बंगाल और तमिलनाडु में चुनावी बहेरी, रिकॉर्ड 93% मतदान के साथ हिंसा की छिटपुट घटनाएं

The CSR Journal Magazine
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के पहले फेज में वोटिंग का आंकड़ा 92.72% तक पहुंच गया है। यह संख्या बंगाल की 294 में से 152 सीटों पर आई है। इस चरण में मतदान इतिहास में सर्वाधिक रहा है, लेकिन कुछ छिटपुट हिंसक घटनाएं भी देखने को मिलीं। दो भाजपा विधायकों पर हमला हुआ, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। इससे पहले बंगाल में 2011 में 84.72% मतदान दर्ज किया गया था, जो अब एक नया मील का पत्थर बन गया है।

तमिलनाडु में जबरदस्त मतदान

उसी दिन तमिलनाडु ने भी चुनावी इतिहास में एक नया रिकॉर्ड बनाया है। यहां सभी 234 सीटों पर 85.14% मतदान हुआ। इससे पहले, 2011 में तमिलनाडु ने 78.29% मतदान का रिकॉर्ड अपने नाम किया था। यह आंकड़ा भी इस चुनाव में ऐतिहासिक रूप से उच्च है। इससे साफ होता है कि दोनों राज्यों की जनता ने लोकतंत्र में भागीदारी के प्रति अपनी सक्रियता दिखायी है।

राजनीतिक बयानबाजी और चुनावी माहौल

ममता बनर्जी ने कहा कि बंगाल की जनता ने SIR के खिलाफ जबरदस्त वोटिंग की है। वहीं, गृह मंत्री अमित शाह ने TMC पार्टी के पतन का संकेत दिया है। ऐसे में, देखना होगा कि ये चुनावी परिणाम किस ओर मुड़ते हैं। पहली बार एक साथ हो रहे इन चुनावों के नतीजे 4 मई को आएंगे।

हिंसा की घटनाएं और उनकी जड़ों की जांच

बंगाल के मुर्शिदाबाद में एक पत्रकार की टीम ने देखा कि मतदान के दौरान केवल 50 सेकंड में हिंसा भड़क उठी। पत्रकार हुमायूं कबीर वहां पर स्थिति का जायजा ले रहे थे जब उनकी कार पर अचानक हमला किया गया। स्थानीय लोगों ने बताया कि TMC कार्यकर्ता गुंडागर्दी कर रहे हैं।

क्या इस हिंसा से कोई राजनीतिक फायदा होगा?

राजनीतिक विश्लेषक प्रभाकर मणि का कहना है कि इस तरह की छोटी-मोटी हिंसाओं का चुनाव पर कोई असर नहीं होगा। उनका मानना है कि पिछले चुनावों में इससे भी बड़ी घटनाएं हुई हैं। ऐसे में, राजनीतिक पार्टियों को इस विषय को लेकर चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।

भाजपा की स्थिति और अगले चरण की चुनौतियाँ

विश्लेषक सुमन भट्टाचार्य ने बताया कि आगामी फेज में भाजपा को काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। जहां-जहां तनाव बढ़ा, वहां भाजपा का अधिकतम विवाद देखा गया है। ऐसे में भाजपा का भविष्य अगले चरण में क्या होगा, यह देखने वाली बात है।

लोकतंत्र में लोगों की भागीदारी

इन चुनावों में दोनों राज्यों के लोगों ने अपने मताधिकार का उपयोग कर एक नई मिसाल कायम की है। अगर हिंसा की घटनाएं बढ़ती हैं तो उनकी जिम्मेदारी चुनावी ताकतों पर आती है। ठीक इसी तरह, बंगाल और तमिलनाडु ने एक नया रुख अपनाया है और सबसे अधिक मतदान का रिकॉर्ड बना दिया है।

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