केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के हालिया इस्तीफे के बाद राजनीतिक विवाद और बढ़ गया है। इस बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें राष्ट्रीय वीर हिंदू सेना के एक नेता पर सिटिज़न्स फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) के विरोध प्रदर्शन का समर्थन करने वाले दो युवकों के साथ कथित मारपीट करने का आरोप है। वीडियो सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने घटना की कड़ी आलोचना की है।
अखिलेश यादव ने जताई नाराजगी
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर वीडियो साझा करते हुए राष्ट्रीय वीर हिंदू सेना के प्रतिनिधि श्याम पंडित की कार्रवाई की निंदा की। उन्होंने आरोप लगाया कि यह घटना भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उससे जुड़े संगठनों में बढ़ती असहिष्णुता और आक्रामकता को दर्शाती है।
अखिलेश यादव ने इसे लोकतांत्रिक विरोध की आवाज़ दबाने की कोशिश बताते हुए कहा कि इस तरह की घटनाएं चिंताजनक हैं।
वीडियो
वायरल वीडियो के अनुसार, श्याम पंडित सड़क पर दो युवकों से उनकी पहचान और छात्र आंदोलन को लेकर उनका पक्ष पूछते हैं। दोनों युवकों ने जंतर-मंतर से शुरू हुए छात्र विरोध प्रदर्शन के समर्थन की बात कही।
इसके बाद कथित तौर पर श्याम पंडित नाराज़ हो गए और युवकों के साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। वीडियो में उन्हें एक युवक का कॉलर पकड़कर थप्पड़ मारते हुए भी देखा जा सकता है। आरोप है कि उन्होंने प्रदर्शन का समर्थन करने को देशहित के खिलाफ बताया। हालांकि, वीडियो में दोनों युवक शांत दिखाई देते हैं और कोई जवाबी कार्रवाई नहीं करते।
तत्काल गिरफ्तारी की मांग
अखिलेश यादव, जिन्होंने राहुल गांधी के नेतृत्व में प्रधानमंत्री आवास के बाहर आयोजित धरने में भी हिस्सा लिया था, ने आरोपी नेता की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की। उन्होंने कहा कि असहमति जताने वालों के प्रति बढ़ती असहिष्णुता लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए गंभीर चुनौती है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार युवाओं से किए गए अपने वादों पर खरी नहीं उतरी है और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
छात्र आंदोलनों के बीच बढ़ी चिंता
यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब देश के कई हिस्सों में छात्र विभिन्न मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि शांतिपूर्ण विरोध करने वालों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
घटना ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, विरोध प्रदर्शन के अधिकार और सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि मामले में प्रशासन क्या कार्रवाई करता है।