PGI Lucknow Robotic Surgery: 20 साल की अर्पिता को मिली नई जिंदगी, रोबोटिक सर्जरी से बड़ी आंत से बनाया नया मूत्राशय

The CSR Journal Magazine
लखनऊ के संजय गांधी पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SGPGI) के डॉक्टरों ने एक जटिल मेडिकल केस में 20 वर्षीय युवती का रोबोटिक सर्जरी से मूत्राशय पुनर्निर्माण किया है। बिहार के बेगूसराय की रहने वाली अर्पिता पिछले छह साल से पेशाब लीक होने की समस्या से जूझ रही थीं। लगातार कपड़े गीले रहने और बदबू के कारण उनकी रोजमर्रा की जिंदगी मुश्किल हो गई थी। कई अस्पतालों में इलाज कराने के बाद भी जब राहत नहीं मिली, तो परिवार उन्हें लखनऊ के पीजीआइ लेकर पहुंचा। यहां जांच में बीमारी की असली वजह सामने आई। डॉक्टरों ने यूरोजेनिटल टीबी के कारण सिकुड़े हुए मूत्राशय और मूत्राशय-योनि के बीच बने असामान्य रास्ते का पता लगाया। इसके बाद बड़ी आंत के एक हिस्से से नया मूत्राशय बनाया गया।

2020 में शुरू हुई परेशानी, छह साल तक भटकता रहा परिवार

अर्पिता के पिता किशोर सिन्हा के मुताबिक, बेटी को वर्ष 2020 में यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) हुआ था। इसके बाद पेशाब का फ्लो कम होने लगा और बार-बार पेशाब करने की समस्या शुरू हो गई। धीरे-धीरे परेशानी बढ़ती गई और पेशाब लीक होने लगा। परिवार ने बिहार के दो अस्पतालों में इलाज कराया। इसके बाद दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में भी दिखाया गया। वहां कैथेटर डालकर निकाल दिया गया और परिवार को बताया गया कि समस्या ठीक हो जाएगी। लेकिन अर्पिता को राहत नहीं मिली। इसके बाद पटना के IGIMS में भी इलाज कराया गया। करीब छह साल तक चार अस्पतालों के चक्कर काटने के बाद 2024 में रिश्तेदारों की सलाह पर परिवार अर्पिता को SGPGI की यूरोलॉजी ओपीडी लेकर पहुंचा।

PGI में जांच के बाद मिली बीमारी की सही पहचान

पीजीआइ के यूरोलॉजी विभाग में प्रो. संजय सुरेका ने अर्पिता के लक्षणों को देखते हुए टीबी की जांच कराई। जांच में यूरोजेनिटल ट्यूबरकुलोसिस की पुष्टि हुई। यह मूत्र और जननांग से जुड़ी टीबी की गंभीर स्थिति है। बीमारी का असर किडनी से मूत्राशय तक पहुंच चुका था। इससे मूत्राशय सिकुड़कर बहुत छोटा हो गया था। डॉक्टरों ने इसे थिम्बल ब्लैडर बताया। साथ ही मूत्राशय और योनि के बीच असामान्य रास्ता बन गया था, जिसे ट्यूबरक्यूलर वेसिकोवेजाइनल फिस्टुला कहा जाता है।

PGI Lucknow Robotic Surgery: क्या है थिम्बल ब्लैडर और वेसिकोवेजाइनल फिस्टुला?

थिम्बल ब्लैडर ऐसी स्थिति है, जिसमें मूत्राशय सिकुड़कर बहुत छोटा हो जाता है। इससे पेशाब जमा करने की क्षमता कम हो सकती है और मरीज को बार-बार पेशाब आने जैसी परेशानी हो सकती है। वेसिकोवेजाइनल फिस्टुला (VVF) में मूत्राशय और योनि के बीच असामान्य रास्ता बन जाता है। इसके कारण पेशाब योनि के रास्ते बाहर निकल सकता है और लगातार लीकेज की समस्या बनी रह सकती है। आमतौर पर वेसिकोवेजाइनल फिस्टुला प्रसव के दौरान चोट या कुछ सर्जरी के बाद हो सकता है। लेकिन अर्पिता के मामले में यह बीमारी टीबी से जुड़ी थी, जिससे इलाज काफी जटिल हो गया।

पहले छह महीने चली टीबी की दवा, फिर हुई रोबोटिक सर्जरी

प्रो. संजय सुरेका के अनुसार, अर्पिता को पहले छह महीने तक टीबी की दवा दी गई। इसका उद्देश्य संक्रमण को नियंत्रित करना था। इसके बाद अप्रैल में रोबोटिक सर्जरी की गई। सर्जरी के दौरान मूत्राशय और योनि के बीच बने असामान्य रास्ते को अलग किया गया। इसके बाद बड़ी आंत के एक हिस्से का इस्तेमाल करके नया मूत्राशय बनाया गया।

बड़ी आंत से कैसे बनाया गया नया मूत्राशय?

