166 बांधों में सिर्फ 26 प्रतिशत पानी, UP समेत इन राज्यों में पानी के लिए तरसेंगे लोग… भारत में जल संकट पर नई रिपोर्ट

The CSR Journal Magazine
देश में मानसून तो पहुंच चुका है, लेकिन बारिश का असमान वितरण लोगों के लिए मुश्किलें बढ़ा रहा है। केंद्रीय जल आयोग की नई रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि 166 प्रमुख बांधों में कुल क्षमता का केवल 26% पानी ही बचा है। इस कमी के चलते 490 जिलों में जल संकट की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जिससे खेती तथा बिजली उत्पादन प्रभावित होंगे।

बांधों की स्थिति और चिंताजनक आंकड़े

कई राज्यों में जलाशयों का जलस्तर सामान्य से बहुत कम है। देश में लगभग सभी हिस्सों में मानसून तो आ चुका है, पर बारिश की कमी से स्थिति गंभीर बनी हुई है। देश के जलाशयों में वर्तमान में करीब 47.725 बिलियन क्यूबिक मीटर (BCM) पानी है, जो उनकी कुल क्षमता 183.565 बिलियन क्यूबिक मीटर का केवल 26% है। यह स्थिति पिछले वर्ष और पिछले 10 वर्षों के औसत से भी बदतर है।

सर्वाधिक प्रभावित राज्य

केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट में 34 जलाशयों की स्थिति बेहद चिंताजनक बताई गई है। बिहार का चंदन बांध तो सिर्फ 1.86% पानी पर निर्भर है, जबकि अन्य जलाशयों जैसे ओडिशा का रेंगाली बांध (3.15%), कर्नाटक का आलमट्टी बांध (10.35%) और तुंगभद्रा बांध (15.80%) भी बहुत कम जल स्तर पर हैं।

बारिश की कमी और इसके परिणाम

कम बारिश के कारण कई राज्यों में मुश्किलें बढ़ने लगी हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार, ओडिशा, तेलंगाना, महाराष्ट्र, झारखंड और असम जैसे राज्यों में सामान्य से कम बारिश हुई है। इन जिलों में जल की उपलब्धता में कमी आने की आशंका है, जिससे भविष्य में पानी के लिए मारामारी हो सकती है।

दक्षिण भारत की जलस्थिति

दक्षिण भारत के राज्यों कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना की स्थिति सबसे खराब है। इन क्षेत्रों के जलाशयों में पानी का स्तर सामान्य से बहुत कम है। पश्चिम बंगाल और मिजोरम जैसे राज्यों में भी जल स्तर में कमी दिख रही है। यह संकट कृषि और जल आपूर्ति के लिए गंभीर खतरे बढ़ा सकता है।

जल संकट का व्यापक प्रभाव

जलाशयों में पानी की कमी केवल कृषि तक सीमित नहीं रहेगी। कई बड़े शहरों में पीने का पानी भी इन बांधों से ही आता है। अगर जल स्तर इसी तरह बना रहा, तो भविष्य में पानी की कटौती जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसके साथ ही, जलाशयों में पानी की कमी से बिजली उत्पादन में भी कमी आ सकती है, जिससे लोगों को और चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

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