पढ़ाई और जॉब के लिए रूस गए, युद्ध में झोंके गए: 13 भारतीय युवाओं की दर्दनाक मौत

The CSR Journal Magazine
हरियाणा के रेवाड़ी के एक युवा अंशु ने अपनी पढ़ाई के लिए रूस का रुख किया, पर वह वहां एक सैनिक बनाकर यूक्रेन युद्ध में झोंक दिया गया। उसकी मौत के बाद उसका शव घर आया, जिससे उसके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। यह केवल अंशु की कहानी नहीं है, बल्कि हरियाणा, पंजाब, और राजस्थान के कई परिवारों का यही हाल है। जवान बेटों को रूस भेजने के लिए कुछ परिजनों ने जमीन बेची तो कुछ ने कर्ज लिया। अब कई परिवारों का कोई समाचार नहीं है।

युवाओं के शव घर लौट रहे हैं, परिवारों में मातम छाया

डेढ़ साल में चार राज्यों के 13 युवाओं के शव घर पहुंच चुके हैं। यह हाथ से गए हुए बेटे उन परिवारों में लौट रहे हैं जिन्होंने उम्मीदें संजोई थीं। कुछ युवा लापता हैं और उनके परिवारों की चिंता बढ़ती जा रही है। कई युवा ऐसे हैं जिन्हें एजेंटों ने झांसा देकर रूस भेजा था। स्टडी, वर्क और टूरिस्ट वीजा का लालच देकर उन्हें सेना में शामिल कर लिया गया। रक्तरंजित प्राथमिकता से 10-15 दिन की ट्रेनिंग के बाद उन्हें युद्ध के मैदान में धकेल दिया गया।

रूस में फंसे युवा: सबका दुख एक जैसे

हरियाणा के युवा जैसे विकास, अनुज, और अंकित के परिवार इस दर्द में शामिल हैं। पंजाब के समरजीत और मनदीप की मांओं का भी यही हाल है। राजस्थान का अजय और जम्मू-कश्मीर का सचिन भी इस अमानवीय संघर्ष का शिकार बन चुके हैं। ये सभी युवा अपने परिवारों की उम्मीदों और सपनों को छोड़कर चले गए थे। अब कई के शव रूसी झंडे में लिपटे हुए घर पहुंच रहे हैं। इस त्रासदी के बीच कई युवा गायब हैं, जिनका कोई पता नहीं चल रहा।

परिवारों ने सुप्रीम कोर्ट में लगाई गुहार

इस पूरी स्थिति पर 4 राज्यों के 26 परिवारों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। 24 अप्रैल को इस पर सुनवाई होनी है। हरियाणा के रोहतक से श्रीभगवान और हिसार के विकास ने बताया कि उनके परिवारों से संपर्क किया गया है, जिनके बच्चे रूस-यूक्रेन युद्ध में फंसे हुए हैं। याचिका में मांग की गई है कि जबरन युद्ध में शामिल किए गए युवाओं की स्थिति को स्पष्ट किया जाए और मारे गए युवाओं के परिवारों को मुआवजा मिले। इसके अलावा, झांसा देने वाले एजेंटों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की जाए।

झूठे वादों का खेल: युवाओं को किया गया शिकार

इस दुखद कहानी के पीछे का सच यह है कि एजेंटों ने उन युवाओं को रूस भेजा, जो बेहतर भविष्य की तलाश में थे। उन पर जबरन सेना में शामिल होने का दबाव डाला गया। ये सब ऐसे युवाओं की जिंदगी के सपनों को चुराने जैसा है। अब जब यह त्रासदी सामने आई है, तब परिवार न्याय की तलाश में हैं। इस खौफनाक सच से कई परिवारों के सपने चुराए गए हैं, और उनके यथार्थ को ताक पर रख दिया गया है।

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