महाराष्ट्र की जिस सीट पर 51 फीसदी मुसलमान वहां SIR में 49% तक वोट कटे, दलित-आदिवासी के लिए आरक्षित सीटों का क्या हाल?

The CSR Journal Magazine

संख्याओं का खेल: 51% मुसलमान, 49% वोट कटे

महाराष्ट्र की 38 विधानसभा सीटों पर हाल ही में हुए स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के दौरान एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। यहां पर 51 प्रतिशत मुस्लिम आबादी वाली एक सीट से 49 प्रतिशत वोटर्स के नाम काट दिए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इन सीटों पर कुल 37.51 लाख वोटरों में से 29.77 प्रतिशत वोटर्स को “अनकलेक्टेबल” के रूप में चिह्नित किया गया है। यह आंकड़ा महाराष्ट्र के औसत 21.14 प्रतिशत से कहीं ज्यादा है।

बिगड़ते हालात: वोट कटने की दर

विशेष रूप से मुंबई और उसके आसपास के क्षेत्रों में यह दर सबसे अधिक देखी गई है। भिवंडी ईस्ट में 49.10 प्रतिशत गिनती में नाम काटे गए, उसके बाद भिवंडी वेस्ट में यह दर 44.72 प्रतिशत तक पहुँच गई। मुंब्रा-कलवा में 42.91 प्रतिशत और मानखुर्द शिवाजी नगर में 42.31 प्रतिशत वोटर लिस्ट से बाहर कर दिए गए हैं। चांदीवली सीट, जहां मुस्लिम जनसंख्या 27.6 फीसदी है, वहां भी 41.44 प्रतिशत वोट अनकलेक्टेबल रहे।

जानिए ‘अनकलेक्टेबल’ का मतलब

‘अनकलेक्टेबल’ का मतलब है कि ये ऐसे वोटर्स हैं जिनका पता नहीं चल पाया, या जो अनुपस्थित थे। 38 निर्वाचन क्षेत्रों में स्थायी रूप से कहीं और चले गए वोटर्स की संख्या 42.05 प्रतिशत थी। शेष 35.59 प्रतिशत वे थे जिनका पता नहीं चल सका। मृत वोटर्स की संख्या 12.76 प्रतिशत और डुप्लिकेट रजिस्ट्रेशन वाले वोटर्स की संख्या 8.33 प्रतिशत है।

आरक्षित सीटों पर स्थिति: दयनीय

जब आरक्षित सीटों का आंकलन किया गया तो एक अलग तस्वीर सामने आई। अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित 29 सीटों की अनकलेक्टेबल दर 19.61 प्रतिशत रही, जो मुस्लिम-बहुल सीटों की दर से कम है। वहीं अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित 25 सीटों पर यह दर और भी कम, यानी 13.21 प्रतिशत रही।

कौन सी सीटें सबसे प्रभावित?

भिवंडी ईस्ट, जहां मुस्लिम आबादी करीब 51 प्रतिशत है, वहां सबसे अधिक अनकलेक्टेबल दर 49.10 प्रतिशत दर्ज हुई। वहीं, अन्य सीटों जैसे मालेगांव सेंट्रल, जहां मुस्लिम आबादी 78.4 प्रतिशत है, वहां यह दर 23.46 प्रतिशत रही। इस असामान्यता का मुख्य कारण अभी साफ नहीं हो पाया है।

सामान्यीकरण की दर: क्या है अगला कदम?

राज्य में वोट कटने की दर को ध्यान में रखते हुए, यह स्पष्ट है कि मिथकों को तोड़ने की जरूरत है। क्या यह प्रॉसेस वोटिंग सिस्टम को अधिक प्रभावी बनाएगा? क्या सरकार इस मुद्दे पर ध्यान देगी? इन सवालों के जवाब आगामी चुनावों में देखने को मिलेंगे।

Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!

App Store –  https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540 

Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos