मुंबई में 15 दिनों के लिए कड़े प्रतिबंधात्मक आदेश, गणेशोत्सव के दौरान बिना अनुमति पांच या अधिक लोगों के जुटने, जुलूस और लाउड्स्पीकर के इस्तेमाल पर रोक
गणेशोत्सव के दौरान शहर में कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक शांति बनाए रखने के लिए मुंबई पुलिस ने 9 सितंबर की मध्यरात्रि से 23 सितंबर 2026 की रात 11.59 बजे तक 15 दिनों के लिए प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किए हैं। मुंबई पुलिस की ओर से जारी आदेश में सार्वजनिक स्थानों पर पांच या उससे अधिक लोगों के जमावड़े, जुलूस तथा ध्वनि-विस्तारक, लाउडस्पीकर और संबंधित ध्वनि उपकरणों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया गया है। पुलिस के मुताबिक यह आदेश किसी प्रकार का बंद या तालाबंदी नहीं है। शहर में सामान्य आवागमन, रोजमर्रा के कामकाज और आवश्यक सेवाएं जारी रहेंगी। प्रतिबंधात्मक आदेश का मुख्य उद्देश्य गणेशोत्सव के दौरान बड़ी भीड़, जुलूस, संभावित विवाद, कानून-व्यवस्था की स्थिति और सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका को रोकना है।
महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम के तहत आदेश
मुंबई पुलिस ने यह आदेश महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम, 1951 की धारा 37(3), धारा 10(2) के साथ पढ़ते हुए जारी किया है। पुलिस के अनुसार विभिन्न स्रोतों से मिले इनपुट के आधार पर सार्वजनिक शांति भंग होने, अवैध जमावड़े, झड़प अथवा दंगा जैसी स्थिति और मानव जीवन एवं संपत्ति को संभावित खतरे को ध्यान में रखते हुए यह एहतियाती कदम उठाया गया है। महाराष्ट्र पुलिस की आधिकारिक जानकारी के अनुसार धारा 37 के तहत इस तरह के प्रतिबंधात्मक आदेश आम तौर पर 15 दिनों तक लागू किए जा सकते हैं और आवश्यकता पड़ने पर सक्षम प्राधिकारी द्वारा आगे भी आदेश जारी किए जा सकते हैं। ऐसे आदेशों का उद्देश्य सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना होता है।
पांच या अधिक लोगों के जमावड़े पर रोक
आदेश का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा सार्वजनिक स्थानों पर पांच या उससे अधिक व्यक्तियों के एकत्र होने से जुड़ा है। इसका अर्थ यह नहीं है कि मुंबई में लोगों का सामान्य आवागमन बंद हो जाएगा। बल्कि ऐसी भीड़ या सभा, जिसके लिए पुलिस की अनुमति आवश्यक है या जो प्रतिबंधित श्रेणी में आती है, उस पर कार्रवाई की जा सकती है। गणेशोत्सव के दौरान मुंबई में बड़ी संख्या में लोग सार्वजनिक मंडपों, विसर्जन स्थलों और जुलूसों में एकत्र होते हैं। ऐसे में पुलिस का उद्देश्य भीड़ के आकार और गतिविधियों पर नियंत्रण रखना है, ताकि किसी स्थान पर अचानक अत्यधिक भीड़ जमा होने से कानून-व्यवस्था या यातायात संबंधी समस्या पैदा न हो।
जुलूस निकालने के लिए अनुमति जरूरी
प्रतिबंधात्मक अवधि में बिना अनुमति जुलूस अथवा सार्वजनिक मार्च निकालने पर रोक रहेगी। मुंबई पुलिस की अपनी प्रक्रिया के अनुसार जुलूस या पदयात्रा के लिए पहले से अनुमति लेना आवश्यक है और आयोजकों को निर्धारित मार्ग, समय तथा अन्य शर्तों का पालन करना होता है। पुलिस की आधिकारिक व्यवस्था के मुताबिक जुलूस के दौरान यातायात बाधित न हो, इसके लिए आयोजकों की भी जिम्मेदारी तय की जाती है। इसका सीधा असर गणपति आगमन और विसर्जन से जुड़े आयोजनों पर पड़ सकता है। गणेशोत्सव मंडलों को पुलिस की ओर से निर्धारित नियमों और अनुमति की शर्तों का पालन करना होगा। बिना अनुमति अथवा निर्धारित शर्तों के विपरीत आयोजित कार्यक्रमों पर पुलिस कार्रवाई कर सकती है।
