हिमाचल हाईकोर्ट ने शिमला की हवाई सेवाओं को लेकर केंद्र सरकार को नसीहत दी है कि भविष्य में एयर कनेक्टिविटी में कोई रुकावट नहीं होनी चाहिए। चीफ जस्टिस गुरमीत सिंह संधावालिया और जस्टिस बीसी नेगी की बैंच ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अगली सुनवाई तक केंद्र सरकार को हलफनामा पेश करना होगा। कोर्ट की सख्ती से यह संकेत मिलता है कि शिमला की हवाई यात्रा का महत्व अब और बढ़ गया है।
उड़ान योजना का भविष्य
कोर्ट ने यह भी पूछा कि शिमला के लिए संशोधित उड़ान योजना कब लागू होगी। केंद्र सरकार ने बताया कि शिमला एयरपोर्ट पहाड़ी क्षेत्र में होने के कारण इसकी सुविधाएं सीमित हैं। यहाँ बुनियादी ढांचे का विस्तार करना मुश्किल है। फिलहाल, केवल दो ATR-42 और एक हिंदुस्तान-228 विमान ही यहां उड़ान भर सकते हैं। इस बीच दिल्ली-शिमला रूट पर 11 मई 2026 से उड़ानें फिर से शुरू की गई हैं।
हवाई सेवाओं की बाधाएं
केंद्र की ओर से कहा गया है कि पहले उड़ानें बंद होने की वजहों में फंडिंग की अवधि का खत्म होना और उपयुक्त विमानों का अभाव शामिल था। नई उड़ान योजना जल्द ही लागू होने की संभावना है। यह जानकारी भी दी गई है कि चंडीगढ़ से शिमला के लिए ट्विन इंजन हेलीकॉप्टर सेवा का विचार चल रहा है।
वर्तमान स्थिति की समीक्षा
इस समय, पवन हंस द्वारा चलाई जा रही सिंगल इंजन हेलीकॉप्टर सेवा केवल 4 से 6 यात्रियों को समेट सकती है और यह सप्ताह में महज तीन दिन चलती है। कोर्ट ने इसे पर्याप्त नहीं माना और सुझाव दिया कि ट्विन इंजन हेलीकॉप्टर की सेवाएं कहीं अधिक प्रभावी होंगी, जिसमें ज्यादा यात्रियों और सामान के साथ यात्रा की जा सकेगी।
जुड़ाव के अन्य विकल्प
कोर्ट ने राज्य सरकार से यह भी पूछा कि क्या ऐसे हेलीकॉप्टर की लैंडिंग जुब्बड़हट्टी एयरपोर्ट के अलावा शिमला या संजौली के पास किसी अन्य स्थान पर संभव है। जुब्बड़हट्टी एयरपोर्ट शहर से लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित है, जिससे यात्रियों को कठिनाई होती है।
सेवाओं की बहाल होने की खबर
दिल्ली और शिमला के बीच हवाई सेवाएं पिछले सात महीने से बंद थीं, जो कि 11 मई को फिर से शुरू की गई हैं। इस रूट पर कई बार हवाओं के कारण सेवाएं बंद की जाती हैं, लेकिन हाईकोर्ट ने इसे चालू रखने के लिए सख्ती बरती है। यह निर्णय स्थानीय यात्रियों के लिए राहत और सुविधा लेकर आएगा।
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