उत्तर प्रदेश में 69000 शिक्षक भर्ती का विवाद अब सिर्फ कोर्ट और फाइलों तक सीमित नहीं रह गया है। सोमवार को लखनऊ की सड़कों पर जो तस्वीर सामने आई, उसने योगी सरकार के दावों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए। सरकारी नौकरी की उम्मीद लगाए बैठे हजारों युवा इस कदर टूट चुके हैं कि उन्हें अपनी आवाज सुनाने के लिए सड़क पर कीड़ों की तरह रेंगना पड़ा। भीषण गर्मी, तपती सड़क और सिर पर चिलचिलाती धूप… इन सबके बीच शिक्षक भर्ती अभ्यर्थी जमीन पर लेटकर रेंगते हुए बेसिक शिक्षा मंत्री Sandeep Singh के आवास तक पहुंचे। यह सिर्फ प्रदर्शन नहीं था, बल्कि उन युवाओं की बेबसी थी जो पिछले 6 सालों से नौकरी का इंतजार करते-करते थक चुके हैं।
‘रामराज्य’ के दावों के बीच बेरोजगारों की दर्दनाक तस्वीर
Yogi Adityanath सरकार लगातार रोजगार, सुशासन और युवाओं के भविष्य को लेकर बड़े-बड़े दावे करती रही है। लेकिन लखनऊ की सड़कों पर रेंगते इन अभ्यर्थियों की तस्वीरें उन दावों की हकीकत बयान कर रही हैं। लोग सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर एक परीक्षा पास करने के बाद भी युवाओं को इंसाफ के लिए इस तरह सड़क पर क्यों उतरना पड़ रहा है? अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार की लापरवाही और कमजोर पैरवी के कारण मामला वर्षों से कोर्ट में अटका हुआ है। युवाओं का आरोप है कि अगर सरकार चाहती तो यह भर्ती कब की पूरी हो चुकी होती।
6 साल से अधर में लटका भविष्य
69000 शिक्षक भर्ती का मामला 2018 से शुरू हुआ था। भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद आरक्षण नियमों को लेकर विवाद खड़ा हो गया। आरोप लगे कि ओबीसी और एससी वर्ग के हजारों अभ्यर्थियों के साथ अन्याय हुआ है। तब से लेकर आज तक मामला कोर्ट में फंसा हुआ है। कई अभ्यर्थी उम्र सीमा पार कर चुके हैं, कई आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं और कई मानसिक तनाव में हैं। प्रदर्शन कर रहे युवाओं ने कहा कि सरकार सिर्फ भाषण दे रही है, लेकिन जमीन पर कोई समाधान नहीं दिख रहा।
सड़क पर रेंगते युवाओं की तस्वीर ने खड़े किए सवाल
लखनऊ में प्रदर्शन के दौरान कई अभ्यर्थी जमीन पर रेंगते हुए आगे बढ़े। उनके हाथों में पोस्टर थे और चेहरे पर गुस्सा और निराशा साफ दिखाई दे रही थी। यह दृश्य सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह प्रदर्शन सिर्फ शिक्षक भर्ती का मुद्दा नहीं, बल्कि यूपी में बढ़ती बेरोजगारी और युवाओं की नाराजगी का बड़ा संकेत भी है। विपक्ष भी अब इस मुद्दे को लेकर योगी सरकार पर हमलावर हो गया है।
सुप्रीम कोर्ट सुनवाई पर टिकी उम्मीद
19 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई होनी है। अभ्यर्थियों को उम्मीद है कि अब शायद उन्हें न्याय मिलेगा। लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या युवाओं को अपनी मांग मनवाने के लिए हर बार सड़क पर इसी तरह अपमानित होना पड़ेगा? योगी सरकार भले ही प्रदेश में विकास और रोजगार के दावे कर रही हो, लेकिन जमीन पर रेंगते शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों की तस्वीरें फिलहाल उन दावों पर भारी पड़ती नजर आ रही हैं।
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