UP हस्तिनापुर में बूढ़ी गंगा का होगा पुनरुद्धार, चार जिलों में होगा विस्तार

The CSR Journal Magazine
मेरठ से 45 किलोमीटर दूर स्थित हस्तिनापुर में बूढ़ी गंगा नदी को पुनर्जीवित करने की संभावनाएं बढ़ गई हैं. उत्तर प्रदेश शासन के सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग ने बूढ़ी गंगा के 100 वर्ष के रिटर्न पीरियड के आधार पर बाढ़ मैदान के वैज्ञानिक सीमांकन और अधिसूचना से संबंधित पत्र जारी किया है. यह कदम नदी को फिर से अविरल धारा में लाने के प्रयासों का हिस्सा है.

विशेषज्ञों की राय से मिल रही बल

लोकल 18 की टीम ने शोभित विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर प्रियंक भारती से इस विषय पर खास बातचीत की. जो पिछले कई वर्षों से बूढ़ी गंगा को पुनर्जीवित करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश शासन के विशेष सचिव कुलदीप श्रीवास्तव द्वारा जारी शासनादेश के तहत बूढ़ी गंगा के बाढ़ मैदान को अक्षांश-देशांतर आधारित वैज्ञानिक सीमांकन के माध्यम से विभिन्न रीच में विभाजित किया गया है. इससे अब संभावनाएं काफी बढ़ गई हैं.

चार जिलों में होगा सीमांकन का कार्य

उन्होंने बताया कि बूढ़ी गंगा का सीमांकन मुजफ्फरनगर, मेरठ, अमरोहा और हापुड़ जनपदों की सीमाओं में होगा. महाभारत कालीन दौर में बूढ़ी गंगा मुजफ्फरनगर के शुक्रताल तीर्थ से होकर मेरठ और अमरोहा से होते हुए हापुड़ की गढ़ गंगा में समाहित होती थी. पांडेय जी ने बताया कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के समक्ष 5 अगस्त 2024 को सुनवाई के दौरान बूढ़ी गंगा से संबंधित महत्वपूर्ण निष्कर्ष दर्ज किए गए थे. एनजीटी ने माना कि बूढ़ी गंगा, गंगा नदी की सहायक नदी है.

बाढ़ क्षेत्र का संरक्षण होगा संभव

100-वर्षीय रिटर्न पीरियड के आधार पर चिन्हित बाढ़ मैदान के अधिसूचित होने से इस क्षेत्र में नदी के संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा. बताते चले कि बूढ़ी गंगा इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि महाभारत कालीन हस्तिनापुर के मंदिरों के निकट अविरल बहती थी. उस समय पांचों पांडव और अन्य लोग इसमें स्नान करते थे.

इतिहास से जुड़ी बूँदें

आज भी हस्तिनापुर के कुछ क्षेत्रों में आपको बूढ़ी गंगा की अविरल धारा बहे हुए दिखाई देगी. इससे न केवल स्थानीय संस्कृति को बल मिलेगा, बल्कि पर्यटकों के लिए भी यह क्षेत्र आकर्षण का केंद्र बन सकता है. यह प्राकृतिक धारा पुनर्जीवित होने पर ना केवल पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण होगी, बल्कि इतिहास और सांस्कृतिक धरोहर को भी संजोए रखेगी.

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