टीवी जगत के जाने-माने अभिनेता पंकज धीर का 68 वर्ष की उम्र में कैंसर से निधन हो गया। वे बीते कुछ महीनों से गंभीर रूप से बीमार चल रहे थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 14 अक्टूबर की देर रात उन्होंने मुंबई में अंतिम सांस ली।पंकज धीर का सफर आसान नहीं था। उन्होंने अपने शुरुआती दिनों में संघर्ष करते हुए कई छोटे रोल किए। 1983 में उन्होंने फिल्म “सूर्यकांत” से डेब्यू किया, लेकिन पहचान उन्हें महाभारत ने दी।उनका चेहरा स्क्रीन पर आते ही सीन में गंभीरता और वजन जोड़ देता था। टीवी पर उन्होंने चंद्रकांता, युग, बेताल पचीसी, देत-देवता, सिया के राम जैसे सीरियल्स में काम किया।
आखिरी वक्त और विदाई
पिछले कुछ महीनों से पंकज धीर का कैंसर फिर से उभर आया था। इलाज के दौरान वे अक्सर अपने परिवार के साथ शांत जीवन बिता रहे थे। 14 अक्टूबर की रात उनकी हालत अचानक बिगड़ी और उन्होंने सुबह के करीब अंतिम सांस ली। 15 अक्टूबर को उनका अंतिम संस्कार मुंबई के विले पार्ले स्थित पवनहंस श्मशान घाट पर किया गया।परिवार, करीबी दोस्त और इंडस्ट्री के कई सितारे वहां मौजूद थे। उनके बेटे निकितिन धीर ने पिता को नम आंखों से अंतिम विदाई दी।
परिवार: कला और संस्कार की विरासत
पंकज धीर का परिवार भी फिल्म और टीवी जगत से जुड़ा है। उनकी पत्नी अनिता धीर खुद भी एक जानी-मानी अभिनेत्री हैं, जिन्होंने टीवी सीरियल्स में काम किया।उनके बेटे निकितिन धीर बॉलीवुड के मशहूर एक्टर हैं,जिन्होंने चेन्नई एक्सप्रेस में विलेन ‘टंगबली’ का यादगार रोल निभाया था। उनकी बहू कृतिका सेंगर टीवी की लोकप्रिय अभिनेत्री हैं, जिन्हें झांसी की रानी और पुनर्विवाह जैसे सीरियल्स से पहचान मिली।इस तरह पंकज धीर का घर असल में “एक्टिंग की पाठशाला” था, जहां अभिनय सिर्फ पेशा नहीं बल्कि विरासत थी।
कला के प्रति समर्पण: एक्टर से डायरेक्टर तक
कम ही लोग जानते हैं कि पंकज धीर केवल एक्टर ही नहीं बल्कि एक लेखक और निर्देशक भी थेI उन्होंने कई शॉर्ट फिल्म्स और म्यूजिक वीडियोज़ डायरेक्ट किए, साथ ही कई नए एक्टर्स को ट्रेन भी किया। उनका “Abbhinnay Acting Academy” नाम से मुंबई में खुद का एक्टिंग स्कूल था, जहां उन्होंने कई उभरते कलाकारों को अभिनय के गुर सिखाए। वे हमेशा कहा करते थे,अभिनय वही है जो दिल से महसूस किया जाए, न कि केवल कैमरे के लिए किया जाए।उनका यह विचार उन्हें बाकियों से अलग बनाता था।
सहकर्मियों और दोस्तों की यादें
पंकज धीर के निधन की खबर ने इंडस्ट्री को हिला दिया। महाभारत के उनके साथी कलाकारों ने सोशल मीडिया पर भावुक पोस्ट किए।
नितीश भारद्वाज (कृष्ण) ने लिखा —कर्ण की आत्मा जितनी सच्ची थी, उतनी ही सच्चाई पंकज भाई के जीवन में भी थी। वह आज भी हमारे दिलों में जीवित रहेंगे।
रोहताश गौड़ (चंद्रकांता के साथी कलाकार) ने लिखा —पंकज जी की मुस्कान और गंभीर आवाज, दोनों अब सिर्फ यादों में रह जाएंगे।
कर्ण’ की तरह जिए और वैसे ही गए
पंकज धीर की ज़िंदगी किसी युद्ध से कम नहीं थी। उन्होंने हर मोड़ पर संघर्ष कियाI इंडस्ट्री में पहचान के लिए, अपने किरदारों की गहराई के लिए और आखिर में बीमारी के खिलाफ भी। उन्होंने कभी हार नहीं मानी, जैसे महाभारत का कर्ण कभी झुका नहीं।उनकी शख्सियत में एक अद्भुत संयम थाI मंच पर गंभीर, लेकिन सेट के बाहर बेहद विनम्र और हंसमुख। वे कहा करते थे,
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