जयपुर में अतिक्रमण पर सबसे बड़ी कार्रवाई, धारा 163 लागू इंटरनेट बंदी और 3 हजार पुलिसकर्मियों की तैनाती

The CSR Journal Magazine
राजस्थान में जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) ने जगतपुरा क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण और अतिक्रमण हटाने के लिए सोमवार को बड़े स्तर पर बुलडोजर कार्रवाई शुरू की। संभावित विरोध और कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए पूरे शहर में बीएनएसएस की धारा 163 लागू कर दी गई है। साथ ही सुरक्षा के मद्देनजर इंटरनेट सेवाएं भी अस्थायी रूप से बंद की गई हैं। कार्रवाई के दौरान 3,000 से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है।

धारा 163 लागू, पांच से अधिक लोगों के जुटने पर रोक

जेडीए की कार्रवाई को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए जयपुर पुलिस कमिश्नरेट ने पूरे शहर में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर दी है। इस आदेश के तहत किसी भी सार्वजनिक स्थान पर पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्रित होने पर प्रतिबंध रहेगा। बिना प्रशासन की पूर्व अनुमति के धरना, प्रदर्शन, रैली, मार्च और जनसभा आयोजित नहीं की जा सकेगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था 22 जून तक प्रभावी रहेगी। सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को भड़काने या अवैध रूप से भीड़ जुटाने की कोशिश करने वालों के खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

जगतपुरा में बुलडोजर कार्रवाई, पूरा इलाका बना सुरक्षा छावनी

सोमवार सुबह करीब छह बजे जेडीए की मशीनें और डंपर जगतपुरा की नंदपुरी रोड पर पहुंचे। इसके साथ ही इलाके में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था लागू कर दी गई। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए 3,000 से अधिक अतिरिक्त पुलिसकर्मी, महिला पुलिस बल, दंगा नियंत्रण वाहन और आरएसी की विशेष टुकड़ियां तैनात की गईं। वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौके पर मौजूद रहकर पूरे अभियान की निगरानी करते रहे। प्रशासन का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण और यातायात सुधार के लिए यह कार्रवाई आवश्यक है।

स्थानीय लोगों ने भी हटाए अतिक्रमण और धार्मिक ढांचे

कार्रवाई से पहले जिला प्रशासन और जेडीए अधिकारियों ने स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों और धार्मिक समितियों के साथ कई दौर की बैठकें की थीं। समझाइश के बाद कई धार्मिक स्थलों के प्रबंधकों ने स्वयं आगे आकर सड़क सीमा में आ रही संरचनाओं को हटाना शुरू कर दिया। मंदिर, मस्जिद, मजार, चबूतरे और सत्संग भवनों से जुड़े लोगों ने शहर के विकास में सहयोग का संदेश दिया। वहीं बड़ी संख्या में स्थानीय निवासियों ने भी अपने अवैध छज्जे, सीढ़ियां और रैंप स्वयं हटाए, जिससे प्रशासन की कार्रवाई अपेक्षाकृत आसान हो गई।

इंटरनेट बंदी पर फिर शुरू हुई बहस

जयपुर में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान इंटरनेट सेवाएं बंद किए जाने के बाद एक बार फिर नेटबंदी को लेकर चर्चा तेज हो गई है। राजस्थान पहले भी इंटरनेट बंदी के मामलों में देश के प्रमुख राज्यों में शामिल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इंटरनेट बंदी अफवाहों और भड़काऊ संदेशों को रोकने में मदद करती है, लेकिन इससे व्यापार, ऑनलाइन सेवाओं, शिक्षा और डिजिटल भुगतान पर भी असर पड़ता है। जयपुर में पिछले कुछ वर्षों में कानून-व्यवस्था और संवेदनशील परिस्थितियों के दौरान कई बार मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद की जा चुकी हैं।

कानून-व्यवस्था और परीक्षाओं के दौरान बार-बार हुई नेटबंदी

राजस्थान में इंटरनेट बंदी का इतिहास लंबा रहा है। वर्ष 2025 में चौमूं में धार्मिक विवाद, 2022 में उदयपुर के कन्हैयालाल हत्याकांड, 2020 के गुर्जर आरक्षण आंदोलन, 2019 के सीएए विरोध प्रदर्शन और रामगंज-गलता गेट तनाव जैसी घटनाओं के दौरान इंटरनेट सेवाएं बंद की गई थीं। इसके अलावा विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और नकल रोकने के लिए भी सरकार कई बार इंटरनेट बंद कर चुकी है। रीट 2021, पटवारी भर्ती परीक्षा, आरएएस परीक्षा और रीट मुख्य परीक्षा 2023 के दौरान बड़े स्तर पर डिजिटल प्रतिबंध लगाए गए थे। ऐसे में जयपुर की मौजूदा कार्रवाई ने इंटरनेट बंदी के उपयोग और उसके प्रभावों को लेकर एक नई बहस को जन्म दे दिया है।

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