मृत्यु के बाद भी धड़केगा आपका दिल: NOTTO ने देशवासियों से की अंगदान की अपील

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अंगदान–जीवन संजीवनी अभियान: एक संकल्प जो किसी को दे सकता है नया जीवन, NOTTO ने शुरू किया राष्ट्रीय जागरूकता अभियान

भारत में हर वर्ष लाखों मरीज किडनी, लिवर, हृदय, फेफड़े और अन्य महत्वपूर्ण अंगों के गंभीर रोगों से जूझते हैं। इनमें से हजारों ऐसे मरीज होते हैं जिनकी जान केवल अंग प्रत्यारोपण (ऑर्गन ट्रांसप्लांट) से ही बचाई जा सकती है। लेकिन अंगदाताओं की कमी के कारण बड़ी संख्या में मरीज समय पर अंग नहीं मिलने से अपनी जान गंवा देते हैं। इसी चुनौती से निपटने और देश में अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (NOTTO) द्वारा “अंगदान–जीवन संजीवनी अभियान” चलाया जा रहा है।

अंगदान का लें संकल्प

इस राष्ट्रीय अभियान के माध्यम से नागरिकों से अपील की जा रही है कि वे अंगदान का संकल्प लें और NOTTO पोर्टल पर स्वयं को पंजीकृत कर भविष्य में किसी जरूरतमंद व्यक्ति को नया जीवन देने की पहल करें। सरकार का मानना है कि यदि अधिक से अधिक लोग अंगदान के लिए आगे आएं, तो हजारों गंभीर मरीजों को समय पर जीवनरक्षक अंग उपलब्ध कराए जा सकते हैं।

क्या है अंगदान–जीवन संजीवनी अभियान?

“अंगदान–जीवन संजीवनी अभियान” एक राष्ट्रव्यापी जन-जागरूकता अभियान है, जिसका उद्देश्य समाज में अंगदान को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करना और लोगों को स्वैच्छिक अंगदान के लिए प्रेरित करना है। अभियान के तहत नागरिकों को बताया जा रहा है कि मृत्यु के बाद उनके अंग कई लोगों का जीवन बचा सकते हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि यह केवल एक चिकित्सा कार्यक्रम नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं से जुड़ा सामाजिक आंदोलन है, जिसमें प्रत्येक नागरिक की भागीदारी महत्वपूर्ण है।

क्या है NOTTO?

नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (NOTTO) भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करने वाली राष्ट्रीय संस्था है। इसकी स्थापना देश में अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण प्रणाली को अधिक पारदर्शी, वैज्ञानिक और व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से की गई थी। NOTTO की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल हैं-
  • देशभर में अंग प्रत्यारोपण प्रणाली का समन्वय।
  • अंगदान और प्रत्यारोपण से संबंधित राष्ट्रीय रजिस्ट्री का संचालन।
  • अंगों के निष्पक्ष और पारदर्शी आवंटन की व्यवस्था।
  • अस्पतालों और राज्य स्तरीय संस्थाओं के बीच समन्वय।
  • अंगदान के प्रति जन-जागरूकता फैलाना।
  • चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों का प्रशिक्षण।

क्यों जरूरी है अंगदान?

भारत में प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में मरीजों को किडनी, लिवर, हृदय, फेफड़े, अग्न्याशय और अन्य अंगों के प्रत्यारोपण की आवश्यकता होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, जरूरत की तुलना में उपलब्ध अंगों की संख्या बहुत कम है। परिणामस्वरूप हजारों मरीज प्रतीक्षा सूची में रहते हैं और समय पर अंग न मिलने से अनेक लोगों की मृत्यु हो जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि प्रत्येक व्यक्ति मृत्यु के बाद अंगदान का संकल्प ले, तो इस समस्या का काफी हद तक समाधान संभव है।

कौन-कौन से अंग दान किए जा सकते हैं?

मृत्यु के बाद निम्नलिखित अंगों का प्रत्यारोपण किया जा सकता है-
हृदय, दोनों किडनी, लिवर, फेफड़े, अग्न्याशय, छोटी आंत।
इसी प्रकार कई ऊतक (Tissues) भी दान किए जा सकते हैं-
कॉर्निया (नेत्र), त्वचा, हड्डियां, हृदय के वाल्व, टेंडन, रक्त वाहिकाएं।
एक मृत अंगदाता कई लोगों का जीवन बचा सकता है तथा अनेक अन्य लोगों की जीवन गुणवत्ता में सुधार ला सकता है।

कौन कर सकता है अंगदान?

अधिकांश स्वस्थ वयस्क व्यक्ति अंगदान का संकल्प ले सकते हैं। किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद अंतिम निर्णय चिकित्सकीय जांच और कानूनी प्रक्रियाओं के अनुसार लिया जाता है। कई मामलों में जीवित व्यक्ति भी अपनी एक किडनी या लिवर का एक भाग दान कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए सख्त चिकित्सकीय और कानूनी मानदंड लागू होते हैं।

कैसे लें अंगदान की शपथ?

