जौबा वाड़ी चॉल के रहवासियों के लिए बड़ी खबर, 15 साल बाद फिर शुरू हुआ पुनर्विकास; 550 वर्गफुट के फ्लैट का प्रस्ताव
मुंबई के दक्षिण मुंबई इलाके में चॉल और पुरानी वाड़ियों के पुनर्विकास को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। ठाकुरद्वार की ऐतिहासिक जौबा वाड़ी (Zaoba Wadi) का करीब 15 साल से अटका पुनर्विकास अब आगे बढ़ने की स्थिति में है। करीब 2.5 एकड़ में फैली इस वाड़ी की जगह अब 325 मीटर ऊंची आवासीय इमारत बनाने की योजना है। परियोजना में पुराने रहवासियों के पुनर्वास के लिए करीब 13 लाख वर्गफुट क्षेत्र रखा गया है, जबकि बिक्री के लिए करीब 6 लाख वर्गफुट क्षेत्र विकसित किया जाएगा।
Zaoba Wadi ठाकुरद्वार के पुराने गिरगांव इलाके की उन बस्तियों में शामिल है, जहां दशकों से चॉलों, छोटे मकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के बीच बड़ी संख्या में परिवार रहते आए हैं। प्रस्तावित पुनर्विकास के बाद यहां रहने वाले लोगों को मौजूदा छोटे मकानों की तुलना में कहीं अधिक क्षेत्रफल वाले नए फ्लैट मिलने की योजना है।
करीब 625 किरायेदारों को मिलेगा नया घर
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक जौबा वाड़ी में करीब 625 किरायेदार पारंपरिक चॉलों और कम ऊंचाई वाली इमारतों में रहते हैं। इनमें कुछ इकाइयों का इस्तेमाल व्यावसायिक गतिविधियों के लिए भी होता है। मौजूदा मकानों का क्षेत्रफल सामान्य तौर पर करीब 150 से 200 वर्गफुट बताया गया है। पुनर्विकास योजना के तहत पात्र रहवासियों को करीब 550 वर्गफुट के फ्लैट देने का प्रस्ताव है। यानी कई परिवारों के लिए नया घर मौजूदा आवास की तुलना में काफी बड़ा होगा। हालांकि, इसे सीधे तौर पर हर परिवार को मिलने वाला एक समान अंतिम क्षेत्रफल मानना उचित नहीं होगा। परियोजना में पात्रता, मौजूदा कब्जे और पुनर्वास समझौते के अनुसार अलग-अलग प्रावधान लागू हो सकते हैं। उपलब्ध दस्तावेजों में 550 वर्गफुट के पुनर्वास फ्लैटों से जुड़े वैकल्पिक आवास समझौते भी दर्ज हैं।
15 साल से क्यों अटका था प्रोजेक्ट?
जौबा वाड़ी का पुनर्विकास लंबे समय से प्रस्तावित था, लेकिन परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी। वर्ष 2011 में श्रीपति समूह ने परियोजना के अधिकार हासिल किए थे, लेकिन वित्तीय संसाधनों समेत कई कारणों से निर्माण योजना वर्षों तक जमीन पर नहीं उतर सकी। इसके बाद 2024 में परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए मन इंफ्राकंस्ट्रक्शन लिमिटेड यानी MICL के साथ बातचीत शुरू हुई और 2025 में उसकी भागीदारी औपचारिक हुई। अब श्रीपति समूह, MICL और गोदरेज प्रॉपर्टीज मिलकर परियोजना को आगे बढ़ा रहे हैं। परियोजना के लिए शुरुआती मंजूरियां हासिल किए जाने और बचे हुए विकास अधिकारों को प्राप्त करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ी है। सरकारी पर्यावरणीय दस्तावेजों में भी जौबा वाड़ी की प्रस्तावित परियोजना का उल्लेख मिलता है। अगस्त 2024 की पर्यावरण मूल्यांकन समिति की बैठक के दस्तावेज में परियोजना को भुलेश्वर डिवीजन के जौबा वाड़ी, ठाकुरद्वार स्थित भूखंडों से जोड़ा गया है। दस्तावेज में करीब 9,791 वर्गमीटर भूखंड क्षेत्र का उल्लेख है।
325 मीटर ऊंची इमारत में होंगे 4 और 5 BHK
पुनर्विकास परियोजना का सबसे बड़ा आकर्षण प्रस्तावित 325 मीटर ऊंचा लग्जरी आवासीय टावर होगा। इसमें चार और पांच शयनकक्ष वाले बड़े लग्जरी फ्लैट विकसित किए जाने की योजना है। परियोजना के बिक्री योग्य हिस्से का कारपेट क्षेत्र करीब 6 लाख वर्गफुट बताया गया है। इसके मुकाबले पुनर्वास के लिए करीब 13 लाख वर्गफुट कारपेट क्षेत्र प्रस्तावित है। इस तरह परियोजना का एक बड़ा हिस्सा पुराने रहवासियों के पुनर्वास के लिए इस्तेमाल होगा, जबकि शेष हिस्से में नए खरीदारों के लिए प्रीमियम आवास विकसित किए जाएंगे। दक्षिण मुंबई में जमीन की कमी और ऊंची अचल संपत्ति कीमतों के बीच इतनी ऊंची इमारत के निर्माण से इस परियोजना को क्षेत्र के बड़े पुनर्विकास कार्यों में गिना जा रहा है।
