नदियों में प्रदूषण पर SC की राजस्थान सरकार को कड़ी फटकार

The CSR Journal Magazine
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान में जोजरी, बांदी और लूनी नदियों के पारिस्थितिकी तंत्र में हो रहे कथित अवैध खनन को लेकर राज्य सरकार को फटकार लगाई है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो वह इस मामले की सीबीआई जांच का आदेश दे सकती है। यह टिप्पणी कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए की, जो कि प्रदूषण के मुद्दे से जुड़ी है।

नदियों में बढ़ता प्रदूषण

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि बांदी और लूनी नदियों में प्रदूषण तेजी से फैल रहा है। इन नदियों के पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने के लिए राज्य अधिकारियों की जिम्मेदारी को लेकर अदालत ने नाराजगी जताई। न्यायालय ने कहा कि राज्य के अधिकारी अपने कर्तव्यों का पालन करने में पूरी तरह से विफल रहे हैं। यह स्थिति चिंताजनक है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

अवैध खनन और उद्योगों का मुद्दा, राजस्थान सरकार को निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने अवैध खनन, खनन पट्टों के नियमितीकरण और बिना आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र के चल रहे उद्योगों के मुद्दों पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि 20 लाख लोगों को नरक में जीने की तुलना कुछ लोगों की आर्थिक जीविका से नहीं की जा सकती है। यह टिप्पणी उस समय की गई जब अदालत ने देखा कि नदियों का पारिस्थितिकी तंत्र पूरी तरह से नष्ट हो चुका है। कोर्ट ने राजस्थान सरकार को निर्देश दिया है कि वह नदी प्रणाली को बहाल करने के लिए एक विस्तृत प्रस्ताव प्रस्तुत करे। अगली सुनवाई 27 नवंबर को होगी। इससे पहले, अगस्त में, सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को जोजरी, बांदी और लूनी नदियों में प्रदूषण से निपटने के लिए एक एकीकृत समन्वय समूह गठित करने का निर्देश दिया था।

पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा

पिछले साल नवंबर में, सुप्रीम कोर्ट ने प्रदूषण रोकने और उपचारात्मक उपायों की निगरानी करने के लिए एक उच्च-स्तरीय पारिस्थितिकी तंत्र निरीक्षण समिति का गठन किया था। यह समिति नदियों के पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने में मदद करेगी। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि राज्य सरकार ने प्रभावी सुधारात्मक कदम नहीं उठाए, तो संबंधित अधिकारियों को इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

अगली सुनवाई का इंतजार

अब सभी की नजरें 27 नवंबर की अगली सुनवाई पर हैं। इस सुनवाई में राजस्थान सरकार को अपनी योजनाओं और कार्यों का खाका पेश करना होगा। अदालत ने यह भी कहा कि यदि आवश्यक सुधार नहीं किए गए, तो राज्य सरकार को इसके गंभीर नतीजों का सामना करना पड़ सकता है। यह मामला केवल नदियों के प्रदूषण का नहीं, बल्कि लाखों लोगों की जिंदगी का भी है।

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