लाउडस्पीकर और ध्वनि-विस्तारक पर भी सख्ती
आदेश के तहत लाउडस्पीकर, ध्वनि-विस्तारक, संगीत दल और अन्य तेज आवाज वाले ध्वनि उपकरणों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया गया है। खासतौर पर जुलूसों के दौरान इनके इस्तेमाल को लेकर पुलिस सख्त रहेगी। गणेशोत्सव के दौरान ध्वनि प्रदूषण को लेकर पहले से ही प्रशासन और पुलिस की ओर से सतर्कता बरती जा रही है। हाल के दिनों में महाराष्ट्र के कई शहरों में ऊंची आवाज वाले ध्वनि उपकरणों और लेजर प्रकाश के इस्तेमाल को लेकर पुलिस ने कार्रवाई की चेतावनी दी है। मुंबई में भी ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियमों के पालन पर पुलिस का विशेष जोर है। मुंबई पुलिस की आधिकारिक जानकारी में लाउडस्पीकर के लिए अनुमति और निर्धारित शर्तों का उल्लेख है तथा नियमों का उल्लंघन होने पर अनुमति वापस लेने और कार्रवाई का प्रावधान बताया गया है।
जुलूस में आतिशबाजी पर भी पाबंदी
प्रतिबंधात्मक आदेश में जुलूसों के दौरान पटाखे और आतिशबाजी के इस्तेमाल पर भी रोक लगाई गई है। इसका उद्देश्य भीड़भाड़ वाले इलाकों में आग, भगदड़, चोट और अन्य दुर्घटनाओं की आशंका को कम करना है। गणेश विसर्जन के दौरान मुंबई की सड़कों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहते हैं और कई प्रमुख मार्गों पर यातायात भी प्रभावित होता है। ऐसे में पुलिस के लिए भीड़ के बीच आतिशबाजी को नियंत्रित करना सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
क्या मुंबई में लॉकडाउन जैसी स्थिति रहेगी?
नहीं। यह स्पष्ट करना जरूरी है कि प्रतिबंधात्मक आदेश को लॉकडाउन नहीं माना जाना चाहिए। मुंबई में दुकानें, कार्यालय, सार्वजनिक परिवहन, आवश्यक सेवाएं और सामान्य गतिविधियां अपने निर्धारित नियमों के अनुसार चलती रहेंगी। प्रतिबंध मुख्य रूप से उन गतिविधियों पर है जिनसे सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है—जैसे अनधिकृत जमावड़ा, जुलूस और प्रतिबंधित तरीके से ध्वनि उपकरणों का इस्तेमाल। इसलिए आम नागरिकों को शहर में आने-जाने या अपने दैनिक कामकाज को लेकर अनावश्यक भ्रमित होने की जरूरत नहीं है। हालांकि किसी सार्वजनिक कार्यक्रम, सभा या जुलूस में शामिल होने या आयोजन करने वालों को पुलिस के निर्देशों और अनुमति संबंधी नियमों की जानकारी जरूर रखनी होगी।
गणेशोत्सव को देखते हुए पुलिस की विशेष तैयारी
मुंबई में गणेशोत्सव के दौरान हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु सड़कों पर उतरते हैं। गणपति मंडपों, आगमन समारोहों और विसर्जन स्थलों पर भीड़ बढ़ने के कारण पुलिस, यातायात विभाग और नागरिक प्रशासन को अतिरिक्त व्यवस्था करनी पड़ती है। इस वर्ष भी पुलिस ने भीड़ और यातायात प्रबंधन के लिए विशेष तैयारियां की हैं। रिपोर्टों के अनुसार मुंबई में 850 से अधिक पुलिस मित्रों को भीड़ और यातायात प्रबंधन में पुलिस की सहायता के लिए तैनात किया जाना है। इन स्वयंसेवकों को उत्सव से पहले प्रशिक्षण भी दिया गया है।
नियमों का उल्लंघन पड़ा सकता है भारी