सरकार ने पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाया है। इच्छुक नागरिक NOTTO पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं। पंजीकरण की सामान्य प्रक्रिया-
  • NOTTO पोर्टल पर जाएं।
  • Organ Donation Pledge विकल्प चुनें।
  • अपना नाम, आयु, पता और आवश्यक विवरण भरें।
  • पहचान संबंधी जानकारी दर्ज करें।
  • अंगदान संबंधी घोषणा स्वीकार करें।
  • पंजीकरण पूरा होने के बाद डिजिटल प्रमाण प्राप्त करें।
यह पंजीकरण व्यक्ति की इच्छा को दर्ज करता है। हालांकि वास्तविक अंगदान की प्रक्रिया मृत्यु के समय लागू कानूनी नियमों और अस्पताल की प्रक्रिया के अनुसार पूरी की जाती है।

परिवार को जानकारी देना क्यों जरूरी?

विशेषज्ञों का कहना है कि केवल ऑनलाइन पंजीकरण पर्याप्त नहीं है। यदि किसी व्यक्ति ने अंगदान का संकल्प लिया है, तो उसे अपने परिवार और निकट संबंधियों को भी इसकी जानकारी अवश्य देनी चाहिए। मृत्यु के बाद परिवार की सहमति और सहयोग प्रक्रिया को सरल बनाता है।

अंगदान से जुड़ी आम भ्रांतियां

अभियान के दौरान सरकार लोगों में फैली कई गलतफहमियों को भी दूर करने का प्रयास कर रही है।
भ्रांति: अंगदान करने से शरीर विकृत हो जाता है।
सच्चाई: अंग निकालने की प्रक्रिया पूरी तरह वैज्ञानिक और सम्मानजनक होती है।
भ्रांति: डॉक्टर मरीज को बचाने की पूरी कोशिश नहीं करेंगे।
सच्चाई: डॉक्टर का पहला दायित्व मरीज का जीवन बचाना होता है। अंगदान की प्रक्रिया तभी शुरू होती है जब चिकित्सकीय मानकों के अनुसार मृत्यु की पुष्टि हो जाती है।
भ्रांति: केवल युवा ही अंगदान कर सकते हैं।
सच्चाई: कई मामलों में आयु से अधिक महत्वपूर्ण अंगों की चिकित्सकीय स्थिति होती है।
भ्रांति: धार्मिक मान्यताएं अंगदान की अनुमति नहीं देतीं।
सच्चाई: अधिकांश प्रमुख धर्म मानव जीवन बचाने को सर्वोच्च मानते हैं और अंगदान को परोपकार का कार्य मानते हैं।

भारत में कानूनी व्यवस्था

भारत में अंगदान और प्रत्यारोपण की प्रक्रिया मानव अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण अधिनियम (Transplantation of Human Organs and Tissues Act – THOTA) के तहत संचालित होती है। इस कानून का उद्देश्य अंगदान को पारदर्शी बनाना, अवैध अंग व्यापार पर रोक लगाना तथा जरूरतमंद मरीजों तक निष्पक्ष तरीके से अंग पहुंचाना है।

राज्यों की भूमिका

देश के विभिन्न राज्यों में राज्य स्तरीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन कार्य करते हैं, जो NOTTO के साथ मिलकर अस्पतालों के बीच समन्वय स्थापित करते हैं। इससे उपलब्ध अंगों का वैज्ञानिक तरीके से आवंटन किया जाता है।

समाज की भागीदारी क्यों जरूरी?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सरकारी प्रयासों से अंगदान की कमी दूर नहीं हो सकती। इसके लिए सामाजिक संगठनों, अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों, धार्मिक नेताओं, स्वयंसेवी संस्थाओं और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। यदि प्रत्येक परिवार अंगदान के महत्व को समझे, तो हजारों लोगों को नया जीवन मिल सकता है।

मानव सेवा का संकल्प

“अंगदान–जीवन संजीवनी अभियान” केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का राष्ट्रीय अभियान है। एक व्यक्ति का लिया गया छोटा-सा संकल्प किसी दूसरे परिवार के लिए नई उम्मीद बन सकता है। भारत में अंग प्रत्यारोपण की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए यह अभियान समय की मांग भी है और सामाजिक जिम्मेदारी भी। यदि अधिक से अधिक नागरिक NOTTO पोर्टल पर अंगदान की शपथ लें और अपने परिवार को भी इसके बारे में जागरूक करें, तो भविष्य में हजारों गंभीर मरीजों को नया जीवन मिल सकता है। अंगदान वास्तव में मृत्यु के बाद भी जीवन देने का सबसे बड़ा मानवीय उपहार है।
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