चार साल में पुनर्वास का लक्ष्य
परियोजना से जुड़ी जानकारी के अनुसार पुनर्वास वाले हिस्से को करीब चार साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि बिक्री योग्य आवासीय हिस्से को पूरा होने में करीब पांच साल लग सकते हैं। इसका मतलब यह है कि निर्माण शुरू होने के बाद पुराने रहवासियों के लिए नए घर तैयार करना परियोजना की प्राथमिकता में रहेगा। फिलहाल इसे निर्माण पूरा होने की तारीख नहीं माना जाना चाहिए। वास्तविक समयसीमा मंजूरियों, निर्माण की गति, रहवासियों के स्थानांतरण और अन्य नियामकीय प्रक्रियाओं पर निर्भर करेगी।
पुरानी चॉल से आधुनिक आवास तक का सफर
जौबा वाड़ी केवल एक आवासीय परियोजना नहीं है, बल्कि दक्षिण मुंबई के पुराने शहरी इतिहास का हिस्सा भी है। ठाकुरद्वार और गिरगांव क्षेत्र में समय के साथ पुरानी वाड़ियां, चॉलें, छोटे कारोबार और आवासीय इमारतें विकसित हुईं। जौबा वाड़ी के प्रवेश क्षेत्र में स्थित जौबा राम मंदिर भी इस इलाके की ऐतिहासिक पहचान का हिस्सा है। उपलब्ध विवरण के अनुसार मंदिर का निर्माण 1882 के आसपास हुआ था और इसे विरासत संरचना के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। समय के साथ पुराने परिवारों के दूसरे इलाकों में चले जाने और दक्षिण मुंबई में जमीन की बढ़ती कीमतों के बीच इन पारंपरिक वाड़ियों का स्वरूप बदलता गया। अब पुनर्विकास की नई योजनाओं के माध्यम से इन पुराने इलाकों में चॉलों और कम ऊंचाई वाली इमारतों की जगह ऊंची आवासीय इमारतें लेने लगी हैं।
रहवासियों के लिए क्या बदलेगा?
यदि प्रस्तावित योजना निर्धारित तरीके से पूरी होती है, तो जौबा वाड़ी के पुराने रहवासियों को सबसे बड़ा फायदा बेहतर और अपेक्षाकृत बड़े आवास के रूप में मिलने की उम्मीद है। 150-200 वर्गफुट के मौजूदा आवासों की तुलना में करीब 550 वर्गफुट के प्रस्तावित पुनर्वास फ्लैट आकार में काफी बड़े होंगे। इसके साथ ही नई इमारत में आधुनिक भवन सुविधाएं और बेहतर आधारभूत ढांचा उपलब्ध होने की संभावना है। लेकिन पुनर्विकास का मतलब केवल नया मकान मिलना नहीं होता। जब तक प्रत्येक पात्र रहवासी के अधिकार, अस्थायी आवास, किराया, स्थानांतरण, अंतिम कारपेट क्षेत्र और कब्जा देने की समयसीमा स्पष्ट रूप से समझौते में तय न हो जाए, तब तक परियोजना के सभी लाभों को अंतिम मानना जल्दबाजी होगी।
दक्षिण मुंबई में बदल रही पुरानी वाड़ियों की तस्वीर
जौबा वाड़ी का पुनर्विकास दक्षिण मुंबई में चल रहे व्यापक शहरी बदलाव का हिस्सा है। गिरगांव, ठाकुरद्वार, भुलेश्वर और आसपास के इलाकों में कई पुरानी वाड़ियां और चॉलें अब पुनर्विकास के दौर से गुजर रही हैं। अमर वाड़ी और पिंपल वाड़ी जैसे इलाकों में पुनर्विकास पहले हो चुका है, जबकि मंगल वाड़ी, खोताची वाड़ी, चंदन वाड़ी, ताड़देव की तालमकी वाड़ी और चिकाल वाड़ी जैसे इलाकों में भी पुनर्विकास का दबाव रहा है। जौबा वाड़ी की परियोजना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां पुराने रहवासियों के पुनर्वास के साथ दक्षिण मुंबई के अत्यंत महंगे इलाके में एक बड़ी ऊंची आवासीय इमारत विकसित करने की योजना है। करीब 15 साल तक अटके रहने के बाद परियोजना का फिर से आगे बढ़ना चॉल के रहवासियों के लिए लंबे इंतजार के बाद एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।
परियोजना के क्रियान्वयन पर नजर
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए तीन डेवलपर साथ आए हैं और पुनर्वास तथा बिक्री वाले हिस्से के निर्माण की अलग-अलग समयसीमा बताई गई है। इसलिए जौबा वाड़ी के रहवासियों के लिए अब नजर इस बात पर रहेगी कि निर्माण कार्य कब शुरू होता है, अस्थायी पुनर्वास की व्यवस्था कैसे होती है और प्रस्तावित 550 वर्गफुट के नए घर उन्हें कब तक मिलते हैं।
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