Nepal Flood Relief: नेपाल में भीषण बाढ़ के बाद सद्गुरु का ऐतिहासिक कदम: 1 करोड़ का दान और ‘हिमालयी बोर्ड’ का प्रस्ताव

The CSR Journal Magazine
नेपाल में हाल ही में आई भीषण बाढ़ के बाद ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने काठमांडू में बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने नेपाल के प्रधानमंत्री के आपदा राहत कोष में 1 करोड़ रुपये देने का वादा किया। इस दान का उद्देश्य बाढ़ से प्रभावित लोगों की मदद करना है, जिन्हें इस आपदा ने बुरी तरह प्रभावित किया है। पिछले दिनों की इस त्रासदी में 900 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों लोग अब भी लापता हैं।

हिमालयी देशों की एकजुटता का आह्वान

सद्गुरु ने बाढ़ के बाद एक ‘हिमालयी बोर्ड’ बनाने का प्रस्ताव रखा है। उनका मानना है कि भारत, चीन, पाकिस्तान, नेपाल और भूटान को मिलकर आपदाओं का सामना करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिमालय की खूबसूरती और इसकी नाजुकता को ध्यान में रखते हुए, इन देशों को अपनी सीमाओं से ऊपर उठकर समस्याओं का सामना करना होगा।

Nepal Flood Relief: कठोर सत्य की पहचान, अपनी जिम्मेदारी समझें

सद्गुरु ने इस भयंकर आपदा का असर तुलना से कहीं ज्यादा गंभीर बताया। उन्होंने समझाया कि ग्लेशियरों का इस तरह का गिरना किसी ने नहीं सोचा था, और यही कारण है कि सभी देशों को मिलकर योजना बनाने की जरूरत है। बाढ़ ने सबको एकजुट होने का संकेत दिया है, क्यूंकि नेपाल अकेले इस संकट का सामना नहीं कर सकता। मशहूर अभिनेत्री मनीषा कोइराला ने सद्गुरु से यह सवाल पूछा कि इस भयंकर आपदा से लोग क्या सीख सकते हैं। सद्गुरु ने विस्तार से जवाब दिया, जिसमें उन्होंने बताया कि जीवन कितना नाजुक हो सकता है। उन्होंने कहा कि हमें आपदाओं का सामना करने के लिए आगे की योजना बनानी चाहिए, न कि सिर्फ реагियंस पर निर्भर रहना चाहिए।

आपदाओं को ‘दैवीय कारण’ मत मानिए, भीती और दुख के बीच आध्यात्मिकता

सद्गुरु के अनुसार, हमें आपदाओं को दैवीय रूप में नहीं देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि भौतिक नियमों को समझना आवश्यक है, ताकि हम इस तरह की घटनाओं के प्रभाव को सकारात्मक रूप में ग्रहण कर सकें। उनके विचार में, हमें समय का सही उपयोग करना चाहिए और आपदाओं को अलग नजरिए से देखना चाहिए। सद्गुरु ने वादा किया कि कोयंबटूर में ईशा योग सेंटर में ‘काल भैरव कर्म’ किया जाएगा। यह विशेष अनुष्ठान उन लोगों के लिए है, जिन्होंने इस आपदा में अपनी जान खोई है। इस अनुष्ठान का उद्देश्य मृत व्यक्ति को शांति और सुकून प्रदान करना है।

हिमालय के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी

Nepal Flood Relief: ‘नेपाल के साथ एकजुटता’ कार्यक्रम में सद्गुरु ने हिमालय के प्रति हमारी सामूहिक जिम्मेदारी को समझाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि पहाड़ों का भविष्य सभी देशों से जुड़ा है जो उन पर निर्भर करते हैं। केवल तात्कालिक राहत देने से आगे बढ़कर हमें एक साथ मिलकर दीर्घकालिक योजनाएं बनानी चाहिए।

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