नेपाल में सैलाब के बाद मिल रहे शव, जानें शिनाख्त करने का पूरा प्रोसेस

The CSR Journal Magazine
नेपाल में हाल ही में आई भीषण बाढ़ के बाद सबसे बड़ी चुनौती शवों की पहचान करना बन गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक 626 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग लापता हैं। ऐसे में, शवों की पहचान के लिए विभिन्न प्रक्रियाएं अपनाई जा रही हैं, जिसमें DNA टेस्टिंग, फिंगरप्रिंट, डेंटल रिकॉर्ड और फॉरेंसिक जांच शामिल हैं। हालात की गंभीरता को देखते हुए नेपाल ने भारत और चीन से भी मदद मांगी है।

DVI प्रक्रिया की चार चरण

डिजास्टर विक्टिम आइडेंटिफिकेशन (DVI) प्रक्रिया मुख्य रूप से चार चरणों में होती है। पहले चरण में घटनास्थल से आवश्यक सबूत जुटाए जाते हैं। दूसरे चरण में शव की चिकित्सा और फॉरेंसिक जांच की जाती है। तीसरे चरण में लापता व्यक्ति और उसके परिवार से संबंधित जानकारी एकत्र की जाती है। अंत में, सभी सबूतों और जानकारी का मिलान कर शव की पहचान की जाती है।

अज्ञात शव की पहचान कैसे करें

जब अज्ञात शव बरामद होता है, तो उसे तुरंत किसी व्यक्ति से जोड़ने की कोशिश नहीं की जाती। पहले शव को एक यूनिक पहचान नंबर दिया जाता है और उसके बारे में विस्तृत जानकारी रिकॉर्ड की जाती है। कपड़े, जूते, घड़ी या अन्य सामान भी पहचान में मदद कर सकते हैं, लेकिन यदि चेहरे की बनावट बिगड़ गई है, तो पहचान कठिन हो जाती है। ऐसे में फॉरेंसिक प्रक्रिया का सहारा लिया जाता है।

फिंगरप्रिंट और डेंटल रिकॉर्ड का महत्व

शवों की पहचान में फिंगरप्रिंट्स और दांतों की जांच भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अगर शव की उंगलियों की त्वचा सुरक्षित है, तो फिंगरप्रिंट लिए जा सकते हैं और इसे उपलब्ध रिकॉर्ड से मिलाया जा सकता है। वहीं, दांतों के पुराने रिकॉर्ड भी पहचान के लिए सहायक हो सकते हैं।

DNA प्रफाइलिंग का सहारा

यदि चेहरे की पहचान या फिंगरप्रिंट उपलब्ध नहीं होते, तो DNA प्रफाइलिंग सबसे भरोसेमंद तरीका बन जाता है। शव से DNA सैंपल लिया जाता है और इसे लापता व्यक्ति के परिजनों के DNA से मिलाया जाता है। ऐसा करते हुए माता-पिता, भाई-बहन, या बच्चों के नमूने लिए जा सकते हैं।

शवों की पहचान के लिए डेटा एकत्रित करना

आपदा के दौरान लापता लोगों और शवों के बारे में दो तरह की जानकारी तैयार की जाती है। पहली जानकारी लापता लोगों की होती है, जिसमें उनका नाम, उम्र और आखिरी बार कहां देखा गया यह शामिल होता है। दूसरी जानकारी अज्ञात शवों के बारे में होती है, जिसमें शव मिलने की जगह और अन्य विवरण शामिल होते हैं। दोनों डेटाबेस को मिलाकर संभावित पहचान तैयार की जाती है।

अतिरिक्त पहचान के तरीके

शवों के शरीर पर मौजूद निशान और मेडिकल इम्प्लांट भी पहचान की प्रक्रिया में मदद कर सकते हैं। खासकर, अगर किसी व्यक्ति के शरीर में मेडिकल डिवाइस लगा हो और उसका रिकॉर्ड उपलब्ध हो। ऐसे में यह जानकारी शव की पहचान में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

परिवार को कब सौंपा जाएगा शव

शव को परिवार को सौंपने से पहले पहचान की पुष्टि करना अनिवार्य होता है। इसके लिए सभी उपलब्ध सूचनाओं और सबूतों का मान्यता प्राप्त किया जाता है। पहचान की पुष्टि होने के बाद ही संबंधित कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी की जाती हैं।

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