नाटो समिट में ट्रंप का सनसनीखेज दावा: ईरान की किल लिस्ट में मैं नंबर वन टारगेट

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ट्रंप का सनसनीखेज दावा: ईरान की ‘किल लिस्ट’ में मैं नंबर वन टारगेट!

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तुर्की में चल रहे नाटो (NATO) समिट के दौरान यह सनसनीखेज दावा किया है कि वह ईरान की ‘किल लिस्ट’ (हिट लिस्ट) में नंबर वन टारगेट हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने कहा, “मैं ईरान की किल लिस्ट में नंबर एक पर हूँ, लेकिन मुझे इसकी परवाह नहीं है क्योंकि मैं अपना काम कर रहा हूँ।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि राष्ट्रपति का जीवन बेहद खतरनाक होता है।

ट्रंप का खौफनाक बयान

नाटो सम्मेलन के दौरान, पूर्व अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक चौंकाने वाला दावा किया है। उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि ईरान के द्वारा उनकी हत्या की योजना बनाई जा रही है, और वे इस मामले में नंबर वन टारगेट हैं। ट्रंप ने कहा, “शायद मैं भी मारा जाऊं, क्योंकि मैं उनका नंबर वन टारगेट हूं।” उन्होंने यह भी कहा कि ईरान पिछले 47 सालों से आतंक और हिंसा फैला रहा है।

ईरान के खिलाफ ट्रंप का कठोर रुख

ट्रंप ने ईरान के बारे में एक असहिष्णु रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि वे कचरा हैं और उनके कार्यों का सिर्फ नुकसान हुआ है। ट्रंप का मानना है कि वे अपना काम कर रहे हैं जो कि उनके देश और पूरी दुनिया के लिए सही है। इस बयान ने काफी चर्चा को जन्म दिया है और इसके पीछे संभावित राजनीतिक दृष्टिकोण के बारे में लोग अपनी-अपनी राय रखने लगे हैं।

ट्रंप के दावे की मुख्य बातें-खतरे को नकारा

जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या वह ईरान के खतरों के कारण पुराने विमान से यात्रा कर रहे हैं, तो उन्होंने इसे खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि नया एयर फ़ोर्स वन विमान ब्रिटिश सैन्य बेस के दौरे पर भेजा गया है ताकि वहां के सैनिक उसे देख सकें। ट्रंप ने साफ़ तौर पर चेतावनी दी कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। हाल ही में दोनों देशों के बीच हुए संघर्ष विराम को लेकर ट्रंप ने संकेत दिया कि अब यह समझौता खत्म हो चुका है। उन्होंने अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का बचाव करते हुए ईरानी शासन को कड़े शब्दों में चेतावनी दी।

किल लिस्ट की कोई पुख्ता जानकारी नहीं

हालांकि, ट्रंप ने ईरान की इस कथित ‘किल लिस्ट’ के बारे में कोई ठोस सबूत या विस्तृत जानकारी मीडिया से साझा नहीं की। इस कारण कुछ संकट को लेकर आवाजें उठ रही हैं कि क्या यह सिर्फ एक राजनीतिक बयानी है या फिर एक गंभीर मुद्दा है। ट्रंप के कारण कई सवाल भी उठ रहे हैं कि क्या ईरान वास्तव में किसी आतंकी योजना में शामिल है।

जवाबी कार्रवाई का इतिहास

ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में वाणिज्यिक जहाजों पर हमले के बाद, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने हाल ही में ईरान के हवाई रक्षा प्रणालियों, रडार और सैन्य ठिकानों पर भीषण एयर स्ट्राइक की हैं।इस बयान के बाद मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में दोनों देशों के बीच युद्ध का खतरा और ज्यादा गहरा गया है।

दुनिया भर में प्रतिक्रियाएं

ट्रंप के इस दावे पर दुनिया भर से प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। कई विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान अमेरिका और ईरान के बीच की तनाव को और बढ़ा सकता है। कुछ लोग इसे सिर्फ चुनावी राजनीति का एक हिस्सा मान रहे हैं। साथ ही, इस बयान के बाद ट्रंप के समर्थक और विरोधी दोनों ने अपने-अपने विचार दिए हैं।

राजनीतिक रणनीति या वास्तविक खतरा?

कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान ट्रंप की चुनावी रणनीति का हिस्सा हो सकता है। वे अपने धार्मिक और राष्ट्रवाद के मुद्दों को एक बार फिर से उभारने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, कुछ लोग इसे एक गंभीर खतरे के रूप में देख रहे हैं। इस दावे ने अमेरिका और ईरान के संबंधों में पहले से चल रहे तनाव को और बढ़ा दिया है।

क्या ट्रंप को सुरक्षा की जरूरत है?

ट्रंप के बयान के बाद, उनके सुरक्षा प्रबंधों में परिवर्तन करने की कुछ संभावनाएँ भी देखी जा रही हैं। सुरक्षा एजेंसियों को यह समझाना होगा कि इस स्थिति को कैसे संभालना है। क्या ट्रंप को सुरक्षा के लिए और अधिक उपायों की जरूरत है, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि ईरान की प्रतिक्रिया किस प्रकार की होती है।

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