मुंबई में प्रदूषण पर बीएमसी सख्त, निर्माण स्थलों की धूल और पटाखों के शोर पर होगी कार्रवाई
मुंबई में बढ़ते वायु प्रदूषण और पटाखों से होने वाले ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने सख्त रुख अपनाया है। बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिड़े ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि बंबई उच्च न्यायालय की ओर से पटाखों के शोर और उससे होने वाले स्वास्थ्य संबंधी नुकसान को लेकर जारी निर्देशों का कड़ाई से पालन कराया जाए। इसके साथ ही शहर की वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए प्रभावी कदम उठाने और निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल पर नियंत्रण सुनिश्चित करने को कहा गया है। बीएमसी की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, आयुक्त अश्विनी भिड़े ने वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए महानगरपालिका की ओर से तैयार की गई 28 सूत्रीय मार्गदर्शिका को भी सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्माण स्थलों और उनसे सटी सड़कों पर धूल रोकने की जिम्मेदारी संबंधित विकासकों और निर्माणकर्ताओं की होगी। यदि वायु गुणवत्ता मापने वाले उपकरण गलत आंकड़े दिखाते हैं या काम नहीं करते हैं, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। ये निर्देश मुंबई में वायु गुणवत्ता सुधारने, निर्माण कार्यों से फैलने वाली धूल को कम करने और त्योहारों के दौरान पटाखों से होने वाले शोर के दुष्प्रभावों को नियंत्रित करने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं।
निर्माण स्थलों पर धूल रोकने की जिम्मेदारी बिल्डरों की
मुंबई में सड़कों, इमारतों, मेट्रो परियोजनाओं और अन्य बुनियादी ढांचा निर्माण कार्यों से निकलने वाली धूल वायु प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों में शामिल है। निर्माण स्थलों पर उचित सुरक्षा इंतजाम नहीं होने से धूल आसपास की सड़कों और रिहायशी इलाकों तक फैलती है। इससे पैदल चलने वालों, वाहन चालकों, दुकानदारों और आसपास रहने वाले लोगों को परेशानी होती है। बीएमसी की संशोधित 28 सूत्रीय मार्गदर्शिका में निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रित करने के लिए कई प्रावधान हैं। इनमें बड़े निर्माण स्थलों के चारों ओर सुरक्षा अवरोध लगाना, धूल उड़ने से रोकने के उपाय करना, निर्माण सामग्री का उचित भंडारण और परिवहन के दौरान उसे ढकना तथा आसपास की सड़कों की सफाई जैसे उपाय शामिल हैं। बीएमसी की पर्यावरण संबंधी रिपोर्ट के अनुसार, यह मार्गदर्शिका 15 अक्टूबर 2024 को संशोधित की गई थी और संबंधित पक्षों के लिए इसका पालन अनिवार्य है। आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि निर्माण स्थलों और उनसे जुड़ी सड़कों पर धूल नियंत्रण की जिम्मेदारी संबंधित विकासकों और निर्माणकर्ताओं की होगी। इसका अर्थ है कि केवल निर्माण स्थल के भीतर ही नहीं, बल्कि वहां से बाहर निकलने वाली धूल और आसपास के क्षेत्र में फैलने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए भी उचित व्यवस्था करनी होगी।
वायु गुणवत्ता मापने वाले उपकरणों पर भी निगरानी
बीएमसी ने निर्माण स्थलों पर लगाए गए वायु गुणवत्ता निगरानी उपकरणों और संवेदकों की कार्यप्रणाली पर भी ध्यान देने के निर्देश दिए हैं। इन उपकरणों का उद्देश्य आसपास की हवा में प्रदूषण के स्तर की जानकारी उपलब्ध कराना है। यदि उपकरण बंद पड़े हों, उनमें तकनीकी खराबी हो या वे गलत आंकड़े दिखाएं, तो प्रदूषण की वास्तविक स्थिति का आकलन प्रभावित हो सकता है। ऐसे में बीएमसी आयुक्त ने निर्देश दिया है कि गलत आंकड़े दिखाने वाले अथवा काम नहीं करने वाले उपकरणों के लिए जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए। इससे निर्माण स्थलों पर प्रदूषण की निगरानी को अधिक प्रभावी बनाने और आंकड़ों की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है।
पटाखों के शोर पर उच्च न्यायालय के निर्देश
पटाखों से होने वाले ध्वनि और वायु प्रदूषण का मामला भी समीक्षा बैठक का प्रमुख विषय रहा। बंबई उच्च न्यायालय ने सितंबर 2026 में त्योहारों के दौरान सार्वजनिक सड़कों पर पटाखे फोड़ने और अत्यधिक शोर को लेकर कड़े निर्देश दिए थे। अदालत ने स्पष्ट किया कि त्योहारों के दौरान भी ध्वनि प्रदूषण से संबंधित नियमों का पालन जरूरी है। 15 अक्टूबर 2026 को उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक सड़कों, गलियों और फुटपाथों पर पटाखे फोड़ने पर रोक का निर्देश पूरे वर्ष और सभी त्योहारों पर लागू रहेगा। अदालत ने बीएमसी और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल को इस संबंध में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने के भी निर्देश दिए।अदालत की चिंता केवल पटाखों से होने वाले शोर तक सीमित नहीं है। इनके धुएं से हवा में हानिकारक कण और प्रदूषक बढ़ सकते हैं। तेज आवाज का असर बच्चों, बुजुर्गों, बीमार व्यक्तियों और पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों पर भी पड़ सकता है। अस्पतालों, विद्यालयों और अन्य शांत क्षेत्र घोषित स्थानों के आसपास नियमों का पालन विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
मुंबई की हवा सुधारने के लिए पहले से तैयारी
मुंबई में मानसून के बाद हवा की गुणवत्ता बिगड़ने की आशंका को देखते हुए प्रदूषण नियंत्रण के उपायों को समय रहते लागू करने की जरूरत है। बारिश के दौरान वातावरण में मौजूद कुछ प्रदूषक नीचे बैठ जाते हैं, लेकिन बारिश कम होने और निर्माण कार्यों से धूल बढ़ने पर वायु गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। बीएमसी की समीक्षा बैठक में आयुक्त ने अधिकारियों को प्रदूषण नियंत्रण के उपायों को प्रभावी तरीके से लागू करने के निर्देश दिए। इसके लिए निर्माण स्थलों की निगरानी, धूल नियंत्रण, वायु गुणवत्ता उपकरणों की जांच और उच्च न्यायालय के आदेशों का पालन सुनिश्चित करना जरूरी होगा।
आयुक्त उपायुक्त और अधिकारियों की उपस्थिति
इस बैठक में अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त (पूर्वी उपनगर) डॉ. अविनाश ढाकणे, उपायुक्त (आयुक्त कार्यालय) प्रशांत गायकवाड, उपायुक्त (पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन) अविनाश काटे, सभी क्षेत्रीय संयुक्त आयुक्त, उपायुक्त, सहायक आयुक्त और संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे। अब निगरानी के साथ कार्रवाई की प्रभावशीलता भी अहम होगी। निर्माण स्थलों पर नियमों का पालन कितना हो रहा है, खराब निगरानी उपकरणों को कितनी जल्दी ठीक किया जाता है और पटाखों से संबंधित न्यायालय के निर्देशों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध क्या कदम उठाए जाते हैं, इससे मुंबई में प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों का वास्तविक असर तय होगा।
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