दमन से सुलग उठा गुलाम कश्मीर: LoC पर मंडराया महासंकट, भारत आने को बेताब 25 हजार नागरिकों का जनसैलाब

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दमन से सुलग उठा गुलाम कश्मीर: नियंत्रण रेखा (LoC) पर मंडराया महासंकट, भारत आने को बेताब 25 हजार से अधिक नागरिकों का जनसैलाब

पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoK) में पिछले 115 दिनों से जारी व्यापक जन आंदोलन अब एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व मोड़ पर पहुंच चुका है। पाकिस्तानी सेना की बर्बरता, संसाधनों की व्यवस्थित लूट, और अमानवीय आर्थिक घेरेबंदी के खिलाफ स्थानीय जनता का गुस्सा ज्वालामुखी की तरह फूट पड़ा है। नियंत्रण रेखा (LoC) से महज 7 किलोमीटर दूर मंढोल गांव में अवामी एक्शन कमेटी के नेतृत्व में 25,000 से अधिक लोगों का ऐतिहासिक महाधरना चल रहा है। आंदोलनकारियों ने अब सीधे तौर पर पाकिस्तानी हुकूमत को चुनौती देते हुए ऐलान किया है कि यदि उनकी बुनियादी मांगें पूरी नहीं हुईं और अत्याचार बंद नहीं हुआ, तो वे LoC पर लगी कंटीली बाड़ और फेंसिंग को तोड़कर भारत की ओर कूच करेंगे।

राशन की पूर्ण नाकेबंदी: ‘भूख बनाम बंदूक’ की नीति

स्थानीय नेताओं और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से छनकर आ रही खबरें दिल दहला देने वाली हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर की जोड़ी ने इस जनविद्रोह को कुचलने के लिए समूचे PoK को एक खुली जेल में तब्दील कर दिया है। पिछले तीन महीनों से पूरे क्षेत्र की खाद्य और चिकित्सा आपूर्ति काट दी गई है। अवामी एक्शन कमेटी के प्रमुख नेताओं का आरोप है कि पाकिस्तानी सेना ने क्षेत्र की पूर्ण आर्थिक नाकेबंदी कर दी है, जिससे बच्चों के लिए दूध, जीवन रक्षक दवाइयां और आटा-दाल जैसी बुनियादी चीजें पूरी तरह खत्म हो चुकी हैं। सेना का सोचना है कि वे भुखमरी के जरिए लोगों को घुटने टेकने पर मजबूर कर देंगे, लेकिन इसका उल्टा असर हुआ है। हताश जनता अब मरने-मारने पर उतारू है। उनका स्पष्ट कहना है कि ‘पाकिस्तान की भूख से मरने से बेहतर है कि हम LoC पर सेना की गोलियां खाएं’।

फेडरल पुलिस और रेंजर्स की क्रूरता, मानवाधिकारों का कत्लेआम

मुजफ्फरराबाद, रावलाकोट, कोटली और मंढोल जैसे प्रमुख शहरों में पाकिस्तान ने भारी मात्रा में फेडरल पैरामिलिट्री फोर्स और पाकिस्तान रेंजर्स की तैनाती की है। शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे निहत्थे नागरिकों, महिलाओं और बुजुर्गों पर सेना सीधे लाइव कारतूसों, पैलेट गन और आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल कर रही है। पिछले कुछ हफ्तों में कई प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों लोग गंभीर रूप से घायल हैं। इसके साथ ही, विरोध को दबाने के लिए इंटरनेट और दूरसंचार सेवाओं को पूरी तरह ठप कर दिया गया है ताकि PoK के भीतर हो रहे जुल्म की आवाज दुनिया तक न पहुंच सके। रात के अंधेरे में प्रदर्शनकारी नेताओं और युवाओं को जबरन अगवा किया जा रहा है। रावलाकोट के स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि वे किसी स्वतंत्र राज्य में नहीं, बल्कि एक हिंसक सरकार के दमनकारी और औपनिवेशिक कब्जे के तहत गुलामी का जीवन जी रहे हैं।

‘हमें भारत का रास्ता दो’: LoC तोड़ने की अंतिम चेतावनी

मंढोल में जुटे विशाल जनसैलाब के बीच पाकिस्तान विरोधी और भारत के समर्थन में जमकर नारे लग रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर को सीधी चुनौती दी है। आंदोलनकारी नेताओं ने भारत सरकार और जम्मू-कश्मीर के नागरिकों से मानवीय आधार पर तुरंत हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई है। प्रदर्शनकारी नेताओं ने ऐलान किया है:
• सप्लाई लाइनें खोली जाएं: अगर पाकिस्तान हमें भोजन और दवा नहीं दे सकता, तो वह पुंछ-मेंढर और अन्य पारंपरिक रास्तों को तुरंत खोले ताकि भारत से मानवीय सहायता पहुंच सके।
• तारबंदी हटाने की मांग: LoC पर लगी फेंसिंग को हटाया जाए। PoK की जनता दशकों पुरानी इस कृत्रिम विभाजन रेखा को मानने से इनकार कर रही है।
• सामूहिक पलायन की तैयारी: यदि सेना की गोलीबारी और दमन चक्र बंद नहीं हुआ, तो हजारों नागरिकों का यह जनसैलाब सीमा पार कर भारतीय क्षेत्र में शरण लेने के लिए आगे बढ़ेगा।

वैश्विक मंच पर गूंजी PoK की आवाज

पाकिस्तान का यह क्रूर चेहरा अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बेनकाब हो गया है। न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के सत्र के दौरान मुख्यालय के बाहर कश्मीरी प्रवासियों ने पाकिस्तान के खिलाफ विशाल प्रदर्शन किया और PoK में हो रहे मानवाधिकारों के घोर उल्लंघन का मुद्दा उठाया। भारत सरकार ने भी इस स्थिति पर बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि PoK में जारी हिंसा और मानवाधिकारों का हनन पाकिस्तान के दमनकारी रवैये और दशकों से जारी संसाधनों की लूट का स्वाभाविक परिणाम है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से PoK के निर्दोष नागरिकों की सुरक्षा के लिए आवाज उठाने की अपील की है।

सुरक्षा एजेंसियों की बढ़ी चिंता, बॉर्डर पर हाई अलर्ट

LoC के पार 25 हजार से अधिक लोगों के जुटने और बाड़ तोड़ने की धमकियों के बाद भारतीय सुरक्षा एजेंसियां और सेना अत्यधिक सतर्क हो गई हैं। नियंत्रण रेखा पर तैनात भारतीय जवानों को मुस्तैद कर दिया गया है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पाकिस्तान की भूखी और प्रताड़ित जनता बड़े पैमाने पर LoC पार करने की कोशिश करती है, तो यह भारत के लिए एक बड़ा मानवीय और रणनीतिक संकट बन सकता है। पाकिस्तानी सेना इस जनसैलाब की आड़ में भारत में आतंकवादियों की घुसपैठ कराने की नापाक साजिश भी रच सकती है। भारत पूरी स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है और सीमा पर किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।

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