Ken-Betwa Link Project: 2005 में सही था तो आज गलत कैसे? मनमोहन सिंह के कार्यकाल में शुरू हुआ था काम

The CSR Journal Magazine
Ken-Betwa Link Project: केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर राहुल गांधी के विरोध ने राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। भाजपा नेता अमित मालवीय ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया है कि जिस परियोजना को कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के दौरान आगे बढ़ाया गया, आज राहुल गांधी उसी का विरोध क्यों कर रहे हैं? मालवीय ने 2005 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के संसद में दिए बयान का हवाला देकर कांग्रेस से जवाब मांगा है। Bundelkhand Water Crisis

Ken-Betwa Link Project: 2005 में मनमोहन सिंह ने संसद में क्या कहा था?

25 अगस्त 2005 को राज्यसभा में नदी जोड़ो परियोजनाओं पर चर्चा के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था कि कई नदी जोड़ परियोजनाओं की DPR तैयार की जा रही हैं और परियोजनाओं से जुड़े पर्यावरणीय प्रभावों समेत विभिन्न पहलुओं का अध्ययन किया जा रहा है। मनमोहन सिंह ने सदन में कहा था कि वे स्वयं एक व्यवहार्यता रिपोर्ट पर हस्ताक्षर के अवसर के गवाह रहे हैं और कई अन्य परियोजनाओं की DPR भी तैयार की जा रही हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा था- “काम चल रहा है।” इसी संदर्भ में उन्होंने मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच केन-बेतवा लिंक को लेकर हुए समझौते का भी उल्लेख किया था। Manmohan Singh Ken-Betwa Link Project

मनमोहन सिंह की मौजूदगी में हुआ था केन-बेतवा समझौता

25 अगस्त 2005 को नई दिल्ली में मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच केन और बेतवा नदियों को जोड़ने के लिए समझौता हुआ था। यह समझौता तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की मौजूदगी में हुआ। उस समय केंद्रीय जल संसाधन मंत्री प्रियरंजन दासमुंशी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर इस प्रक्रिया का हिस्सा थे। संसद में दिए गए बयान में इस परियोजना को दोनों राज्यों में सिंचाई बढ़ाने, पेयजल उपलब्धता सुधारने, बाढ़ और सूखे के प्रभाव को कम करने तथा आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने वाली परियोजना बताया गया था।

अमित मालवीय ने राहुल गांधी से पूछा सवाल

अमित मालवीय ने इसी पुराने रिकॉर्ड को आधार बनाकर राहुल गांधी के मौजूदा रुख पर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने 2005 में केन-बेतवा परियोजना के लिए एमओयू कराया था और उस समय मनमोहन सिंह ने भी परियोजना को लेकर उम्मीद जताई थी। मालवीय का सवाल है कि अगर कांग्रेस सरकार के समय यह परियोजना महत्वपूर्ण थी, तो आज राहुल गांधी इसके विरोध में क्यों खड़े हैं? भाजपा नेता ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस के दस साल के केंद्र सरकार के कार्यकाल में परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी और बाद में मोदी सरकार के दौरान इसे आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए।

बुंदेलखंड के लिए क्यों अहम है Ken-Betwa Link Project?

अमित मालवीय ने दावा किया है कि केन-बेतवा परियोजना से करीब 8.11 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई, 2,000 गांवों को लाभ और लगभग 65 लाख लोगों को पेयजल उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। साथ ही परियोजना से बिजली उत्पादन भी प्रस्तावित है। यही वजह है कि भाजपा इसे बुंदेलखंड की पानी और सूखे की समस्या से जोड़कर देख रही है। वहीं परियोजना के विरोध में विस्थापन, पर्यावरण और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास जैसे सवाल उठाए जा रहे हैं।

मुआवजे और पुनर्वास पर भी बहस

परियोजना को लेकर हाल में मुआवजे और पुनर्वास पर भी विवाद सामने आया है। जल शक्ति मंत्रालय ने प्रभावित परिवारों को मुआवजा और पुनर्वास नहीं मिलने के आरोपों को गलत और भ्रामक बताया है। मंत्रालय के अनुसार अधिकांश पात्र परिवारों को मुआवजा और पुनर्वास लाभ मिल चुका है तथा कुछ मामलों में केवल प्रक्रियागत औपचारिकताएं बाकी हैं। ऐसे में केन-बेतवा परियोजना अब सिर्फ जल प्रबंधन और बुंदेलखंड के विकास का मुद्दा नहीं रह गई है। 2005 में कांग्रेस सरकार के दौरान हुए समझौते, मनमोहन सिंह के संसद में दिए बयान और राहुल गांधी के मौजूदा विरोध को लेकर भाजपा-कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव भी तेज हो गया है। सवाल अब यही है कि जिस परियोजना की नींव 2005 में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के दौर में रखी गई थी, उसके मौजूदा स्वरूप और प्रभावों को लेकर कांग्रेस का रुख बदला क्यों?
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