पश्चिम बंगाल में ASDD कैटेगरी के छूटे मतदाताओं को नाम जुड़वाने का सुनहरा मौका

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पश्चिम बंगाल: ASDD कैटेगरी के छूटे मतदाताओं को नाम जुड़वाने का एक और मौका, BLO घर-घर जाकर भरवाएंगे फॉर्म-6

पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील फैसला लिया है। राज्य में हाल ही में संपन्न हुए ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (Special Intensive Revision – SIR) कार्यक्रम के दौरान जिन नागरिकों के नाम किन्हीं कारणों से मतदाता सूची से बाहर हो गए थे या जिन्हें ASDD (Absent, Shifted, Dead, Deleted) यानी ‘अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या हटाए गए’ मतदाताओं की श्रेणी में डाल दिया गया था, उन्हें आयोग ने अपना नाम दोबारा जुड़वाने का एक और बड़ा और आसान मौका दिया है। चुनाव आयोग ने न सिर्फ ASDD मतदाताओं की पूरी सूची को ऑनलाइन सार्वजनिक कर दिया है, बल्कि पारदर्शी प्रक्रिया के तहत छूटे हुए योग्य नागरिकों से नए सिरे से फॉर्म-6 (Form 6) भरने की अपील की है। इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य का कोई भी वैध नागरिक अपने लोकतांत्रिक अधिकार यानी मतदान से वंचित न रह सके।

क्या है ASDD कैटेगरी और क्यों खड़ा हुआ था विवाद?

दरअसल, निर्वाचन नियमावली को पूरी तरह शुद्ध और त्रुटिहीन बनाने के लिए चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में एक विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान चलाया था। इस अभियान के तहत जमीनी स्तर पर मतदाताओं के सत्यापन का काम किया गया। इस प्रक्रिया के दौरान जो लोग अपने पंजीकृत पते पर नहीं मिले, जो दूसरी जगहों पर शिफ्ट हो चुके थे, जिनकी मृत्यु हो चुकी थी या जिनके दस्तावेजों और प्रविष्टियों में कोई दोहराव (डुपिलकेशन) या विसंगति पाई गई, उन्हें एक विशेष सूची में वर्गीकृत कर दिया गया। तकनीकी भाषा में इसे ही ASDD (Absent, Shifted, Dead or Deleted) कैटेगरी कहा जाता है। पश्चिम बंगाल में इस गहन पुनरीक्षण के बाद बड़े पैमाने पर नाम हटने को लेकर राज्य की राजनीति में भारी हलचल देखी गई थी। विभिन्न राजनीतिक दलों और नागरिक संगठनों ने आशंका जताई थी कि कई वास्तविक और योग्य मतदाताओं के नाम भी तकनीकी चूकों या सत्यापन के समय घर पर न मिलने के कारण इस सूची में डाल दिए गए हैं। राजनीतिक तनातनी और आम जनता में उपजी इसी चिंता और असमंजस को दूर करने के लिए मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय ने अब एक बहुत ही सुलभ और व्यावहारिक सुधारात्मक रास्ता निकाला है।

अब घर बैठे ऑनलाइन देखें अपना नाम

राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, पारदर्शिता को शीर्ष प्राथमिकता देते हुए ASDD श्रेणी के मतदाताओं की पूरी सूची को मुख्य निर्वाचन अधिकारी, पश्चिम बंगाल (CEO West Bengal) की आधिकारिक वेबसाइट पर लाइव कर दिया गया है। कोई भी नागरिक या परिवार का सदस्य इस पोर्टल पर जाकर आसानी से यह जांच सकता है कि क्या उसका या उसके किसी परिजन का नाम इस विशेष सूची में तो शामिल नहीं है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर यह डेटा उपलब्ध होने से उन लोगों को सबसे ज्यादा फायदा होगा, जो काम या शिक्षा के सिलसिले में अपने मूल निवास स्थान से थोड़े समय के लिए बाहर हैं।

आपकी मदद के लिए आपके द्वार आएंगे BLO

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि नाम जुड़वाने की इस सुधारात्मक प्रक्रिया को आम लोगों के लिए बेहद सरल और तनावमुक्त बनाया गया है। इसके लिए बूथ स्तर के अधिकारियों (BLOs) को सबसे अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है। आयोग के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार:
• घर-घर जाकर सत्यापन: बीएलओ को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे हर सप्ताह कम से कम 20 से 25 परिवारों के घरों का व्यक्तिगत रूप से दौरा करेंगे।
• दस्तावेजों का मिलान: बीएलओ गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान से ठीक पहले की मतदाता सूची और उसके बाद तैयार की गई संशोधित सूची का आपस में बारीकी से मिलान करेंगे। इस मिलान से तुरंत पता चल जाएगा कि किस योग्य व्यक्ति का नाम बीच में छूट गया था।
• फॉर्म-6 भरने में ऑन-स्पॉट सहायता: यदि कोई योग्य नागरिक अपने घर पर मौजूद पाया जाता है और उसका नाम सूची से गायब है, तो सरकारी प्रतिनिधि मौके पर ही उसके दस्तावेजों की जांच करेंगे और उन्हें फॉर्म-6 (नया नाम शामिल करने का आवेदन) भरने में पूरी व्यावहारिक मदद देंगे।

