Education System in India: शिक्षा सुधार के लिए सिर्फ नए उपाय नहीं, पूरी व्यवस्था में बदलाव जरूरी: ऑक्सफोर्ड की स्टडी

The CSR Journal Magazine
Education System in India: भारत की सरकारी शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव के लिए सिर्फ नए कार्यक्रम या नए समाधान काफी नहीं हैं। इसके लिए सरकार, शिक्षक, स्कूल, समुदाय और सामाजिक संस्थाओं को मिलकर पूरी व्यवस्था में बदलाव लाने की जरूरत है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की एक नई स्टडी में भारत के Shikshagraha आंदोलन के अनुभव के आधार पर शिक्षा व्यवस्था में बदलाव को लेकर कई अहम बातें सामने आई हैं। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के Government Outcomes Lab (GO Lab) ने यह अध्ययन किया है। इसमें बताया गया है कि सरकार और सामाजिक संस्थाएं अगर सही तरीके से साथ काम करें, तो सरकारी स्कूलों में लंबे समय तक टिकने वाले बदलाव लाए जा सकते हैं।

Education System in India: 3 बातों पर सबसे ज्यादा जोर

स्टडी में शिक्षा व्यवस्था में बदलाव के लिए तीन बातों को अहम बताया गया है। पहली, सरकार और सामाजिक संस्थाओं की जिम्मेदारियां साफ होनी चाहिए। दूसरी, बदलाव के लिए सरकारी व्यवस्था से अलग नहीं, बल्कि उसी व्यवस्था के साथ मिलकर काम करना जरूरी है। तीसरी, अलग-अलग संस्थाओं और लोगों के बीच भरोसा मजबूत होना चाहिए। रिपोर्ट के मुताबिक सरकार के पास नीतियों को बड़े स्तर पर लागू करने की ताकत और जिम्मेदारी होती है। वहीं सामाजिक संस्थाएं स्थानीय स्तर की जरूरतों को बेहतर समझती हैं और नए तरीकों को आजमाने में मदद कर सकती हैं। इसलिए दोनों की भूमिका अलग होने के बावजूद एक-दूसरे की पूरक है।

Education System in India: बाहर से समाधान थोपने से नहीं आएगा बदलाव

स्टडी में यह भी चेतावनी दी गई है कि अगर स्कूलों पर बाहरी संस्थाओं के बहुत ज्यादा कार्यक्रम थोप दिए जाएं, तो इसका उलटा असर हो सकता है। एक साथ कई योजनाओं और पहलों के कारण शिक्षकों और स्कूलों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि शिक्षा में काम करने वाली संस्थाओं को पहले से मौजूद सरकारी व्यवस्था, स्थानीय जरूरतों और उसकी चुनौतियों को समझना चाहिए। इसके बाद उसी व्यवस्था के भीतर जरूरी बदलाव लाने की कोशिश करनी चाहिए। Shikshagraha की मुख्य क्यूरेटर खुशबू अवस्थी ने कहा कि भारत में शिक्षा के लिए समाधान की कमी नहीं है। देशभर में शिक्षक, स्कूल प्रमुख, समुदाय और सामाजिक संस्थाएं कई ऐसे काम कर रही हैं जो असरदार हैं। असली चुनौती इन प्रयासों को एक-दूसरे से जोड़कर बड़े स्तर पर स्थायी बदलाव लाने की है।

भरोसे को बताया बदलाव की कुंजी

ऑक्सफोर्ड की स्टडी में सरकार और सामाजिक संस्थाओं के बीच भरोसे को भी बेहद जरूरी बताया गया है। इसके लिए अपनी बात साफ तरीके से रखना, काम के परिणाम दिखाना और जरूरत पड़ने पर असहमति भी खुलकर सामने रखना जरूरी बताया गया है। स्टडी के लेखक और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता हैरी ब्रेगाजी के मुताबिक, शिक्षा व्यवस्था में बदलाव सरकारी सिस्टम से अलग रहकर नहीं किया जा सकता। इसके लिए व्यवस्था को समझना, उसकी चुनौतियों के साथ काम करना और जहां जरूरत हो वहां पुरानी कार्यप्रणाली में बदलाव लाना जरूरी है।

Education System in India: 1.17 लाख से ज्यादा स्कूलों तक पहुंच

Shikshagraha खुद को भारत के 10 लाख सरकारी स्कूलों में सुधार लाने वाला जनआंदोलन बताता है। इसके नेटवर्क में 35 से ज्यादा सामाजिक, उद्योग और परोपकारी संस्थाएं शामिल हैं। संगठन के मुताबिक, यह नेटवर्क 14 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 33 जिलों में 1.17 लाख से ज्यादा स्कूलों के साथ काम कर रहा है। इसका उद्देश्य शिक्षकों, स्कूल प्रमुखों, अभिभावकों, महिलाओं और युवाओं की भागीदारी बढ़ाकर सरकारी स्कूलों में स्थानीय जरूरत के हिसाब से छोटे-छोटे सुधार करना है। ऑक्सफोर्ड की यह स्टडी भारत के शिक्षा क्षेत्र के अनुभवों के आधार पर यह समझने की कोशिश करती है कि सरकार और सामाजिक संस्थाएं मिलकर किस तरह सार्वजनिक व्यवस्था में लंबे समय तक टिकने वाला बदलाव ला सकती हैं।
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