महाराष्ट्र: SIR में चौंकाने वाले आंकड़े, 17 लाख मतदाताओं के दो जगह नाम, 75 लाख वोटर ‘लापता’!

The CSR Journal Magazine
महाराष्ट्र में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत मतदाता सूची की जांच में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। कुल 17 लाख 63 हजार मतदाताओं के दो स्थानों पर नाम दर्ज हैं। इसके अलावा, 75 लाख मतदाताओं का पता नहीं चल सका है। यह आंकड़े राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय की ओर से जारी किए गए हैं। इन आंकड़ों ने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

गड़बड़ी की गंभीरता

महाराष्ट्र में कुल 9 करोड़ 78 लाख मतदाता हैं, जिनमें से 7 करोड़ 71 लाख मतदाताओं ने SIR प्रक्रिया पूरी कर ली है। इसका मतलब है कि लगभग 78.85 प्रतिशत मतदाता रजिस्ट्रेशन में सफल रहे हैं। लेकिन 2 करोड़ 7 लाख से अधिक मतदाता ऐसे हैं जिनके फॉर्म जमा नहीं हुए, जो कुल का 21.15 प्रतिशत है। यह स्थिति चुनाव आयोग के लिए चिंता का विषय बन चुकी है।

अन्य श्रेणियों का आंकड़ा

SIR में पाया गया है कि 17 लाख 63 हजार मतदाता ऐसे हैं जिनके नाम दो जगह अंकित हैं। इसके अलावा, 75 लाख 52 हजार मतदाता घर पर नहीं मिले। 67 लाख 80 हजार मतदाता स्थायी रूप से दूसरी जगह चले गए हैं, जबकि 34 लाख 81 हजार मृत हो चुके हैं। अन्य श्रेणी में 2 लाख 23 हजार मतदाता शामिल हैं। इस तरह के आंकड़े मतदान प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हैं।

ड्राफ्ट लिस्ट की तैयारी

चुनाव आयोग द्वारा 24 अगस्त को प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। जिन मतदाताओं का नाम सूची में नहीं होगा, वे अगले एक महीने में फॉर्म-6 जमा कराकर अपना नाम शामिल करा सकते हैं। इसके साथ ही, ‘अनकलेक्टेबल’ सूची में शामिल मतदाता भी इस प्रक्रिया का लाभ उठा सकते हैं। यह सभी नागरिक जो 1 दिसंबर 2026 तक 18 वर्ष की आयु में पहुंचेंगे, वे भी मतदाता बनने के लिए आवेदन कर सकेंगे।

आगे की प्रक्रिया

निर्वाचन आयोग की ओर से अंतिम मतदाता सूची 19 अक्टूबर 2026 को जारी की जाएगी। इस प्रक्रिया से जुड़ी हर जानकारी मतदाताओं को समय-समय पर दी जाएगी। ऐसे में, जो लोग चुनाव में अपनी भागीदारी निभाने के इच्छुक हैं, उन्हें इस समयसीमा का ध्यान रखना होगा।

राजनीतिक पृष्ठभूमि

ऐसे आंकड़ें सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि लोकतंत्र की नींव को दर्शाते हैं। चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बेहद आवश्यक है। यदि यह गड़बड़ियाँ न सुधारी गईं, तो आगामी चुनावों में मतदाता का विश्वास कम हो सकता है। इस स्थिति पर जो भी कदम उठाए जाएंगे, वह लोकतंत्र की मजबूती के लिए महत्वपूर्ण होंगे।”

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