पाकिस्तान के लिए नासूर बनी सिंधु जल संधि, थाली से गायब हो सकती है रोटी, भारत ने कर दिया खेल!

The CSR Journal Magazine

सिंधु जल समझौता: भारत ने चला दांव, पाकिस्तान के लिए बढ़ा महासंकट, दाने-दाने की आफत!

पाकिस्तान में सिंधु जल संधि के निलंबन के बाद अब स्थिति गंभीर होती जा रही है। पानी की कमी के चलते देश में रबी की फसल का क्षेत्रफल लगभग 25 प्रतिशत तक घटने का अनुमान है। इसकी सबसे बड़ी मार गेहूं की पैदावार पर पड़ने वाली है। अगर यह सच हुआ तो पहले से ही आटा संकट का सामना कर रहे पाकिस्तान की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। महंगाई के कारण आम लोगों के लिए दो वक्त की रोटी जुटाना भी मुश्किल हो सकता है। यह संकट तब शुरू हुआ जब भारत ने अप्रैल 2024 में आतंकी हमले के कारण सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया था। भारत की यह अपील थी कि खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते हैं।

रबी फसल की जल आपूर्ति में भारी कमी

रिपोर्ट के अनुसार, रबी फसल के लिए जरूरी पानी की उपलब्धता केवल 21-22 मिलियन एकड़-फीट (एमएएफ) रहने की उम्मीद है, जो इस मौसम की जरूरतों से काफी कम है। यह संकट तब आया है जब पाकिस्तान के जलाशयों में पानी का स्तर 9.5 मिलियन एकड़-फीट से नीचे चला गया है। रबी का मौसम 1 अक्टूबर से शुरू होता है, जिसमें गेहूं सबसे महत्वपूर्ण फसल है। 1991 के जल आवंटन समझौते के अनुसार, रबी फसलों के लिए 37-38 मिलियन फुट पानी की आवश्यकता होती है। लेकिन खरीफ ऋतु से सीमित जल संचयन के कारण, अगले छह महीनों में पानी की उपलब्धता कम हो सकती है।

गेहूं उत्पादन में कमी और आटा संकट

पाकिस्तान पहले से ही गेहूं उत्पादन में कमी का सामना कर रहा है। पिछले सीजन की तुलना में गेहूं का अनुमानित उत्पादन 29.7 मिलियन टन था, लेकिन उत्पादन केवल 27.5 मिलियन टन ही हुआ। जहां पाकिस्तान में गेहूं की खपत लगभग 32 मिलियन टन है, ऐसे में कमी को पूरा करने के लिए देश ने 1 मिलियन टन गेहूं का आयात किया। लेकिन यह समाधान ऊंट के मुंह में जीरा साबित हुआ है और पाकिस्तान आज भी आटा की कमी से जूझ रहा है। पंजाब ने अन्य राज्यों में गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिससे पूरे देश में गेहूं का संकट बढ़ गया है।

जल संकट का भयावह असर

सिंधु जल संधि के स्थगन के बाद से पाकिस्तान जल संकट का सामना कर रहा है। इस वर्ष मानसून की बारिश भी कम हुई है, जिसके कारण बांधों में पानी की पूरी क्षमता नहीं भरी। पुराने बांधों में गाद भर जाने की वजह से जल संग्रहण क्षमता और घट गई है। पाकिस्तान के प्रमुख बांधों में से एक, मंगला बांध की जल भंडारण क्षमता लगभग 5.12 मिलियन फीट प्रति समुद्री फुट (MAF) है, जबकि इसकी अधिकतम क्षमता 7.277 मिलियन फीट प्रति समुद्री फुट (MAF) है।

तरबेला बांध की स्थिति चिंताजनक

अंतर्राष्ट्रीय जल संसाधन एजेंसी (IRSA) ने तरबेला बांध में सक्रिय भंडारण क्षमता में कमी की चिंता व्यक्त की है। आंकड़ों के अनुसार, तरबेला बांध की सक्रिय भंडारण क्षमता मई 2022 में 5.827 मिलियन फीट से घटकर मार्च 2026 में 5.580 मिलियन फीट रह गई है। इस गंभीर स्थिति से पाकिस्तान के जल संकट और बढ़ सकता है, जिससे देश की खाद्य सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!

App Store –  https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540 

Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos