डिजिटल वोटर रजिस्ट्रेशन हुआ सरल: ECI का बड़ा फैसला, फॉर्म-6 से हटी माता-पिता के वोटिंग रिकॉर्ड की बाध्यता

The CSR Journal Magazine

अब चुटकियों में बनेगा वोटर कार्ड! Form 6 से हटा सबसे बड़ा झंझट, सरल हुई वोटर बनने की प्रक्रिया

भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने देश के करोड़ों नए और युवा मतदाताओं को एक बड़ी प्रशासनिक राहत देते हुए ऑनलाइन फॉर्म-6 (Form 6) के साथ अनिवार्य किए गए विवादित ‘अतिरिक्त घोषणा-पत्र’ को हटाने का आधिकारिक फैसला किया है। चुनाव आयोग के इस नए कदम से अब देश के 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में वोटर ID कार्ड (मतदाता पहचान पत्र) बनवाने की डिजिटल प्रक्रिया बेहद सरल, पारदर्शी और तेज हो गई है। इन राज्यों के नए आवेदकों को अब मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए किसी भी तरह की अतिरिक्त या पैतृक जानकारी देने की आवश्यकता नहीं होगी। आयोग ने 30 सितंबर 2026 को देर रात अपने आधिकारिक ECINET पोर्टल में बड़ा बदलाव करते हुए उन सभी फील्ड्स को डिलीट कर दिया है, जिनके तहत नए आवेदकों से उनके माता-पिता या दादा-दादी के पुराने वोटिंग इतिहास की जानकारी मांगी जा रही थी।

विवाद की पृष्ठभूमि: क्या थी वह अतिरिक्त जानकारी?

दरअसल, जुलाई 2026 में चुनाव आयोग ने मतदाता सूची की शुद्धता बढ़ाने और पारिवारिक सत्यापन के उद्देश्य से ऑनलाइन फॉर्म-6 के साथ एक स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से जुड़ा अतिरिक्त घोषणा-पत्र (Annexure D) जोड़ दिया था। इस नियम के तहत, यदि कोई 18 वर्ष का युवा पहली बार अपना नाम मतदाता सूची में जुड़वाने के लिए ऑनलाइन आवेदन करता था, तो उसे अनिवार्य रूप से यह घोषित करना होता था कि उसके माता-पिता या दादा-दादी का नाम पिछली एसआईआर (SIR) के दौरान मतदाता सूची में शामिल था या नहीं। इतना ही नहीं, आवेदन को आगे बढ़ाने के लिए आवेदकों से उनके पूर्वजों का पुराना एपिक (EPIC) नंबर, भाग संख्या (पार्ट नंबर) और मतदान केंद्र (पोलिंग बूथ) का विवरण भी मांगा जा रहा था। इसके बिना ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन सबमिट करना और आगे बढ़ना तकनीकी रूप से लगभग असंभव हो गया था।

आम जनता और युवाओं की मुश्किलें हुईं खत्म

चुनाव आयोग के इस पिछले प्रशासनिक बदलाव से देश भर के नए मतदाताओं, विशेषकर ग्रामीण और पहली पीढ़ी के शिक्षित युवाओं में भारी असमंजस की स्थिति बन गई थी। कई युवाओं के माता-पिता अशिक्षित थे या उनके पास वर्षों पुराने वोटर आईडी और रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं थे। कुछ मामलों में, जिनके माता-पिता अब इस दुनिया में नहीं थे, उनके लिए पूर्वजों का दशकों पुराना वोटिंग इतिहास खोजना एक नामुमकिन काम बन गया था। इस जटिलता के कारण लाखों योग्य नागरिक अपनी उम्र 18 वर्ष पूरी होने के बावजूद वोटर लिस्ट में नाम दर्ज कराने से कतरा रहे थे। कई नागरिक संगठनों और विपक्षी दलों ने भी इस नियम का कड़ा विरोध करते हुए इसे आम नागरिकों को उनके बुनियादी लोकतांत्रिक अधिकार से दूर करने वाली प्रक्रिया बताया था। मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा था, जिसके बाद आयोग पर चौतरफा दबाव बन गया था।

चुनाव आयोग के भीतर उभरे थे गंभीर मतभेद

इस अतिरिक्त घोषणा पत्र को पोर्टल पर लागू करने के तरीके पर स्वयं चुनाव आयोग के भीतर भी आंतरिक मतभेद उजागर हुए थे। तीन सदस्यीय पूर्ण चुनाव आयोग के दो चुनाव आयुक्तों, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने इस बदलाव पर लिखित रूप में अपनी गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई थीं। उनका स्पष्ट कानूनी तर्क था कि निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960 के तहत तय किया गया फॉर्म-6 एक संवैधानिक और वैधानिक प्रारूप है। केंद्रीय कानून और न्याय मंत्रालय के आधिकारिक गजट नोटिफिकेशन (राजपत्र अधिसूचना) के बिना इस फॉर्म के मूल स्वरूप या प्रक्रिया में कोई भी अतिरिक्त शर्त जोड़ना पूरी तरह से “अनधिकृत और गैर-कानूनी” है। इस आंतरिक असहमतियों और देशव्यापी आपत्तियों के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता में हुई पूर्ण आयोग की बैठक में इस अतिरिक्त व्यवस्था को वापस लेने का सर्वसम्मत निर्णय लिया गया।

नया नियम: किन 20 राज्यों में और कैसे मिलेगी राहत?

