सरहद पर खुशहाली का नया सवेरा: PMAY से पक्के घरों में सुरक्षित हुए जम्मू के सीमावर्ती ग्रामीण

The CSR Journal Magazine

कच्चे मकानों के खौफ से मिली मुक्ति: प्रधानमंत्री आवास योजना ने बदली जम्मू के सीमावर्ती गांवों की तकदीर

भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बसे जम्मू संभाग के सीमावर्ती गांवों में एक बड़ा और खामोश बदलाव आ चुका है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ (PMAY) ने सीमा पर रहने वाले हजारों गरीब परिवारों की जिंदगी को पूरी तरह बदल दिया है। दशकों से मिट्टी और घास-फूस के कच्चे मकानों में असुरक्षित जीवन जीने वाले इन ग्रामीणों को अब अपने पक्के और मजबूत आशियाने मिल गए हैं। यह योजना सीमावर्ती क्षेत्रों में न केवल सिर्फ ‘छत’ देने का जरिया बनी है, बल्कि इसने स्थानीय लोगों को प्राकृतिक आपदाओं और मौसम की मार से सुरक्षा प्रदान कर गरिमामय जीवन का अवसर दिया है।

बरसात का खौफ और रातों की बेबसी: पुराना दौर

अंतरराष्ट्रीय सीमा के बिल्कुल करीब बसे जम्मू के ‘मढ़ ब्लॉक’ जैसे सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले परिवारों के लिए मानसून किसी डरावने सपने जैसा होता था। मिट्टी के कच्चे घर और जर्जर छतें भारी बारिश का दबाव नहीं झेल पाती थीं। मढ़ ब्लॉक की रहने वाली लाभार्थी निशा देवी और चंचला देवी ने पुराने दिनों को याद करते हुए बताया, “जब भी रात को तेज बारिश होती थी, तो हम सो नहीं पाते थे। घर के भीतर पानी भर जाता था, जिससे हमारे बिस्तर और कपड़े तक भीग जाते थे। हमें हर वक्त यह डर सताता रहता था कि कहीं कच्ची दीवारें ढह न जाएं और कोई बड़ा हादसा न हो जाए।” ऐसी विकट परिस्थितियों में ग्रामीण अक्सर अपने बर्तनों को जगह-जगह सजाकर टपकते पानी को रोकने की नाकाम कोशिश करते थे। कच्चे घरों की सीलन और कड़ाके की ठंड के कारण बच्चे और बुजुर्ग अक्सर बीमार पड़ जाते थे। सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण सुरक्षा की चिंताएं पहले ही बनी रहती थीं, उस पर मौसम की यह बेबसी ग्रामीणों की जिंदगी को और भी ज्यादा दूभर बना देती थी।

विकास की नई किरण: PMAY ने दिया पक्के घरों का अधिकार

ग्रामीणों के इस अंतहीन दर्द को दूर करने में प्रधानमंत्री आवास योजना – ग्रामीण (PMAY-G) एक बड़ा वरदान साबित हुई है। इस योजना के तहत जम्मू-कश्मीर जैसे केंद्र शासित प्रदेशों और हिमालयी राज्यों के लिए केंद्र और राज्य सरकार के बीच 90:10 के विशेष बजट अनुपात के तहत वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। प्रत्येक पात्र लाभार्थी को अपना पक्का मकान बनाने के लिए ₹1.30 लाख की सीधी यूनिट सहायता राशि दी जाती है, जो सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर की जाती है। जम्मू और इसके आसपास के सीमावर्ती जिलों जैसे राजौरी और किश्तवार में इस योजना का क्रियान्वयन बेहद आक्रामक तरीके से किया गया है। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, अकेले राजौरी जिले में ही हजारों लाभार्थियों को घर निर्माण के लिए किस्तें जारी की जा चुकी हैं और प्रशासन का लक्ष्य शत-प्रतिशत पात्र आबादी को पक्के मकानों से कवर करना है। योजना के तहत न्यूनतम 25 वर्ग मीटर का कारपेट एरिया सुनिश्चित किया गया है, जिसमें एक स्वच्छ रसोईघर (Hygienic Cooking Space) का होना अनिवार्य है। इससे ग्रामीण महिलाओं को भी धुएं से मुक्ति मिली है और उनका स्वास्थ्य बेहतर हुआ है।

लाभार्थियों ने जताया प्रधानमंत्री का आभार

सीमावर्ती ब्लॉक मढ़ के ग्रामीणों ने पक्के मकान मिलने के बाद देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की है।  एक अन्य ग्रामीण लाभार्थी ने भावुक होते हुए कहा, “हमारा पक्का घर बनने का सपना कभी पूरा नहीं होता अगर सरकार हमारी मदद नहीं करती। पीएम मोदी ने हम जैसे गरीबों को सम्मान से जीने का जरिया दिया है। अब जब रात को बारिश होती है, तो हम बिना किसी डर के चैन की नींद सोते हैं। हमारे बच्चे अब सुरक्षित माहौल में पढ़ाई कर पा रहे हैं।” इस योजना ने केवल लोगों को प्राकृतिक आपदाओं से ही सुरक्षा नहीं दी, बल्कि सामाजिक समरसता और महिला सशक्तिकरण की भी एक नई इबारत लिखी है। नियमों के मुताबिक, PMAY के तहत घरों का मालिकाना हक मुख्य रूप से परिवार की महिला मुखिया के नाम पर या संयुक्त रूप से दिया जाता है। इसने सीमावर्ती गांवों की महिलाओं को समाज में एक नया आत्मविश्वास और आर्थिक सुरक्षा की भावना दी है।

बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा का संगम

केंद्र सरकार की इस योजना की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह केवल चार दीवारें खड़ी करने तक सीमित नहीं है। PMAY के तहत बनने वाले इन घरों को अन्य कल्याणकारी योजनाओं से भी जोड़ा गया है। ‘स्वच्छ भारत मिशन’ के तहत हर घर में शौचालय का निर्माण कराया जा रहा है, ‘उज्ज्वला योजना’ के तहत गैस कनेक्शन और ‘सौभाग्य योजना’ के जरिए बिजली की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए पक्के मकानों का मिलना राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी बेहद अहम है। मजबूत और स्थायी आशियाने मिलने से सीमा पर आबादी का पलायन रुका है। जब सीमावर्ती गांवों में नागरिक सुरक्षित और स्थिर जीवन जीते हैं, तो वे देश की सीमाओं की सुरक्षा में प्रथम प्रहरी के रूप में और मजबूती से खड़े होते हैं।

सही नीति से जीवन सुधार संभव

जम्मू के सीमावर्ती गांवों में प्रधानमंत्री आवास योजना की सफलता इस बात का प्रमाण है कि सरकारी नीतियां यदि सही इरादे से जमीन पर उतारी जाएं, तो वे आम आदमी के जीवन में कितना बड़ा क्रांतिकारी बदलाव ला सकती हैं। मिट्टी के कच्चे ढहते घरों से निकलकर कंक्रीट के सुरक्षित और सुंदर मकानों में प्रवेश करने वाले इन ग्रामीणों की आंखों में अब भविष्य के सुनहरे सपने हैं। “हर सिर पर पक्की छत” का यह संकल्प जम्मू-कश्मीर के सुदूरतम कोनों में विकास, स्थिरता और खुशहाली का एक नया सवेरा लेकर आया है।

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