ममता के गढ़ में हड़बड़ाहट! निगम पर नज़र, TMC के 7 पार्षद गिरफ्तार

The CSR Journal Magazine
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव में हार के बाद, तृणमूल कांग्रेस (TMC) एक बड़े आंतरिक संकट का सामना कर रही है। विधायक दल में टूट के साथ ही, कई नगर पालिकाएं भी बिखरने लगी हैं। हाल ही में, भाजपा सरकार की भ्रष्टाचार-विरोधी मुहिम के तहत कोलकाता नगर निगम के कई पार्षदों को रंगदारी और अन्य आरोपों में गिरफ्तार किया गया है। इससे TMC में भारी खलबली मची है।

भाजपा का भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस

बंगाल में भाजपा सरकार के आने के साथ ही, भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई गई है। इस नीति के तहत, कई TMC पार्षदों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिससे पार्टी के भीतर उथल-पुथल मच गई है। हाल में तृणमूल विधायक दल में भी टूट दिखाई दे रही है। बागी सांसदों ने पार्टी के खिलाफ बगावत की घोषणा की है, और 20 सांसदों ने लोकसभा स्पीकर को एक पत्र सौंप कर अलग गुट बनाने का दावा किया है।

गिरफ्तार हुए पार्षदों की सूची

गिरफ्तार हुए पार्षदों में बप्पादित्य दासगुप्ता शामिल हैं, जो कोलकाता नगर निगम के वार्ड नंबर 101 के पार्षद थे। उन पर रंगदारी मांगने का आरोप है। अब तक गिरफ्तार हुए अन्य पार्षदों में सुदीप पाल, अरिजीत दास ठाकुर, सचिन सिंह, महेश कुमार शर्मा, बिस्वजीत मंडल, और मोहम्मद जसीमुद्दीन शामिल हैं।

फरार पार्षदों की खोज

इसके साथ ही, वार्ड नंबर 108 के तृणमूल पार्षद और बोरो नंबर 12 के चेयरमैन सुशांत कुमार घोष फरार हैं। पुलिस उनकी तलाश कर रही है। बीजेपी सरकार के आने के बाद लगातार TMC नेताओं के खिलाफ आवाजें उठने लगी हैं, और उन पर रंगदारी तथा कटमनी के आरोप लग रहे हैं।

फिरहाद हकीम की स्थिति पर सवाल

क्या फिरहाद हकीम ममता बनर्जी का साथ छोड़ने जा रहे हैं? हाल ही में उन्होंने विधानसभा में ऋतब्रत बनर्जी के कार्यालय का दौरा किया, जिससे अटकलें और बढ़ गईं। फिरहाद पहले भी ममता के करीबी रहे हैं और टीम TMC के अहम सदस्यों में शामिल हैं। उनके इस्तीफे के बाद नगर निगम बोर्ड के टूटने की आशंका जताई जा रही है।

राजनीति में उथल-पुथल के संकेत

फिरहाद हकीम ने हाल ही में कोलकाता के मेयर पद से इस्तीफा दिया था। यह जानकर माना जा रहा था कि उन्होंने ममता की अनुमति से यह कदम उठाया। जब ममता ने बीजेपी की जीत को नकारा, तब फिरहाद की विधानसभा में भाजपा के नेता के साथ उपस्थिति को लेकर अटकलें तेज हो गईं। क्या यह राजनीतिक असंतोष की वजह है या कुछ और? इस पर राजनीतिक खींचतान जारी है।

आगे क्या होगा?

TMC की इस आंतरिक स्थिति ने पूरे राज्य में हलचल मचा दी है। क्या ममता बनर्जी इस संकट से उबर पाएंगी, या पार्टी में और भी टूट दिखाई देगी? घटनाक्रम पर सभी की नज़रें हैं, और यह देखना बाकी है कि भविष्य में TMC की राजनीति कैसे आगे बढ़ेगी।

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