750 बीघा जमीन की लालच में रची गई महंत देवानंद महाराज की हत्या, पुलिस ने किया सनसनीखेज खुलासा

The CSR Journal Magazine
राजस्थान में कोटा के चर्चित महंत देवानंद महाराज हत्याकांड में पुलिस जांच ने बड़ा खुलासा करते हुए हत्या के पीछे की पूरी साजिश का पर्दाफाश कर दिया है। जांच में सामने आया कि चंद्रेसल मठ की करीब 750 बीघा बेशकीमती जमीन पर कब्जा करने की मंशा ही इस हत्या की मुख्य वजह थी। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों, मोबाइल लोकेशन, सीसीटीवी फुटेज और मानवीय सूचना के आधार पर इस ब्लाइंड मर्डर केस को सुलझाने में सफलता हासिल की है।

750 बीघा जमीन पर कब्जे की थी साजिश

पुलिस के अनुसार, महंत देवानंद महाराज की हत्या के मुख्य साजिशकर्ता वकील संतोष कुमार राय की नजर चंद्रेसल मठ की करीब 750 बीघा जमीन पर थी। जांच में पता चला कि संतोष राय स्वयं को ट्रस्ट का कार्यवाहक अध्यक्ष बताकर मठ की संपत्ति पर नियंत्रण स्थापित करना चाहता था। वह मठ परिसर में अपनी गोशाला स्थापित करने की योजना बना रहा था और इसके लिए लोगों से चंदा भी एकत्रित कर रहा था। ट्रस्ट के गठन और संचालन को लेकर उसका महंत से लंबे समय से विवाद चल रहा था। इसी विवाद के चलते उसने महंत को रास्ते से हटाने की साजिश रची। पूछताछ के दौरान संतोष राय ने अपना जुर्म भी कबूल कर लिया है।

छह-सात साल से मठ से जुड़ा था आरोपी, अस्पताल में भर्ती होने का किया नाटक

पुलिस जांच में सामने आया कि संतोष कुमार राय मूल रूप से उत्तर प्रदेश का निवासी है और जयपुर तथा कोटा दोनों जगह रहता था। उसकी पत्नी एक विश्वविद्यालय में सहायक कुलसचिव के पद पर कार्यरत है। आरोपी पिछले छह-सात वर्षों से चंद्रेसल मठ में नियमित रूप से आता-जाता था और ट्रस्ट के सदस्यों के संपर्क में था। वारदात से पहले उसने पुलिस और अन्य लोगों को भ्रमित करने के लिए पैर की सर्जरी का बहाना बनाकर जयपुर के एक अस्पताल में भर्ती होने का नाटक किया। हालांकि मोबाइल लोकेशन और कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जांच में एक जून को उसकी मौजूदगी चंद्रेसल मठ के आसपास पाई गई। पुलिस का कहना है कि उसी दिन उसने आरोपियों से मठ की रेकी करवाई थी।

लाल बनियान बनी सबसे बड़ा सुराग

इस हत्याकांड की जांच में एक लाल रंग की बनियान अहम सुराग साबित हुई। वारदात की रात पूजा कर लौट रहे राजू पंडित ने पुलिस को बताया कि उसने दो मोटरसाइकिलों पर सवार कुछ युवकों को तेज रफ्तार में जाते देखा था, जिनमें से एक युवक ने लाल रंग की बनियान पहन रखी थी। इसके बाद पुलिस ने विभिन्न क्षेत्रों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले। फुटेज में संदिग्ध युवक इसी हुलिए में दिखाई दिए। बाइक सवार नॉर्दर्न बाइपास, गुड़ला, गामछ, पाटन चौराहा, कुन्हाड़ी, बैराज और किशोरपुरा होते हुए उद्योग नगर क्षेत्र की ओर जाते नजर आए। जांच में यह भी सामने आया कि हत्या की सुपारी की रकम ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के माध्यम से भेजी गई थी।

महाराष्ट्र तक पीछा कर दबोचे गए आरोपी

वारदात के बाद आरोपी कोटा से जयपुर, फिर दिल्ली और उसके बाद महाराष्ट्र की ओर फरार हो गए। मुख्य आरोपी आदित्य वर्मा और उसके साथी ट्रेन के जरिए महाराष्ट्र पहुंचने की कोशिश कर रहे थे। राजस्थान पुलिस ने जीआरपी, आरपीएफ और महाराष्ट्र पुलिस के सहयोग से संयुक्त अभियान चलाकर उन्हें हिरासत में ले लिया। कोटा सिटी एसपी तेजस्वनी गौतम ने बताया कि यह पूरी तरह ब्लाइंड मर्डर था, जहां घटनास्थल के आसपास कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं था और शुरुआती सुराग बेहद सीमित थे। साइबर सेल, डीएसटी, एसआईटी और थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने लगातार फील्ड वर्क और तकनीकी जांच के जरिए मामले का खुलासा किया। वहीं एडिशनल एसपी सिटी सुभाष मिश्रा ने कहा कि अपराधी कितना भी शातिर क्यों न हो, कानून के हाथों से बच नहीं सकता। पुलिस की लगातार मेहनत और वैज्ञानिक जांच के चलते इस चुनौतीपूर्ण हत्याकांड की गुत्थी सुलझाई जा सकी।

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