ज्येष्ठ अधिक मास 2026: 17 मई से मांगलिक कार्यों पर लगेगा प्रतिबंध

The CSR Journal Magazine
ज्येष्ठ अधिक मास, जिसे हिंदू धर्म में विशेष महत्व दिया जाता है, ऐसा एक महीना है जो हर तीन साल में कैलेंडर में जुड़ता है। इस माह में सकारात्मकता और धार्मिक क्रियाओं पर ध्यान केंद्रित करने की परंपरा है। ज्येष्ठ मास में धार्मिक कार्यों के प्रति श्रद्धा और मनोकामनाओं को प्राप्त करने की भावना होती है। यह महीना अक्सर आत्म-निरीक्षण और साधना का समय माना जाता है।

मांगलिक कार्यों पर रोक

इस साल, ज्येष्ठ अधिक मास 17 मई से शुरू होगा और इस दौरान मांगलिक कार्यों पर रोक लगेगी। विवाह, गृह प्रवेश, तथा अन्य शुभ कार्यों में धार्मिक मान्यताओं के कारण इस महीने में कई लोग सक्रियता नहीं दिखाते। इस समय को लोग साधना, ध्यान, और भगवान की पूजा में लगाया जाता है।

इस माह के दौरान करने योग्य कार्य

ज्येष्ठ अधिक मास में कुछ विशेष कार्य हैं जिन्हें करने की सलाह दी जाती है। जैसे कि सूर्योदय से पहले स्नान करना, गंगा स्नान का महत्व, और विशेष मंत्रों का जाप करना। इसके अलावा, इस माह में साधारण भोजन और सादा जीवन जीना भी अच्छा माना जाता है। लोग अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए अच्‍छे कर्म करते हैं और धार्मिक स्थलों की यात्रा करते हैं।

क्या न करें इस अधिक मास में

इस माह में कुछ कार्यों से बचना चाहिए, जैसे कि किसी के साथ विवाद करना, झगड़ा या असहमति। इसके साथ ही, किसी भी तरह के नए कार्यों की शुरुआत करना अवॉइड करें, क्योंकि धार्मिक मान्यता के अनुसार ये सब नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। लोग इस समय योजना बनाने में सावधानी बरतते हैं और सामान्यतः भोग-विलास से दूर रहने का प्रयास करते हैं।

ध्यान रखने योग्य बातें

ज्येष्ठ अधिक मास के दौरान, ध्यान और साधना को प्राथमिकता दें। यह समय आत्म-समर्पण और भक्ति का होता है। पक्षियों को भोजन कराने, वृक्षारोपण, और जरूरतमंदों की सहायता करने को प्रोत्साहित किया जाता है। इसके अलावा, श्रद्धा और विश्वास के साथ किए गए कार्यों का फल हमेशा सकारात्मक होता है।

पूजा और अनुष्ठान का महत्व

इस माह का एक विशेष पहलू है पूजा और अनुष्ठान। भक्तजन इस समय विशेष ध्यान देते हैं कि किस प्रकार से अपने घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करें। देवताओं की पूजा, मंत्रों का उच्चारण और दीप जलाना इस माह की पहचान है। जबकि विशेष अनुष्ठान और यज्ञ करने का कार्य भी इस समय बड़े उत्साह से किया जाता है।

सचेत रहकर करें संकल्प

इस ज्येष्ठ अधिक मास में भक्तों से अपेक्षित है कि वे सही संकल्प लेकर आगे बढ़ें। नकारात्मकता, तनाव और नकारात्मक विचारों से दूर रहकर यदि कोई अपनी आस्था और विश्वास के साथ आगे बढ़ता है, तो जीवन की हर चुनौती को पार करना संभव हो जाता है। अंत में, यह समय हमें एक नई सोच और दिशा देने के लिए है।

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