दिल्ली, मुंबई, चेन्नई: पानी के लिए तरसेंगे भारत के शहर, मूडीज ने जारी की चेतावनी

The CSR Journal Magazine
भारत के कई बड़े शहर इन दिनों पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं। मुंबई की बीएमसी के अनुसार, शहर के जलाशयों में अब केवल 30 दिनों का पानी बचा है। वहीं, दिल्ली के कई क्षेत्रों में 15 से 20 दिनों से पानी की सप्लाई नहीं हो रही है। इसी बीच, मूडीज रेटिंग्स ने भारत में जल संकट की गंभीर चेतावनी जारी की है। एजेंसी के मुताबिक, अगर जल प्रबंधन व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो भारत भीषण जल संकट में फंस सकता है।

वाटर मैनेजमेंट में कमी

मूडीज ने भारत की जल प्रबंधन व्यवस्था को बिखरा हुआ और कम लचीला बताया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि विभिन्न सेक्टरों के बीच पानी के बंटवारे की धीमी प्रक्रिया संकट को और बढ़ा रही है। इसके साथ ही, चुनिंदा क्षेत्रों को दी जाने वाली सब्सिडी सरकारी खजाने पर दबाव बढ़ा रही है। भारत में 80 प्रतिशत मीठे पानी का उपयोग कृषि क्षेत्र में किया जाता है, जिसके कारण सरकारी खजाने पर राजकोषीय दबाव बढ़ता जा रहा है।

जल संकट के कारण

मूडीज की चेतावनी के अनुसार, जल संकट की स्थिति के कई कारण हैं। पहला, विभिन्न क्षेत्रों के बीच पानी का सही वितरण न होना। दूसरा, डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ पानी की खपत में वृद्धि, जबकि सप्लाई सीमित है। तीसरा, सूखा, बाढ़ और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियां भी जल संकट को बढ़ाने में सहायक हो रही हैं।

जल पुनर्वितरण में समस्याएं

मूडीज का कहना है कि राज्यों की अलग-अलग नीतियां जल वितरण को प्रभावित कर रही हैं। जल की मांग और उपलब्धता के बीच बड़ा अंतर संकट को और बढ़ा सकता है। इसके अलावा, कृषि, घरेलू उपयोग और औद्योगिक क्षेत्रों के बीच जल का पुनर्वितरण धीमा है। ऐसे में, जल संकट तेजी से बढ़ सकता है।

डिजिटल उद्योग की बढ़ती मांग

डिजिटल अर्थव्यवस्था में तेजी के साथ डेटा सेंटर, क्लाउड कंप्यूटिंग और एआई आधारित उद्योग भी तेजी से बढ़ रहे हैं। इन क्षेत्रों में सर्वर को कूल करने के लिए बड़ी मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है। औद्योगिक मांग बढ़ने से पहले से सीमित जल संसाधनों पर और दबाव पड़ रहा है।

भविष्य की चुनौतियां

भारत को अब भीषण सूखा, अनियमित मानसून और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों का सामना करना है। ऐसी स्थितियों का सीधा प्रभाव जल उपलब्धता और प्रबंधन पर पड़ता है। पाइपलाइन नेटवर्क की अक्षमताएं और भूजल का अत्यधिक दोहन भी जल संकट को बढ़ाने वाले मुख्य कारण हैं। कई राज्यों से भूजल स्तर गिरने की रिपोर्ट्स आ रही हैं।

मुंबई में जल संकट

देश की आर्थिक राजधानी मानी जाने वाली मुंबई में जल संकट गंभीर हो गया है। मुंबई को पानी देने वाले झीलों में जल भंडार केवल 9.33 प्रतिशत रह गया है। पिछले साल इसी समय यह आंकड़ा 12.27 प्रतिशत था, जो अब चिंता का विषय बन चुका है। मुंबई के पास अब केवल एक महीने का पानी बचा है।

दिल्ली और चेन्नई की स्थिति

दिल्ली में भी जल की गंभीर किल्लत है। कई इलाकों में 15 से 20 दिनों से पानी नहीं पहुंचा है। वर्तमान में दिल्ली के सभी जल स्रोतों से केवल 948 से 950 एमजीडी पानी उत्पादन हो रहा है, जो सामान्य से

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