लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को एक पत्र भेजा है, जिसमें उन्होंने पूर्व सैनिकों के स्वास्थ्य संबंधी दो बड़े मुद्दों को उठाया है। 25 फरवरी 2026 को लिखे इस पत्र में उन्होंने एक्स-सर्विसमेन कंट्रीब्यूटरी हेल्थ स्कीम (ECHS) के लिए पर्याप्त बजट आवंटन की मांग की है। राहुल ने लिखा कि इस योजना का उद्देश्य पूर्व सैनिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देना है, लेकिन मौजूदा स्थिति में यह योजना गंभीर वित्तीय संकट का सामना कर रही है।
दिव्यांगता पेंशन पर नया आयकर हटाने की मांग
राहुल गांधी ने पत्र में एक अन्य मुद्दे पर भी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि फाइनेंस बिल 2026 में प्रस्तावित है कि यदि कोई सैनिक सेवा में रहते हुए दिव्यांगता पेंशन प्राप्त कर रहा है, तो उस पर आयकर लगाया जाएगा। उन्होंने इस प्रावधान को अनुपयुक्त बताया है, क्योंकि दिव्यांगता पेंशन उन लोगों के लिए होती है जिनका शारीरिक रूप से प्रभावित होना उन्हें अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
पूर्व सैनिकों के साथ कांग्रेस का समर्थन
कांग्रेस पार्टी ने 18 फरवरी को एक बयान जारी किया था जिसमें सरकार से आग्रह किया गया था कि वह दिव्यांगता पेंशन पर लगे आयकर के फैसले को वापस ले। पार्टी के पूर्व सैनिक विभाग के अध्यक्ष रिटायर्ड कर्नल रोहित चौधरी ने कहा है कि यदि सरकार ने 28 फरवरी तक यह निर्णय वापस नहीं लिया, तो वह पूर्व सैनिकों के साथ मिलकर बड़ा विरोध प्रदर्शन करेगी।
राहुल गांधी का पूर्व सैनिकों के मुद्दों पर जोर
राहुल गांधी ने पहले भी संसद में डिफेंस की स्थायी समिति की बैठक में पूर्व सैनिकों के मुद्दों को उठाया था। उन्होंने कहा कि जब रिटायर सैनिकों को प्राइवेट अस्पतालों में रैफर किया जाता है, तो उन्हें वहां उचित उपचार नहीं प्राप्त होता। इससे यह स्पष्ट होता है कि पूर्व सैनिकों को भर्ती और पुनर्वास में भी कठिनाई हो रही है।
पार्लियामेंट्री कमेटी की भूमिका
भारत सरकार में कुल 24 विभागीय पार्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमेटी हैं। इनमें से कुछ कमेटी स्थायी होती हैं जबकि अन्य एडहॉक होती हैं। इन कमेटियों का कार्यकाल एक वर्ष से अधिक नहीं होता है, और प्रत्येक कमेटी में विभिन्न मंत्रालयों से संबंधित मामलों पर चर्चा की जाती है। राहुल गांधी का इस प्रकार के मुद्दों को उठाना पार्लियामेंट्री प्रक्रियाओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
दिल्ली हाईकोर्ट का निर्णय
इसी बीच, दिल्ली हाईकोर्ट ने 27 फरवरी को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि सैन्य कर्मियों की दिव्यांगता पेंशन को केवल यह कहने पर नहीं रोका जा सकता कि उनकी बीमारी ‘लाइफस्टाइल डिसऑर्डर’ है। इस निर्णय ने पूर्व सैनिकों के अधिकारों को फिर से पुख्ता किया है और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की है।
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