राजस्थान HC ने ‘आटा-साटा’ शादी को बताया अमानवीय, 10 साल बाद महिला को मिला तलाक

The CSR Journal Magazine
राजस्थान हाई कोर्ट ने बीकानेर की एक महिला को तलाक देते हुए ‘आटा-साटा’ शादी की परंपरा की कड़ी निंदा की है। कोर्ट ने इसे “कानूनी और नैतिक रूप से दिवालिया” बताया, और स्पष्ट किया कि यह एक अमानवीय लेन-देन का सिस्टम है। इस प्रथा में नाबालिग बेटियां भी शामिल होती हैं, जो कि गंभीर मुद्दा है।

क्या है आटा-साटा परंपरा?

‘आटा-साटा’ या “लेन-देन” वाली शादी राजस्थान की पुरानी परंपरा है। इसमें दो परिवार अपनी बेटियों का आपस में आदान-प्रदान करते हैं। यह प्रथा सदियों से चली आ रही है, लेकिन अब इसे अमानवीय मानकर इसे खत्म करने की मांग उठ रही है।

विवाद का आरंभ और तलाक की याचिका

महिला की शादी 31 मार्च 2016 को हुई थी। उसी दिन आटा-साटा परंपरा के तहत उसके पति की नाबालिग बहन की शादी भी कराई गई थी। जब वह लड़की बालिग हुई, तो उसने उस शादी को अपनाने से मना कर दिया। इस फैसले ने दोनों परिवारों के बीच विवाद को जन्म दिया।

शारीरिक और मानसिक क्रूरता का आरोप

महिलाने आरोप लगाया कि उसके पति और सास-ससुर ने दहेज की मांग करते हुए उसके साथ शारीरिक और मानसिक क्रूरता की। 19 मार्च 2020 को, उसे उसकी नाबालिग बेटी के साथ ससुराल से निकाल दिया गया। इसके बाद उसने दहेज उत्पीड़न के कई आरोपों के साथ पुलिस में शिकायत की।

फैमिली कोर्ट का निर्णय

महिला ने तलाक की अर्जी देकर बीकानेर के फैमिली कोर्ट का रुख किया। लेकिन 24 सितंबर 2025 को उसकी याचिका को खारिज कर दिया गया। फैमिली कोर्ट ने पति के तर्क को स्वीकार किया कि महिला ने स्वेच्छा से ससुराल छोड़ा था।

हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय

महिला ने फैमिली कोर्ट के फैसले को चुनौती दी और हाई कोर्ट में अपील की। सुनवाई के दौरान, हाई कोर्ट ने साफ संदेश दिया कि लोअर कोर्ट ने ‘आटा-साटा’ के विवाद को पति-पत्नी के बीच वैवाहिक क्रूरता से जोड़कर “गंभीर गलती” की।

महिला का भविष्य और तलाक की मंजूरी

हाई कोर्ट ने यह भी सुना कि महिला मानसिक शांति के लिए तलाक लेने को तैयार है। उसने वर्तमान और भविष्य में मिलने वाले किसी भी भरण-पोषण को छोड़ने का भी आश्वासन दिया। कोर्ट ने इसे रिकॉर्ड में लेते हुए उसकी तलाक याचिका स्वीकार कर ली। इस फैसले ने न केवल महिला के लिए न्याय की राह खोली, बल्कि समाज में चल रही अमानवीय परंपराओं के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम भी उठाया।

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