बारिश से पहले MHADA अलर्ट! मुंबई की जर्जर इमारतों का जायजा लेने पहुंचे अधिकारी

The CSR Journal Magazine
मानसून आने से पहले मुंबई में जर्जर और खतरनाक इमारतों को लेकर प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में नजर आ रहा है। इसी कड़ी में म्हाडा (MHADA) के उपाध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी Sanjeev Jaiswal ने सोमवार को मुंबई शहर इलाके की कई जर्जर व धोकादायक इमारतों का दौरा किया और अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए। बारिश के मौसम और इमारतों की खराब हालत को देखते हुए प्रशासन अब किसी भी तरह का जोखिम लेने के मूड में नहीं है।

दादर से गिरगांव तक जर्जर इमारतों का निरीक्षण

म्हाडा की मुंबई बिल्डिंग रिपेयर एंड रिकंस्ट्रक्शन बोर्ड के तहत आने वाली पुरानी और जर्जर इमारतों का प्री-मानसून सर्वे जारी है। इसी के तहत संजीव जायसवाल ने दादर पश्चिम, प्रभादेवी, नागपाड़ा और गिरगांव इलाके की कुल 6 बेहद खतरनाक इमारतों का निरीक्षण किया। सबसे पहले उन्होंने दादर पश्चिम स्थित एस.के. बोले रोड पर मौजूद इलम महल और पुर्तगाली चर्च रोड की गोरेगांवकर वाड़ी इमारतों का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान इमारतों की हालत बेहद खराब पाई गई। इसके बाद अधिकारियों को आदेश दिया गया कि इन इमारतों में रह रहे लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया जाए।

लोगों की जान सबसे अहम – संजीव जायसवाल

निरीक्षण के दौरान संजीव जायसवाल ने साफ कहा कि मानसून के दौरान किसी भी तरह की जनहानि रोकना प्रशासन की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। उन्होंने नागरिकों से भी अपील की कि वे प्रशासन का सहयोग करें और खतरनाक इमारतों को तुरंत खाली करें। उन्होंने कहा कि कई इमारतें इतनी जर्जर हो चुकी हैं कि वहां रहना सीधे तौर पर जान जोखिम में डालने जैसा है। ऐसे में लोगों की सुरक्षा के लिए कड़े फैसले लेने जरूरी हो गए हैं।

समूह पुनर्विकास पर जोर

म्हाडा अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि संबंधित इमारत मालिकों और आसपास की उपकरप्राप्त इमारतों के मालिकों के साथ संयुक्त बैठक की जाए और डीसीआर 33(7) और 33(9) के तहत क्लस्टर रीडेवलपमेंट यानी समूह पुनर्विकास की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए। मुंबई में पुराने भवनों के पुनर्विकास का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में रहा है। अब मानसून से पहले प्रशासन इस दिशा में तेजी लाने की कोशिश कर रहा है।

प्रभादेवी की इमारतें भी खाली कराने के निर्देश

इसके बाद टीम प्रभादेवी पहुंची, जहां जगन्नाथ भातणकर मार्ग स्थित दया वीरा बिल्डिंग और वीरा बिल्डिंग का निरीक्षण किया गया। दोनों इमारतें बेहद खराब हालत में मिलीं। यहां रह रहे किरायेदारों और परिवारों को इमारत खाली करने की अपील की गई। म्हाडा की ओर से आश्वासन दिया गया कि नियमों के मुताबिक किरायेदारों को किराया सहायता दी जाएगी। साथ ही इमारत खाली होते ही उसे गिराने की कार्रवाई भी शुरू होगी। नागपाड़ा के मौलाना आजाद रोड और गिरगांव के मामा परमानंद मार्ग स्थित इमारतों का भी निरीक्षण किया गया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि इन इमारतों को जल्द खाली कराया जाए ताकि किसी भी हादसे से बचा जा सके। निरीक्षण के दौरान कामाठीपुरा पुनर्विकास प्रोजेक्ट की कुछ इमारतों का भी जायजा लिया गया।

मुंबई में हर साल बढ़ता है खतरा

मुंबई में हर मानसून के दौरान जर्जर इमारतें बड़ा खतरा बन जाती हैं। कई बार इमारत गिरने से लोगों की जान तक चली जाती है। ऐसे में इस बार म्हाडा ने मानसून से पहले ही सख्त रुख अपनाया है। प्रशासन का कहना है कि इस अभियान का मकसद लोगों की जान बचाना और समय रहते कार्रवाई करना है।
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