गंगा एक्सप्रेसवे बनेगा देश का पहला ‘स्मार्ट डिजिटल हाईवे’: हादसा होते ही खुद बजेगा अलार्म, नीचे छिपा है अरबों का नेटवर्क

The CSR Journal Magazine
उत्तर प्रदेश में बन रहा गंगा एक्सप्रेसवे देश के सबसे बड़े और आधुनिक एक्सप्रेसवे में शामिल होने जा रहा है। करीब 594 किलोमीटर लंबा यह प्रोजेक्ट मेरठ से प्रयागराज तक फैला है और 29 अप्रैल को इसका उद्घाटन प्रस्तावित है। यह एक्सप्रेसवे सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि राज्य के आर्थिक और डिजिटल विकास का मजबूत आधार बनने जा रहा है।

डिजिटल हाईवे की अनोखी अवधारणा

गंगा एक्सप्रेसवे को ‘डिजिटल हाईवे’ के रूप में तैयार किया गया है। इसके साथ 2 मीटर चौड़ा यूटिलिटी कॉरिडोर बनाया गया है, जिसमें ऑप्टिकल फाइबर, बिजली लाइन और गैस पाइपलाइन बिछाई गई हैं। खास बात यह है कि भविष्य में किसी भी केबल या पाइपलाइन की मरम्मत के लिए सड़क को खोदने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह नेटवर्क आसपास के 500 से अधिक गांवों को हाई-स्पीड इंटरनेट और 5G कनेक्टिविटी देने में मदद करेगा।

हादसों पर नजर रखेंगी स्मार्ट ‘आंखें’

इस एक्सप्रेसवे पर अत्याधुनिक स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (STMS) लगाया गया है। हर 2-3 किलोमीटर पर हाई-रेजोल्यूशन कैमरे और सेंसर लगाए गए हैं, जो 24 घंटे निगरानी करेंगे। जैसे ही कहीं वाहन रुकता है या कोई दुर्घटना होती है, कंट्रोल रूम को तुरंत अलर्ट मिल जाएगा। इससे एंबुलेंस और राहत टीम कुछ ही मिनटों में मौके पर पहुंच सकेगी।

AI तकनीक से बढ़ेगी सुरक्षा

गंगा एक्सप्रेसवे पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भी इस्तेमाल किया गया है। अगर कोई वाहन गलत दिशा में चलता है या ज्यादा देर तक खड़ा रहता है, तो सिस्टम तुरंत अलार्म जारी करेगा। साथ ही, ओवरस्पीडिंग करने पर ऑटोमैटिक ई-चालान भी भेजा जाएगा। कंट्रोल रूम में बड़े वीडियो वॉल के जरिए पूरे एक्सप्रेसवे की रियल टाइम मॉनिटरिंग की जाएगी।

ग्रीन टेक्नोलॉजी से बना एक्सप्रेसवे

इस प्रोजेक्ट में पर्यावरण का भी खास ध्यान रखा गया है। सड़क निर्माण में 65 से 70 लाख टन फ्लाई ऐश (कोयले की राख) का इस्तेमाल किया गया, जिससे लाखों घन मीटर उपजाऊ मिट्टी बचाई गई। साथ ही, करीब 18 लाख पेड़ लगाए गए हैं, जिससे यह एक्सप्रेसवे पर्यावरण के अनुकूल भी बन गया है।

रिकॉर्ड और इंजीनियरिंग का कमाल

गंगा एक्सप्रेसवे पर 10.3 किलोमीटर लंबा कंक्रीट क्रैश बैरियर मात्र 24 घंटे में तैयार किया गया, जो एक विश्व रिकॉर्ड है। यह बैरियर तेज रफ्तार वाहनों को दुर्घटना के समय सुरक्षित रखने में मदद करेगा। आधुनिक मशीनों और हजारों मजदूरों की मेहनत से इस प्रोजेक्ट को रिकॉर्ड समय में पूरा किया जा रहा है।

आर्थिक और डिजिटल क्रांति की उम्मीद

गंगा एक्सप्रेसवे के साथ विकसित हो रहा डिजिटल और एनर्जी कॉरिडोर उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई देगा। गैस पाइपलाइन और डेटा नेटवर्क से उद्योगों और गांवों को सस्ती सुविधाएं मिलेंगी, जिससे रोजगार और निवेश के नए अवसर पैदा होंगे। यह एक्सप्रेसवे आने वाले समय में यूपी को डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल कर सकता है।
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