बिहार से यूपी तक: इन राज्यों में सरकारी स्कूल नहीं जाना चाहते बच्चे, कम हो गए 86 लाख स्टूडेंट्स

The CSR Journal Magazine
देशभर के सरकारी स्कूलों में छात्रों के दाखिले की संख्या में भारी कमी आई है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या 12.75 करोड़ से घटकर 11.89 करोड़ हो गई है, जो लगभग 86 लाख छात्रों की कमी दर्शाता है। इस कमी का सीधा फायदा प्राइवेट स्कूलों को मिला है, जहां 88 लाख छात्रों का इजाफा हुआ है। सरकारी स्कूलों में छात्रों की कमी पर शिक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्राइवेट स्कूलों की बढ़ती लोकप्रियता

UDISE+ की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, प्राइवेट स्कूलों में छात्रों की संख्या 9 करोड़ से बढ़कर 9.89 करोड़ हो गई है। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि कैसे सरकारी स्कूलों से बच्चे प्राइवेट स्कूलों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। यह स्पष्ट है कि माता-पिता का विश्वास प्राइवेट स्कूलों की शिक्षा प्रणाली पर अधिक बढ़ गया है।

राज्यों में छात्रों की संख्या में गिरावट का विश्लेषण

बिहार में सरकारी स्कूलों में 2023-24 में 1.71 करोड़ छात्र थे, जो 2025-26 में घटकर 1.66 करोड़ हो गए हैं। इसी प्रकार उत्तर प्रदेश में भी 1.48 करोड़ छात्रों की संख्या अब 1.41 करोड़ रह गई है। मध्य प्रदेश में 81.28 लाख से घटकर 79.70 लाख हो गए हैं। शिक्षकों की कमी और अन्य मुद्दे इन आंकड़ों का मुख्य कारण बन रहे हैं।

बंगाल की कहानी: एकमात्र बढ़त

जबकि अधिकांश राज्यों में छात्रों की संख्या में गिरावट आई है, बंगाल में सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या में 4.61 लाख का इजाफा हुआ है। यहां 2023-24 में 1.49 करोड़ छात्र थे, जो 2025-26 में 1.54 करोड़ हो गए हैं। ये आंकड़े इस बात का संकेत हैं कि बंगाल में सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता कुछ बेहतर हुई है।

शिक्षकों की संख्या में वृद्धि, फिर भी समस्या बनी हुई है

कुल शिक्षकों की संख्या देश भर में 1.02 करोड़ के पार पहुँच गई है, जो पहली बार हुआ है। लेकिन सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की संख्या में कमी होने के बावजूद ये आंकड़े सुखद नहीं हैं। 2023-24 में सरकारी स्कूलों में 51,49771 शिक्षकों की संख्या 2025-26 में घटकर 51,34623 हो गई है। वह भी तब जब देश भर में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने की कोशिशें चल रही हैं।

प्राइवेट स्कूलों का बढ़ता कारोबार

प्राइवेट स्कूलों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। वर्ष 2023 के दौरान देशभर में प्राइवेट स्कूलों की संख्या 3.39 लाख थी, जो 2025-26 में 3.4 लाख के पार जा चुकी है। उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान में प्राइवेट स्कूलों की संख्या में इजाफा हुआ है, जबकि कुछ राज्यों में कमी आई है।

सरकारी स्कूलों से बच्चों का मोहभंग

सरकारी स्कूलों से छात्रों की संख्या में कमी की एक मुख्य वजह प्राइवेट स्कूलों के प्रति बढ़ते रुझान है। माता-पिता को लगता है कि प्राइवेट स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता, अनुशासन और अंग्रेजी माध्यम बेहतर होते हैं। सरकारी स्कूलों में शिक्षक की संख्या कम होने से पढ़ाई की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है। इस सब का परिणाम है कि बच्चे अब ज्यादा से ज्यादा प्राइवेट स्कूलों की ओर बढ़ रहे हैं।

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