बाढ़ के 9 दिनों बाद भारतीय सेना को मिली बड़ी सफलता, नेपाल में टनल खोदकर 2 को जिंदा बचाया

The CSR Journal Magazine
नेपाल में आई हालिया बाढ़ ने न केवल जीवन को प्रभावित किया, बल्कि कई श्रमिकों को भी खतरे में डाल दिया। बाढ़ के 9 दिनों बाद, भारतीय सेना ने बेहद सफल बचाव अभियान चलाते हुए नेपाल के त्रिशुली-3ए जलविद्युत परियोजना की सुरंग से दो श्रमिकों को जिंदा बाहर निकाला। सुरंग में रहने वाले इन श्रमिकों ने अभूतपूर्व स्थितियों में अपनी जान बचाने में सफलता हासिल की।

उम्मीद की किरण: सुरंग से जीवन की आवाजें

बचाव दलों ने सुरंग के अंदर से आवाजें सुनकर उम्मीद की नई किरण जगी। जब सर्च ऑपरेशन शुरू हुआ, तो दल के सदस्यों को विश्वास था कि और भी श्रमिक वहां जीवित हो सकते हैं। यह एक चुनौतीपूर्ण कार्य था, क्योंकि सुरंग में मलबा, कीचड़ और पानी भरा हुआ था। हालांकि, सुरक्षाकर्मियों ने संयम बनाए रखते हुए फिर भी काम जारी रखा।

दो श्रमिकों का सफल रेस्क्यू

सुरंग में लंबी खोजबीन के बाद, दो श्रमिकों की पहचान संजय शाह और कबीर महार्जन के रूप में हुई। जब उन्हें बाहर निकाला गया, तो चिकित्सा सहायता तुरंत उपलब्ध कराई गई। सोशल मीडिया पर भी इस अद्भुत रेस्क्यू का वीडियो वायरल हो गया, जिसमें बचाव कर्मी एक श्रमिक को एक छोटे गड्ढे से बाहर निकालते हुए दिखाए गए।

लापता श्रमिकों की संख्या पर संकट

त्रिशुली-3ए की सुरंग में 40 से अधिक श्रमिकों के लापता होने की जानकारी मिली है। अधिकारियों के अनुसार, नेपाल में बाढ़ से संबंधित विभिन्न स्थानों पर 900 से ज्यादा श्रमिक अब भी लापता हैं। ये आंकड़े इस भयानक प्राकृतिक आपदा की गंभीरता को दर्शाते हैं, जिसमें लगभग 1,200 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।

सेना और विशेषज्ञों का संयुक्त प्रयास

बचाव अभियान में भारतीय सेना के साथ ही नेपाली सेना ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी समर्पण और मेहनत ने इस कठिन परिस्थिति में दो लोगों को सही सलामत बचाने में मदद की। विभिन्न ऊर्जा परियोजनाओं में फंसे अन्य श्रमिकों के लिए यह रेस्क्यू और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि बचाव दल अभी भी किसी चमत्कार की उम्मीद रख रहे हैं।

बचाव अभियान में और क्या हो रहा है?

सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने के लिए सेना और विशेषज्ञ टीमें निरंतर कोशिशें कर रही हैं। जहां एक ओर दो श्रमिकों का सफल रेस्क्यू एक राहत की खबर है, वहीं दूसरी ओर, इस संकट की घड़ी में सभी की नजरें बचाव अभियानों पर टिकी हुई हैं। दिन-ब-दिन बढ़ती चुनौतियों और बाढ़ के बाद के हालात ने सभी को चिंतित कर रखा है।

समाज के प्रति रेस्क्यू का संजीदगी

यह रेस्क्यू न केवल बचाव दलों की मेहनत का परिणाम है, बल्कि नागरिकों की उम्मीदों को भी प्रकट करता है। इस महाविपदा में जिंदा रहने की कहानियाँ सभी को यह याद दिलाती हैं कि कैसे कठिनाइयाँ भी जीवन की महत्ता को नहीं मिटा सकती। नेपाल और भारत के बीच सहयोग का यह उदाहरण सभी के लिए प्रेरणादायक है।

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