भारत में पहली बार 19 महीने के चीते की गोली मारकर हत्या, कूनो नेशनल पार्क से मुरैना में मिली थी घायल चीता, इलाज के दौरान हुई मौत, जांच जारी

The CSR Journal Magazine
कूनो नेशनल पार्क से बाहर निकलकर एक 19 महीने का चीता मुरैना जिले में घायल अवस्था में मिला था। इस चीते को गंभीर चोटों के साथ पाया गया था और इसके बाद इसे कूनो लाकर इलाज के लिए भर्ती कराया गया था। हाल ही में, इस चीते की मौत हो गई, जिससे वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर कई सवाल उठ खड़े हुए हैं। डॉक्टरों के अनुसार, चीते को गोली मारी गई थी, जो भारत में चीता प्रोजेक्ट के तहत पहली बार हुई है।

चीते के पेट में मिले छर्रे, गोली लगने से हुई मौत

चीते की मौत के बाद जब उसकी जांच की गई, तो पेट में कई छर्रे मिले। यह स्पष्ट है कि घायल चीते को बेहद करीब से गोली मारी गई थी। इसे 25 अक्टूबर की रात मुरैना और श्योपुर जिलों की सीमा से रेस्क्यू किया गया था। बेहतर इलाज के लिए इसे जबलपुर स्थित एक पशु चिकित्सा केंद्र में भेजा गया था। इस घटना ने चीता प्रोजेक्ट की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

पहली बार हुई गोलीबारी की घटना, जांच जारी

यह पहली बार है जब भारत में किसी चीते की गोली मारकर हत्या की गई है। 17 सितंबर 2022 को भारत में नामीबिया से आठ चीते लाए गए थे। इसके बाद से भारत में चीतों की आबादी धीरे-धीरे बढ़ रही थी। अब इस घटना के बाद जांच टीम यह पता कर रही है कि किस हथियार का उपयोग किया गया। स्पेशल टाइगर स्ट्राइक फोर्स को इस इलाके में तैनात किया गया है ताकि वन्यजीवों की रक्षा की जा सके।

बीहड़ का इलाका, अवैध शिकार की आशंका

मुरैना का इलाका बीहड़ है, जहां देसी बंदूकें आसानी से मिल जाती हैं। इस घटना के पीछे की वजह अभी तक स्पष्ट नहीं है। एक संभावना यह भी है कि हमलावर चीते को अचानक देखकर घबरा गया होगा और गोली चला दी होगी। शायद उसने चीते को तेंदुआ समझकर गोली चलाई। लेकिन अभी तक किसी संदिग्ध की पहचान नहीं हुई है। कूनो प्रशासन ने कहा है कि चोटों के कारणों का पता लगाने के लिए जांच चल रही है।

अवैध शिकार की बढ़ती चिंता

कूनो नेशनल पार्क के आसपास अवैध शिकार हमेशा से एक बड़ी चिंता का विषय रहा है। कुछ साल पहले, कूनो के बफर जोन में शिकारियों ने एक तेंदुए को मार दिया था। हाल ही में हिरणों के शिकार की भी खबरें आई थीं, जिससे वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

चीते की विलुप्ति का इतिहास

गौरतलब है कि भारत में 1952 में चीते विलुप्त हो गए थे। 2022 में, चीता प्रोजेक्ट के तहत इन्हें फिर से बसाया गया है। इसके लिए नामीबिया, दक्षिण अफ्रीका और बोत्सवाना से चीते लाए गए हैं। इन्हें मध्य प्रदेश के तीन अभ्यारणों में बसाया गया है। अब इस घटना के बाद वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने सीबीआई जांच की मांग की है।

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