेशिता (Inclusivity) और सेवा (Service) की असली मिसाल पेश कर रहे हैं। 150 साल पहले शुरू हुई यह यात्रा आज भी बताती है कि जब नीयत साफ हो, तो सेवा की रोशनी कई पीढ़ियों तक लोगों का रास्ता रोशन कर सकती है। बॉम्बे YMCA न केवल एक संस्था है, बल्कि एक जज़्बा है हर हाथ को थामने का, हर सपने को उड़ान देने का और हर जिंदगी को संवारने का।