चुनाव आयोग द्वारा जारी अधिसूचना और स्पष्टीकरण के अनुसार, अब देश के निर्वाचन क्षेत्रों को दो श्रेणियों में स्पष्ट रूप से बांट दिया गया है:
• गैर-एसआईआर (Non-SIR) राज्य: जिन 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (जैसे बिहार, पश्चिम बंगाल आदि) में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का काम पूरा हो चुका है, वहां से इस अतिरिक्त डिक्लेरेशन कॉलम को पूरी तरह हटा दिया गया है। इन राज्यों के नए मतदाताओं को अब केवल 1960 के नियमों के तहत तय मूल, वैधानिक फॉर्म-6 ही भरना होगा। उन्हें किसी भी पूर्वज का विवरण देने की कोई आवश्यकता नहीं है।
• सक्रिय एसआईआर (Active SIR) राज्य: जिन चुनिंदा राज्यों या निर्वाचन क्षेत्रों में अभी भी एसआईआर (SIR) की प्रक्रिया चल रही है, वहां यह घोषणा-पत्र केवल उसी विशिष्ट अवधि तक सीमित रहेगा। जैसे ही वहां भी पुनरीक्षण कार्य संपन्न होगा, इसे स्वतः ही हटा दिया जाएगा।

नई व्यवस्था से अब चुटकियों में ऑनलाइन वोटर आईडी कैसे बनाएं?

नया नियम लागू होने के बाद डिजिटल रूप से वोटर आईडी कार्ड बनवाना बेहद सरल हो गया है। कोई भी नागरिक घर बैठे इन आसान चरणों का पालन करके आवेदन कर सकता है:
1. पोर्टल पर जाएं: सबसे पहले भारत निर्वाचन आयोग के आधिकारिक Voters Service Portal पर लॉगिन करें या वोटर हेल्पलाइन ऐप (Voter Helpline App) डाउनलोड करें।
2. अकाउंट बनाएं: अपने एक्टिव मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी के जरिए साइन-अप करें और अपना नया पासवर्ड जेनरेट करें।
3. फॉर्म चयन: प्राप्त ओटीपी (OTP) दर्ज कर लॉगिन करें और डैशबोर्ड पर नए मतदाता पंजीकरण के लिए उपलब्ध ‘Form 6’ विकल्प पर क्लिक करें।
4. मूल विवरण भरें: फॉर्म में अपनी बुनियादी व्यक्तिगत जानकारी (जैसे नाम, लिंग, जन्मतिथि) और अपने वर्तमान निवास का पता भरें। ध्यान रहे, अब आपको माता-पिता या दादा-दादी के पुराने वोटिंग रिकॉर्ड का सीरियल नंबर या भाग संख्या देने की आवश्यकता नहीं है।
5. दस्तावेज अपलोड करें: आयु प्रमाण और निवास प्रमाण के रूप में अपने स्व-अभिप्रमाणित दस्तावेजों (जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस या पासपोर्ट) की डिजिटल कॉपी और एक पासपोर्ट साइज रंगीन फोटो अपलोड करें।
6. समीक्षा और सबमिट: भरे गए विवरणों की अंतिम रूप से जांच (Preview) करें और ‘Submit’ बटन पर क्लिक कर दें। इसके बाद स्क्रीन पर एक रेफरेंस नंबर (Reference Number) जेनरेट होगा, जिससे आप अपने आवेदन की स्थिति को ट्रैक कर सकते हैं।

घर बैठे स्पीड पोस्ट से आएगा नया PVC कार्ड

चुनाव आयोग ने नए तकनीकी सुधारों के तहत भारतीय डाक विभाग (India Post) के साथ सीधा डिजिटल समन्वय स्थापित किया है। जैसे ही आपका आवेदन स्थानीय बूथ स्तर के अधिकारी (BLO) और निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) द्वारा ऑनलाइन सत्यापित होकर मतदाता सूची में शामिल होगा, आपके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एक पुष्टि का एसएमएस (SMS) प्राप्त होगा।
नागरिक तुरंत अपना डिजिटल वोटर कार्ड (e-EPIC) आधिकारिक वेबसाइट से डाउनलोड कर सकेंगे। इसके साथ ही, चुनाव आयोग द्वारा सुरक्षात्मक फीचर्स (जैसे क्यूआर कोड और डबल फोटो) से लैस नया PVC वोटर आईडी कार्ड सीधे आपके घर के पते पर स्पीड पोस्ट के जरिए मुफ्त डिलीवर कर दिया जाएगा। आयोग के इस फैसले का देश भर के युवा संगठनों और तकनीकी रूप से जागरूक नागरिकों ने स्वागत किया है, क्योंकि इससे मतदाता पंजीकरण की राह में मौजूद सबसे बड़ा तकनीकी और कागजी रोड़ा हमेशा के लिए हट गया है।

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