मूत्राशय के पुनर्निर्माण में आंत के एक हिस्से को लेकर नई थैली बनाई जा सकती है। इस प्रक्रिया को आंत्र के हिस्से से मूत्राशय का पुनर्निर्माण कहा जाता है। अर्पिता के मामले में डॉक्टरों ने सिकुड़ी हुई मूत्राशय की थैली की जगह बड़ी आंत के टुकड़े से नई थैली बनाई। रोबोटिक तकनीक की मदद से इस जटिल सर्जरी को अंजाम दिया गया। यह शरीर के बाहर से कोई कृत्रिम अंग लगाने की प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि शरीर के अपने ऊतक से मूत्राशय का पुनर्निर्माण किया गया।

PGI डॉक्टरों के लिए भी था पहला ऐसा मामला

प्रो. संजय सुरेका ने बताया कि उनके 15 साल के करियर में PGI में यह पहला ऐसा मामला है। बीमारी की दुर्लभता और जटिलता के कारण यह केस डॉक्टरों के लिए भी चुनौतीपूर्ण था। डॉक्टरों के मुताबिक, समय पर इलाज न मिलने पर बीमारी का असर किडनी पर बढ़ सकता है। गंभीर मामलों में पेशाब किडनी की ओर वापस जाने से किडनी को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है।

लगातार पेशाब लीकेज हो तो टीबी की जांच जरूरी

पीजीआइ के यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. एमएस अंसारी ने कहा कि अगर किसी मरीज को लगातार पेशाब लीकेज की समस्या है और उसका कारण समझ नहीं आ रहा है, तो टीबी की जांच जरूर करानी चाहिए। खासकर ऐसे मामलों में जहां सामान्य इलाज से राहत नहीं मिल रही हो, विशेषज्ञ डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। यूरोजेनिटल टीबी मूत्र प्रणाली के अलग-अलग हिस्सों को प्रभावित कर सकती है।

अर्पिता के परिवार को मिली बड़ी राहत

PGI Lucknow Robotic Surgery: छह साल तक बीमारी से परेशान रहने के बाद अर्पिता के परिवार के लिए यह सर्जरी बड़ी राहत लेकर आई। लगातार कपड़े गीले होने, बदबू और सामाजिक दूरी की परेशानी से जूझ रही युवती को अब बेहतर जीवन की उम्मीद मिली है। उनके पिता ने कई अस्पतालों में इलाज कराने के बाद पीजीआइ पहुंचने की कहानी बताई। इस मामले में सही बीमारी की पहचान, टीबी का इलाज और उसके बाद पुनर्निर्माण सर्जरी महत्वपूर्ण कदम रहे। हालांकि, सर्जरी के बाद मरीज की पूरी रिकवरी, पेशाब की क्षमता और आगे की स्थिति के बारे में विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि अर्पिता पूरी तरह ठीक हो चुकी हैं। लेकिन डॉक्टरों की इस जटिल सर्जरी से उन्हें नई जिंदगी की उम्मीद जरूर मिली है।

लगातार पेशाब लीक होने की समस्या को नजरअंदाज न करें

अर्पिता का मामला बताता है कि लगातार पेशाब लीकेज, पेशाब का फ्लो कम होना या बार-बार यूरिन की समस्या को हल्के में नहीं लेना चाहिए। अगर इलाज के बाद भी परेशानी बनी रहती है, तो विशेषज्ञ डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। यूरोजेनिटल टीबी जैसी बीमारी का समय पर पता चलना महत्वपूर्ण है। सही इलाज और जरूरत के अनुसार सर्जरी से मरीज की स्थिति में सुधार लाने की कोशिश की जा सकती है। लखनऊ के SGPGI में हुई यह रोबोटिक सर्जरी चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में सामने आई है। अर्पिता के मामले में डॉक्टरों ने जटिल बीमारी की पहचान कर नई मूत्राशय थैली बनाने का रास्ता अपनाया, जिससे उनके जीवन में राहत की उम्मीद जगी है।

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