सुप्रीम कोर्ट को मिलीं नई महिला जज: कौन हैं जस्टिस सुनीता अग्रवाल? वकील से शीर्ष अदालत तक की पूरी कहानी
भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में 6 अक्टूबर 2026 का दिन एक बड़े मील के पत्थर के रूप में दर्ज हो गया है। देश की शीर्ष अदालत, यानी सुप्रीम कोर्ट को तीन नए न्यायाधीश मिले हैं, जिनमें जस्टिस सुनीता अग्रवाल का नाम सबसे प्रमुखता से लिया जा रहा है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की 13वीं महिला जज के रूप में शपथ लेकर इतिहास रच दिया है। इस नियुक्ति के साथ ही सुप्रीम कोर्ट में महिला जजों की संख्या अब तीन हो गई है।
नई दिल्ली के सुप्रीम कोर्ट परिसर में आयोजित एक गरिमामय समारोह में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत ने जस्टिस सुनीता अग्रवाल को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। उनके साथ ही जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह ने भी शीर्ष अदालत के न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। इस विशेष रिपोर्ट में हम जानेंगे जस्टिस सुनीता अग्रवाल के शुरुआती जीवन, उनके वकालत के सफर, ऐतिहासिक फैसलों और भारतीय न्यायपालिका में महिलाओं के प्रतिनिधित्व पर उनके आगमन के प्रभाव के बारे में।
शुरुआती जीवन और शिक्षा
जस्टिस सुनीता अग्रवाल का जन्म 30 अप्रैल 1966 को उत्तर प्रदेश में हुआ था। बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि की धनी सुनीता अग्रवाल की रुचि कानून और न्याय व्यवस्था में थी। उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा के तहत अवध विश्वविद्यालय से साल 1989 में लॉ (LLB) की डिग्री हासिल की। कानून की बारीकियों को समझने और समाज के शोषित व वंचित तबकों को न्याय दिलाने के संकल्प के साथ उन्होंने वकालत की दुनिया में कदम रखा।
इलाहाबाद हाई कोर्ट में दो दशकों की शानदार प्रैक्टिस
लॉ की पढ़ाई पूरी करने के बाद, उन्होंने 16 दिसंबर 1990 को उत्तर प्रदेश बार काउंसिल (UP Bar Association) में एक वकील के रूप में अपना पंजीकरण कराया। इसके बाद उन्होंने देश के सबसे बड़े उच्च न्यायालयों में से एक, इलाहाबाद हाई कोर्ट के सिविल साइड में अपनी प्रैक्टिस शुरू की। लगभग 21 वर्षों तक उन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट में एक बेहद सक्रिय और सम्मानित वकील के रूप में कार्य किया। इस दौरान उन्होंने दीवानी (Civil), संवैधानिक और राजस्व से जुड़े जटिल मुकदमों की पैरवी की। बार (Bar) में उनकी साख एक बेहद निष्पक्ष, तार्किक और कानून की गहरी समझ रखने वाली वकील के रूप में स्थापित हुई।
न्यायिक करियर की शुरुआत: हाई कोर्ट की जज से गुजरात की चीफ जस्टिस तक
वकालत के क्षेत्र में उनके बेहतरीन योगदान और कानून के प्रति उनके समर्पण को देखते हुए साल 2011 में उन्हें न्यायपीठ में शामिल होने का अवसर मिला।
• अतिरिक्त न्यायाधीश (Additional Judge): 21 नवंबर 2011 को उन्हें इलाहाबाद हाई कोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया।
• स्थायी न्यायाधीश (Permanent Judge): उनकी कार्यकुशलता को देखते हुए 6 अगस्त 2013 को उन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट के स्थायी जज के रूप में शपथ ली।
• गुजरात हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस: न्यायपालिका में वरिष्ठता और उत्कृष्ट सेवा रिकॉर्ड के कारण सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 5 जुलाई 2023 को उनके नाम की सिफारिश गुजरात हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पद के लिए की। 23 जुलाई 2023 को उन्होंने गुजरात हाई कोर्ट के 29वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। वे गुजरात हाई कोर्ट के इतिहास में मुख्य न्यायाधीश का पद संभालने वाली दूसरी महिला बनीं।
सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति का पूरा घटनाक्रम
जस्टिस सुनीता अग्रवाल को सुप्रीम कोर्ट भेजने का फैसला हाल ही में लिया गया। 28 सितंबर 2026 को भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने उनके नाम की सिफारिश केंद्र सरकार को भेजी थी। कॉलेजियम का मानना था कि जस्टिस अग्रवाल की पदोन्नति से न केवल देश की शीर्ष अदालत को एक अनुभवी न्यायाधीश मिलेगा, बल्कि उच्च न्यायपालिका में महिलाओं का प्रतिनिधित्व भी मजबूत होगा। इसके बाद 5 अक्टूबर 2026 को देश के केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) के माध्यम से जानकारी दी कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कॉलेजियम की इस सिफारिश को अपनी आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इसके अगले ही दिन यानी 6 अक्टूबर 2026 को भव्य शपथ ग्रहण समारोह के साथ वे सुप्रीम कोर्ट की जज बन गईं।
न्यायपालिका में महिला प्रतिनिधित्व: एक अहम बदलाव
जस्टिस सुनीता अग्रवाल की इस नियुक्ति के साथ ही सुप्रीम कोर्ट में महिला जजों की कुल संख्या अब तीन हो गई है। वर्तमान में शीर्ष अदालत में उनके अलावा दो अन्य महिला न्यायाधीश हैं:
1. जस्टिस बी. वी. नागरत्ना: जो 31 अगस्त 2021 से सुप्रीम कोर्ट में सेवाएं दे रही हैं और सितंबर 2027 में देश की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश (CJI) बनने की कतार में हैं।
2. जस्टिस वी. मोहना: जिन्हें 2 जून 2026 को सीधे बार (वकील से सीधे जज) से सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत किया गया था।
न्यायविदों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट में महिला न्यायाधीशों की उपस्थिति से न्याय के सिद्धांतों में अधिक संवेदनशीलता और विविधता आती है, खासकर उन मामलों में जो महिलाओं के अधिकारों, पारिवारिक कानूनों और मानव अधिकारों से जुड़े होते हैं।
सुप्रीम कोर्ट की वर्तमान स्थिति और जजों की संख्या
जस्टिस सुनीता अग्रवाल, जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की इन तीन नई नियुक्तियों के बाद सुप्रीम कोर्ट में कार्यरत न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 37 हो गई है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों के कुल स्वीकृत पदों की संख्या 38 है। इसका मतलब है कि अब शीर्ष अदालत में केवल एक पद रिक्त रह गया है। जजों की संख्या बढ़ने से लंबे समय से लंबित मुकदमों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
महिला वकीलों के लिए प्रेरणा
एक वकील के रूप में करियर की शुरुआत कर देश के सर्वोच्च न्यायालय तक का सफर तय करने वाली जस्टिस सुनीता अग्रवाल का न्यायिक जीवन देश की युवा महिला वकीलों के लिए प्रेरणा का एक बड़ा स्रोत है। इलाहाबाद हाई कोर्ट और गुजरात हाई कोर्ट में उनके द्वारा दिए गए ऐतिहासिक निर्णय और प्रशासनिक क्षमताएं इस बात का प्रमाण हैं कि सुप्रीम कोर्ट में उनका कार्यकाल देश की न्याय व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाएगा। पूरा देश अब शीर्ष अदालत में उनके नए और प्रभावी फैसलों की उम्मीद कर रहा है।
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