प्रतिबंधात्मक आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ पुलिस कानूनी कार्रवाई कर सकती है। इसलिए गणेश मंडलों, आयोजकों और आम नागरिकों के लिए जरूरी है कि वे किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम से पहले संबंधित पुलिस थाने से अनुमति और लागू शर्तों की जानकारी प्राप्त करें। विशेष रूप से जुलूस के आयोजकों को निर्धारित मार्ग, समय, भीड़ प्रबंधन, यातायात व्यवस्था और ध्वनि संबंधी नियमों का पालन करना होगा। मुंबई पुलिस की प्रक्रिया में आयोजकों को यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी दी गई है कि जुलूस निर्धारित मार्ग पर चले और यातायात में अनावश्यक बाधा उत्पन्न न हो।
गणेशोत्सव में शांति और सुरक्षा पर जोर
मुंबई का गणेशोत्सव धार्मिक आस्था के साथ-साथ शहर की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। लाखों श्रद्धालु गणपति दर्शन और विसर्जन कार्यक्रमों में हिस्सा लेते हैं। ऐसे में पुलिस के सामने एक ओर धार्मिक आयोजन को सुरक्षित तरीके से संपन्न कराने की चुनौती है, तो दूसरी ओर भीड़ नियंत्रण, यातायात, ध्वनि प्रदूषण और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी भी है। इसी वजह से पुलिस ने पहले से ही एहतियाती कदम उठाया है। 9 सितंबर से 23 सितंबर तक लागू होने वाला यह आदेश मुख्यतः संभावित अव्यवस्था को रोकने की पूर्व व्यवस्था है, न कि शहर की सामान्य जिंदगी रोकने का आदेश।
नागरिकों के लिए क्या ध्यान रखना जरूरी?
मुंबई पुलिस के इस आदेश के दौरान नागरिकों को विशेष रूप से कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए—
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बिना अनुमति पांच या उससे अधिक लोगों की सार्वजनिक सभा से बचें।
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बिना अनुमति जुलूस या सार्वजनिक मार्च आयोजित न करें।
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लाउडस्पीकर और ध्वनि-विस्तारक के इस्तेमाल के लिए लागू अनुमति और शर्तों का पालन करें।
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जुलूस के दौरान आतिशबाजी न करें।
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गणेशोत्सव मंडल पुलिस और स्थानीय प्रशासन की ओर से निर्धारित मार्ग एवं समय का पालन करें।
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पुलिसकर्मियों और यातायात पुलिस के निर्देशों का पालन करें।
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किसी अफवाह या भ्रामक संदेश पर भरोसा करने के बजाय मुंबई पुलिस की आधिकारिक सूचना पर विश्वास करें।
मुंबई पुलिस ने जारी की अधिसूचना
कुल मिलाकर, मुंबई में 9 से 23 सितंबर तक लागू होने वाला प्रतिबंधात्मक आदेश गणेशोत्सव के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने का कदम है। शहर बंद नहीं होगा और इसे लॉकडाउन समझना गलत होगा। लेकिन सार्वजनिक सभा, जुलूस, तेज ध्वनि और जुलूसों में आतिशबाजी जैसी गतिविधियों पर पुलिस की निगरानी और कार्रवाई पहले की तुलना में अधिक सख्त रहेगी। मुंबई पुलिस ने भी अपने आधिकारिक मंच पर 5 सितंबर को प्रतिबंधात्मक आदेश से संबंधित सूचना प्रकाशित की है।
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