भीषण गर्मी में अमृत है छाछ, दही और लस्सी परंपरा से लेकर डॉक्टरों की सलाह तक बढ़ी डिमांड

The CSR Journal Magazine
राजस्थान सहित देशभर में बढ़ती गर्मी के बीच छाछ, दही और लस्सी जैसे पारंपरिक पेय फिर से लोगों की पहली पसंद बन रहे हैं। ये न सिर्फ शरीर को ठंडक देते हैं, बल्कि पाचन सुधारकर लू से बचाने में भी मददगार साबित होते हैं।

गर्मी में क्यों जरूरी हैं छाछ, दही और लस्सी?

भीषण गर्मी में शरीर का तापमान तेजी से बढ़ता है और पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में छाछ, दही और लस्सी प्राकृतिक कूलिंग एजेंट का काम करते हैं। इनमें मौजूद प्रोबायोटिक्स (अच्छे बैक्टीरिया) पाचन तंत्र को मजबूत बनाते हैं और शरीर को अंदर से ठंडा रखते हैं।
छाछ हल्की होती है और जल्दी पच जाती है, जबकि दही ऊर्जा देने वाला होता है और लस्सी शरीर को तुरंत तरोताजा कर देती है। यही कारण है कि गर्मी में इनका सेवन बेहद फायदेमंद माना जाता है।

कब और कैसे लें छाछ? सही तरीका जानना जरूरी

विशेषज्ञों के अनुसार छाछ का सेवन दोपहर के समय करना सबसे ज्यादा लाभकारी होता है। यह उस समय पाचन को बेहतर बनाता है और शरीर को ठंडा रखता है। छाछ पीने का सही तरीका
इसमें थोड़ा सा काला नमक और भुना जीरा मिलाकर पीना चाहिए बहुत ज्यादा ठंडी (फ्रिज से निकली) छाछ से बचें| खाने के बाद छाछ पीना सबसे अच्छा माना जाता है|  सुबह खाली पेट दही का सेवन भी अच्छा रहता है, लेकिन रात में दही खाने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे सर्दी-जुकाम या पाचन समस्या हो सकती है।

लू और गर्मी से बचाव में कैसे मददगार हैं ये पेय?

राजस्थान जैसे गर्म राज्यों में लू (हीट स्ट्रोक) एक बड़ी समस्या है। छाछ और लस्सी शरीर में पानी और नमक की कमी को पूरा करते हैं, जिससे लू का खतरा कम होता है। छाछ शरीर को हाइड्रेट रखती है
दही इम्यून सिस्टम मजबूत करता है लस्सी शरीर को तुरंत ठंडक देती है इन पेयों का नियमित सेवन शरीर के तापमान को संतुलित रखता है और चक्कर, थकान जैसी समस्याओं से बचाता है।

परंपरा से आज तक राजस्थान में बुजुर्गों की पहली पसंद

राजस्थान के गांवों में छाछ और दही का उपयोग सदियों से होता आ रहा है। पहले के समय में बुजुर्ग लोग रोजाना छाछ पीते थे और बाजरे की रोटी के साथ इसका सेवन करते थे।
गांवों में आज भी लोग “छाछ-रोटी” को गर्मी का सबसे बेहतरीन भोजन मानते हैं। यह न सिर्फ सस्ता है बल्कि पौष्टिक भी है। बुजुर्गों का मानना है कि “छाछ पीने वाला इंसान गर्मी से कम बीमार पड़ता है”, और अब आधुनिक विज्ञान भी इस बात को सही ठहराता है।

बाजार में बढ़ी मांग, डॉक्टर भी दे रहे सलाह

आज के समय में छाछ, दही और लस्सी की मांग तेजी से बढ़ रही है। शहरों में पैकेज्ड छाछ और फ्लेवर वाली लस्सी आसानी से उपलब्ध है। डॉक्टर भी गर्मी के मौसम में इन पेयों को रोजाना डाइट में शामिल करने की सलाह देते हैं। उनका कहना है कि ये प्राकृतिक और सुरक्षित विकल्प हैं, जिनका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता। फिटनेस एक्सपर्ट भी दही और छाछ को “समर सुपरफूड” मानते हैं, क्योंकि ये शरीर को एनर्जी देने के साथ-साथ ठंडक भी प्रदान करते हैं। भीषण गर्मी से बचने के लिए महंगे कोल्ड ड्रिंक्स की बजाय छाछ, दही और लस्सी जैसे पारंपरिक पेय ज्यादा फायदेमंद हैं। राजस्थान की पुरानी परंपरा आज एक बार फिर लोगों के लिए जीवनरक्षक साबित हो रही है। अगर आप भी गर्मी से राहत चाहते हैं, तो अपनी रोजाना डाइट में इन प्राकृतिक पेयों को जरूर शामिल करें।

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