कम लागत, ज्यादा मुनाफा: चित्रकूट के किसानों ने अपनाई जैविक खेती

The CSR Journal Magazine
उत्तर प्रदेश में रसायनिक खाद और कीटनाशकों के खर्च बढ़ते जा रहे हैं। इसी बीच, जैविक खेती किसानों के लिए एक नई उम्मीद बनकर उभरी है। पहले, जो किसान खेती की लागत से परेशान थे, अब वे जैविक खेती की ओर बढ़ रहे हैं। गोबर की खाद, वर्मी कंपोस्ट और प्राकृतिक कीटनाशकों का इस्तेमाल कर वे अपनी फसलों की गुणवत्ता में सुधार कर रहे हैं। पहले खाद और दवाइयों पर काफी खर्च होता था, लेकिन अब जैविक खेती शुरू करने के बाद उनकी लागत कम हुई है और फसलों की कीमत भी बेहतर मिली है। जैविक खेती एक ऐसी पद्धति है जिसमें रासायनिक उर्वरक और कीटनाशकों के बजाय प्राकृतिक तरीके से तैयार की गई खाद का उपयोग किया जाता है। इस प्रक्रिया से सिर्फ भूमि की उर्वरा शक्ति नहीं बचती, बल्कि पर्यावरण भी सुरक्षित रहता है।

किसानों को मिल रहा फायदा

जैविक खेती करने वाले बैहार गांव के नत्थूराम ने झांसी के चिरगांव राजकीय कृषि विद्यालय में प्रशिक्षण लिया था। रिटायर्ड शिक्षक नत्थूराम ने 2022 में जैविक खेती शुरू की और अब 18 बीघे में फसल के साथ फलों की बागवानी भी कर रहे हैं। उन्हें सालाना 4 से 5 लाख का मुनाफा हो रहा है। अब वे दूसरे किसानों को भी जैविक खेती के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

मानिकपुर के कोठारी सिंह पटेल

मानिकपुर तहसील के बरहट गांव के कोठारी सिंह पटेल भी जैविक खेती शुरू कर चुके हैं। उन्होंने 2023 में खेती की शुरुआत की। शुरुआत में उन्हें शुगर और BP जैसी स्वास्थ्य समस्याएं थीं, लेकिन जैविक फसले खाने से उनका स्वास्थ्य बेहतर हुआ है। उन्होंने धान, अरहर और ज्वार की खेती की है और इसे जीरो बैलेंस खेती बताया है। उनके अनुसार इस खेती में मेहनत की ज्यादा जरूरत है और लागत कम है।

योगेश जैन का अनुभव

दिसंबर में कर्वी तहसील के योगेश जैन ने जैविक खेती पर जोर दिया। उन्होंने वर्षों से प्राकृतिक कृषि का पालन किया है। उनकी भूमि रासायनिक खेती के कारण बंजर हो गई थी। इसे सुधारने के लिए उन्होंने पशुपालन किया और गौमूत्र तथा गोबर से खाद तैयार की। इससे उनकी जमीन की उर्वरता बढ़ गई और उन्होंने रबी और खरीफ फसलों का उत्पादन शुरू किया।

सरकारी समर्थन और योजनाएं

प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए कृषि उप निदेशक जीत लाल गुप्ता ने बताया कि भारत सरकार और राज्य सरकार मिलकर नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग योजना चला रहे हैं। 2026-27 में 25 क्लस्टर बनाने का लक्ष्य है, जिसमें 3125 किसानों को जैविक खेती में शामिल किया जाएगा। इसके तहत किसानों को विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से जैविक खेती के लाभ बताकर प्रेरित किया जा रहा है।

उर्वरता बढ़ाने का जादू

बताया गया है कि जैविक खेती में शुरुवात में उत्पादन कम होता है, लेकिन जैसे-जैसे देशी खाद का इस्तेमाल बढ़ता है, भूमि की उर्वरक क्षमता भी बढ़ती है। इससे उत्पादकता में वृद्धि होती है। यही कारण है कि चित्रकूट के किसान अब जैविक खेती को फायदेमंद मानते हैं। इस तरह धीरे-धीरे जैविक खेती उत्तर प्रदेश में एक सफल विकल्प बनती जा रही है।

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