साल में सिर्फ 52 इंजेक्शन: भारत में लॉन्च हुए पहले वन्स-वीकली इंसुलिन की कीमत समेत 5 बड़े फैक्ट्स जानिए

The CSR Journal Magazine
भारत में इंसुलिन के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन समस्या यह है कि अधिकांश लोग नियमित रूप से इंसुलिन लेना पसंद नहीं करते। हाल ही में भारत में वन्स-वीकली इंसुलिन का लॉन्च हुआ है, जो कि केवल साल में 52 इंजेक्शन की जरूरत होगी। इस नई तकनीक के तहत मरीजों को हर हफ्ते अपनी दवा नहीं लेनी पड़ेगी, जिससे उनका जीवन बहुत आसान हो जाएगा।

93 प्रतिशत मरीज क्यों नहीं लेते इंसुलिन?

अध्ययन बताते हैं कि 93 प्रतिशत रोगी इंसुलिन इंजेक्शन लेने से कतराते हैं। जब बात इंसुलिन की आती है, तो डौक्टर भी कई बार मरीजों को इसे लेने के लिए नहीं कहते। इस स्थिति में मरीजों की जरूरत से 8 या 9 साल की देरी हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप, शरीर की बीटा कोशिकाएं जो इंसुलिन का उत्पादन करती हैं, उनमें से लगभग आधी हमेशा के लिए समाप्त हो जाती हैं।

वन्स-वीकली इंसुलिन कीजिए अपनाएं

नए वन्स-वीकली इंसुलिन के लाभों में दैनिक इंजेक्शन की जगह सप्ताह में केवल एक बार इंजेक्शन लेने की सुविधा है। यह न केवल मरीजों को आराम देता है, बल्कि उनकी मानसिक स्थिति में भी सुधार लाता है। इस नई तैयारी का उद्देश्य मरीजों को इंसुलिन लेने में सहज बनाना है।

कीमत की जानकारी

वन्स-वीकली इंसुलिन की कीमत को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन इसे सामान्य इंसुलिन से उचित मूल्य पर उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया है। यह पहल विशेष रूप से मधुमेह से पीड़ित मरीजों के लिए बहुत लाभदायक हो सकती है। इस नई तकनीक के लिए बुनियादी ढांचे की जरूरत होगी, लेकिन इसके फायदों को ध्यान में रखते हुए इसके लिए निवेश की संभावना है।

अन्य महत्वपूर्ण तथ्यों पर नज़र

इस नई तकनीक के साथ कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं पर ध्यान देना आवश्यक है। वन्स-वीकली इंसुलिन को डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं लेना चाहिए। इसके अलावा, इसके साइड इफेक्ट्स को भी समझना जरूरी है। इस नई दवा को लेने से पहले डॉक्टर से सही मार्गदर्शन अवश्य लें।

भविष्य का इंसुलिन

जैसा कि तकनीकी विकास होते जा रहे हैं, ऐसे में वन्स-वीकली इंसुलिन का आगमन एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इससे दुनियाभर में मधुमेह के इलाज में एक नई राह खुल सकती है। यह भविष्य में ना केवल भारत, बल्कि अन्य देशों में भी मधुमेह के मरीजों के लिए मददगार साबित हो सकता है। नई तकनीकों को अपनाने से मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में कदम बढ़ाने का मौका मिलेगा।

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