विशेष कैंपों का होगा आयोजन: हाशिए के लोगों पर खास फोकस

शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के आम रिहायशी इलाकों के अलावा, समाज के सबसे पिछड़े, बेघर और वंचित तबके को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए चुनाव आयोग विशेष प्रबंध कर रहा है। आयोग के आदेशानुसार, राज्य के विभिन्न मोहल्लों, मजदूर बस्तियों, रैन बसेरों और बेघर लोगों के अस्थायी आवास क्षेत्रों में विशेष नामांकन शिविर (Special Camps) लगाए जाएंगे। इसके साथ ही, युवा और पहली बार मतदाता बनने जा रहे (First-time Voters) नागरिकों को आकर्षित करने के लिए सभी प्रमुख शिक्षण संस्थानों, कॉलेजों और स्थानीय स्तर पर व्यापक जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। इस काम में आयोग के विशेष मतदाता शिक्षा और चुनावी भागीदारी कार्यक्रम, जिसे स्वीप (SVEEP) कहा जाता है, की भी पूरी मदद ली जा रही है ताकि शत-प्रतिशत पंजीकरण का लक्ष्य हासिल किया जा सके।

कड़ी निगरानी और राजनीतिक दलों की भागीदारी

प्रक्रिया में किसी भी प्रकार के पक्षपात, गड़बड़ी या गफलत की गुंजाइश को खत्म करने के लिए इस पूरे अभियान में मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों (BLAs – Booth Level Agents) को भी सक्रिय रूप से शामिल किया जा रहा है।
बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर तैयार की गई शुरुआती सूचियों को इन राजनीतिक दलों के एजेंट्स के साथ साझा किया जाएगा, ताकि यदि कोई योग्य मतदाता फिर भी छूट गया हो, तो पार्टियां उसका मामला आयोग के संज्ञान में ला सकें। इसके बाद, सभी सत्यापन रिपोर्टों और भरे हुए फॉर्म-6 को अंतिम निर्णय के लिए निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (EROs) के पास भेजा जाएगा, जो स्थापित कानूनी प्रावधानों के तहत इन पर अपनी अंतिम मुहर लगाएंगे। वरिष्ठ चुनाव अधिकारी इस पूरी कवायद की दैनिक आधार पर खुद मॉनिटरिंग कर रहे हैं।

मतदाताओं के लिए त्वरित गाइड: कैसे जुड़वाएं अपना नाम?

यदि आपको अंदेशा है कि आपका नाम मतदाता सूची में नहीं है, तो आप इन दो बेहद आसान तरीकों से इसे ठीक करवा सकते हैं:
1. ऑनलाइन माध्यम (डिजिटल तरीका): आप स्वयं निर्वाचन आयोग के आधिकारिक राष्ट्रीय मतदाता पोर्टल या CEO पश्चिम बंगाल की वेबसाइट पर जा सकते हैं। वहां ‘ASDD List’ लिंक पर क्लिक करके अपना नाम खोजें। नाम न होने या कट जाने की स्थिति में पोर्टल पर ही डिजिटल रूप से फॉर्म-6 भरकर आवश्यक पहचान और पते के दस्तावेज अपलोड कर दें।
2. ऑफलाइन माध्यम (पारंपरिक तरीका): आप अपने क्षेत्र के निर्धारित मतदान केंद्र पर जाकर सीधे अपने बीएलओ (BLO) से संपर्क कर सकते हैं。 बीएलओ आपको मुफ्त में फॉर्म-6 उपलब्ध कराएंगे और उसे भरने की सही विधि भी बताएंगे। आवश्यक दस्तावेजों (जैसे आधार कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र या निवास का प्रमाण) की प्रति के साथ फॉर्म भरकर आप इसे सीधे बीएलओ को जमा कर सकते हैं।

लाखों मतदाताओं के लिए मौका

चुनाव आयोग का यह कदम पश्चिम बंगाल के लाखों नागरिकों के लिए एक बड़ा सुरक्षा कवच बनकर आया है। लोकतंत्र की असली ताकत उसकी समावेशी चुनावी प्रक्रिया में है, और आयोग की इस ‘आसान प्रक्रिया और द्वार पर बीएलओ’ वाली नीति ने जनता के भीतर यह भरोसा जगाया है कि उनका एक-एक वोट कीमती है और प्रशासन इसे सुरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

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