सिर्फ 3 मिनट की देरी और टूट गया डॉक्टर बनने का सपना: NEET री-एग्जाम सेंटर के बाहर रोती रहीं छात्राएं

The CSR Journal Magazine
NEET-UG री-एग्जाम के बाद कई छात्र फेल हुए हैं। 21 जून को हुई इस परीक्षा में करीब 20 लाख स्टूडेंट्स ने भाग लिया। पेपर लीक के चलते यह री-एग्जाम हुआ, जिसमें कई छात्रों ने तय समय पर परीक्षा केंद्र नहीं पहुंचने के कारण अपना मौका खो दिया। इस दौरान सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में छात्रों की निराशा और आंसू देखने को मिले।

दरवाजे पर आंसू बहाते छात्र

वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि बेंगलुरु में दो बच्चियाँ गेट के बाहर खड़ी रो रही हैं। उनका आरोप है कि केवल 2 मिनट की देरी के कारण उन्हें परीक्षा में शामिल नहीं किया गया। ये छात्राएँ अधिकारियों से मदद मांग रही थीं, परंतु समयसीमा खत्म हो चुकी थी। बंगलूरु पुलिस ने इस मामले की जांच करते हुए कहा कि वास्तव में उन्हें 3 मिनट की देरी हुई थी।

पुलिस का फैक्ट चेक

बंगलूरु पुलिस के अनुसार, कैंडिडेट दोपहर 12:57 बजे अपने घर से निकली और 1:33 बजे परीक्षा केंद्र पहुंची, जबकि परीक्षा का समय 1:30 बजे था। केवल 3 मिनट की देरी के कारण इन्हें अनुमति नहीं दी गई। यह जानकारी CCTV फुटेज और रूट एनालिसिस से मिली है।

कांग्रेस की रैली ने बढ़ाई दिक्कत?

छात्राओं के माता-पिता का कहना है कि कांग्रेस की रैली के कारण वे पहुंचने में देरी हुई। लेकिन पुलिस ने फैक्ट चेक में बताया कि कैंडिडेट ने निर्धारित समय सीमा से केवल 33 मिनट पहले घर से निकलना शुरू किया था। उनका दावा है कि रैली के कारण कोई जाम नहीं लगा था और यातायात सामान्य था।

पिछले साल से कम हुए छात्र

पिछले साल इस परीक्षा में 22 लाख से अधिक छात्र शामिल हुए थे, लेकिन इस बार संख्या घटकर लगभग 20 लाख रह गई। 21 जून को आयोजित परीक्षा के लिए 5000 से अधिक परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। पेपर लीक के आरोपों के बाद पिछले महीने परीक्षा रद्द कर दी गई थी।

श्रद्धा और सपने का अंत

दुखद है कि दो मिनट की देरी ने इन छात्राओं के लंबे अरमानों को तोड़ दिया। उनकी आँखों में आंसू और चेहरे पर निराशा देखकर कोई भी महसूस कर सकता है कि मेडिकल की पढ़ाई के प्रति उनका समर्पण कितना गहरा है। यह सिर्फ उनके लिए नहीं, बल्कि हर उस छात्र के लिए एक सबक है जो भविष्य में परीक्षा देने जा रहे हैं।

छात्रों की आवाज़

वायरल वीडियो और छात्रों की बेबसी ने समाज में इस मुद्दे की गंभीरता को बढ़ाया है। क्या ऐसी हालातों में छात्रों को राहत मिलनी चाहिए? यह एक बड़ा सवाल है जो सभी को सोचने पर मजबूर करता है।

नए बदलाव की मांग

छात्रों और पैरेंट्स अब नए सुधारों की मांग कर रहे हैं ताकि आने वाले समय में ऐसी स्थिति से बचा जा सके। परीक्षाओं की समयसीमा को ध्यान में रखते हुए और ट्रैफिक प्रबंधन पर ध्यान देना जरूरी है, ताकि कोई सपना टूटने से बच सके।

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