पंजाब में नशे के खिलाफ अभियान की सफलता: सजा दर 84% तक पहुंची

The CSR Journal Magazine
पंजाब में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत 2022 से 2026 के बीच लगभग 8.7 करोड़ नशे की गोलियों और कैप्सूलों की जब्ती हुई है। यह कार्रवाई युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति को रोकने के लिए की जा रही है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में इस अभियान के ठोस परिणाम सामने आ रहे हैं। ताजा आंकड़े बताते हैं कि नशे के खिलाफ कार्रवाई में 84% की सजा दर बढ़ी है, जो कि नशा तस्करी पर गंभीर प्रहार का संकेत है।

गिरफ्तारियों में उल्लेखनीय वृद्धि

आंकड़ों के अनुसार, 2022 से अब तक 73,541 एनडीपीएस मामले दर्ज किए गए हैं। यह संख्या 2017-2021 के मुकाबले 40% से अधिक की वृद्धि दर्शाती है। इसी दौरान गिरफ्तारियों की संख्या 68,064 से बढ़कर 98,596 हो गई, जो राज्यभर में नशा तस्करी नेटवर्क के खिलाफ ठोस कार्रवाई को दर्शाती है।

हेरोइन और अफीम की जब्ती में उछाल

पंजाब में नशे की जब्तियों के आंकड़े इस अभियान की सफलता को उजागर करते हैं। हेरोइन की बरामदगी में 148% की वृद्धि हुई है—2022 से अब तक 5,979 किलोग्राम हेरोइन जब्त की गई है, जबकि 2017-2021 में यह मात्रा 2,412 किलोग्राम थी। अफीम की जब्ती में भी 43% से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई, जो 3,583 किलोग्राम तक पहुँच गई है। यह आंकड़े जमीनी स्तर पर तेज कार्रवाई की स्पष्ट बात करते हैं।

सिंथेटिक ड्रग्स पर भी कार्रवाई तेज

सिंथेटिक ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई में खासतौर पर उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई है। आइस (क्रिस्टल मेथामफेटामाइन) की जब्ती 17 किलोग्राम से बढ़कर 93 किलोग्राम पहुंच गई है, जो 447% की वृद्धि है। वहीं, कोकीन की जब्ती 6,064 किलोग्राम रही। यह आंकड़े नशे के खतरे से निपटने में सरकार की दृढ़ता को दर्शाते हैं।

डीजीपी की टिप्पणी

डीजीपी पंजाब गौरव यादव ने कहा कि यह केवल कार्रवाई में वृद्धि नहीं, बल्कि नशे के खतरे से निपटने के तरीकों में एक मूलभूत बदलाव है। उन्होंने बताया कि मामले और जब्तियों की यह वृद्धि इंटेलिजेंस बेस्ड कार्रवाई को दर्शाती है। सरकार ने सप्लायर से लेकर डिस्ट्रीब्यूटर तक पूरी श्रृंखला पर दबाव बनाने की प्रक्रिया को सुनिश्चित किया है।

मुख्यमंत्री की नजर में कार्रवाई की निरंतरता

डीजीपी ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान की स्पष्ट रणनीतिक सोच ने इस कार्रवाई की व्यापकता और निरंतरता को संभव बनाया है। युद्ध नशों के खिलाफ अभियान अब राज्यभर में सक्रिय और निर्णायक कार्रवाई का प्रमुख हिस्सा बन चुका है। हालांकि, सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि मुख्य उद्देश्य नशा नेटवर्क को तोड़ना और नशों की उपलब्धता को कम करना है, ताकि इस अभियान का स्थायी प्रभाव सुनिश्चित किया जा सके।

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