पुलिस के अनुसार रछपाल सिंह ने लुधियाना-फिरोजपुर रोड पर एक निजी अस्पताल के सामने दुकान किराये पर ली थी। उसने यहां जूतों की दुकान खोली, लेकिन दुकान नियमित रूप से नहीं खोलता था। इसके बजाय दुकान के बाहर चार CCTV कैमरे लगाए गए। इन कैमरों का रुख लुधियाना-फिरोजपुर रोड की तरफ था। पुलिस की जांच में सामने आया कि कैमरों की लाइव फीड मोबाइल एप के जरिए पाकिस्तान में बैठे संदिग्ध हैंडलरों तक पहुंचाई जा रही थी। आरोपी ने कैमरों की यूजर आईडी और पासवर्ड भी उनके साथ साझा किए थे।
बद्दोवाल कैंटोनमेंट से सिर्फ छह किलोमीटर दूर थी दुकान
जिस जगह CCTV कैमरे लगाए गए थे, वह बद्दोवाल कैंटोनमेंट से करीब छह किलोमीटर दूर बताई गई है। इसी वजह से सुरक्षा एजेंसियां मामले को गंभीरता से देख रही हैं। फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि कैमरों से केवल सड़क और आसपास के सामान्य इलाकों की निगरानी की जा रही थी या इसके जरिए सैन्य क्षेत्र से जुड़ी कोई संवेदनशील जानकारी भी भेजी गई। आरोपी के मोबाइल, कैमरों, स्टोरेज डिवाइस, मोबाइल एप और डिजिटल लेन-देन की जांच की जा रही है।
ISI तक कैसे पहुंचा रछपाल का कनेक्शन?
जांच में पुलिस को पता चला कि रछपाल का संपर्क डेरा बाबा नानक के एक व्यक्ति के जरिए जेल में बंद एक नशा तस्कर से हुआ था। पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस नशा तस्कर के संबंध पाकिस्तान में बैठे ISI से जुड़े हैंडलरों से बताए जा रहे हैं। पुलिस को शक है कि इसी नेटवर्क के जरिए रछपाल को लुधियाना में CCTV कैमरे लगाने का काम मिला। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि वह पाकिस्तान में बैठे हैंडलरों के सीधे संपर्क में कैसे आया। पुलिस के मुताबिक, रछपाल के खिलाफ पहले भी नशा तस्करी का मामला दर्ज है।
कैमरों के बदले मिल रहे थे लाखों रुपये
पुलिस के अनुसार CCTV कैमरों की लाइव फीड पाकिस्तान तक पहुंचाने के बदले रछपाल को करीब 2.5 से 3 लाख रुपये मिलने की बात सामने आई है। रेड के दौरान पुलिस आरोपी के घर से बड़ी मात्रा में सामान लेकर गई। आसपास के दुकानदारों ने बताया कि दो ट्रकों में सामान ले जाया गया, जिसमें भारी बैग भी शामिल थे। अब दुकान किराये पर देने वालों से भी पूछताछ की जा सकती है कि आरोपी का सत्यापन कराया गया था या नहीं।
तीन महीने में जासूसी से जुड़ी तीसरी घटना
लुधियाना का यह मामला पंजाब में पिछले कुछ महीनों के दौरान सामने आया जासूसी से जुड़ा तीसरा मामला बताया गया है। मई 2026 में पठानकोट के एक व्यक्ति को नेशनल हाईवे-44 के पठानकोट-जम्मू सेक्शन पर दुकान में CCTV कैमरा लगाने और उसका एक्सेस पाकिस्तान में बैठे हैंडलरों को देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद जुलाई में कपूरथला के माडल टाउन इलाके में बिजली के पोल पर लगा एक कैमरा मिला था। जांच में फिरोजपुर के सुखविंदर सिंह, उसके बेटे और संदीप सिंह को गिरफ्तार किया गया था। अब लुधियाना मामले के बाद सुरक्षा एजेंसियां यह भी जांच कर रही हैं कि क्या इन घटनाओं के पीछे एक ही नेटवर्क काम कर रहा है।
चार साल से गांव से बाहर रह रहा था आरोपी
रछपाल सिंह उर्फ भाला गुरदासपुर के फतेहगढ़ चूड़ियां क्षेत्र का रहने वाला बताया गया है। वह करीब चार साल से गांव से बाहर रह रहा था और कभी-कभार ही घर आता था। पुलिस के मुताबिक उसके परिवार की आर्थिक स्थिति खराब है। हालांकि परिवार ने कहा है कि रछपाल के खिलाफ पहले कोई FIR नहीं थी, जबकि पुलिस ने उसके खिलाफ पहले नशा तस्करी का मामला दर्ज होने की पुष्टि की है।
पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां अब क्या जांच रही हैं?
लुधियाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ Official Secrets Act, 1923 की धाराओं 3, 4, 5 और 9 तथा BNS की धारा 61(2) के तहत मामला दर्ज किया है। आरोपी से पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि CCTV कैमरे कहां से खरीदे गए, उन्हें लगाने में किसने मदद की, पाकिस्तान में बैठे हैंडलरों से उसका संपर्क किसके जरिए हुआ और कैमरों की लाइव फीड से वास्तव में कौन-कौन सी जानकारी भेजी गई।
अब जांच में किन सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं?
जांच आगे बढ़ने के साथ सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि रछपाल ने कैमरों की लाइव फीड कितने समय तक साझा की और इस दौरान पाकिस्तान में बैठे हैंडलरों को किस तरह की जानकारी मिली। इसके अलावा यह भी जांच की जा रही है कि कैमरों की स्थापना, इंटरनेट कनेक्शन और भुगतान की व्यवस्था किसने की थी। एजेंसियां आरोपी के मोबाइल फोन, चैट, कॉल रिकॉर्ड, बैंक खातों और डिजिटल भुगतान से जुड़े लेन-देन की फोरेंसिक जांच कर रही हैं। पिछले मामलों से संभावित कनेक्शन और इस नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!

