अमेरिका ने किया हाइपरसोनिक मिसाइल का पहला टेस्ट, रफ्तार देख दंग रह जाएंगे

The CSR Journal Magazine

तेजी से उड़ान भरने वाली मिसाइल का परीक्षण

अमेरिकी नौसेना ने अपने नए हाइपरसोनिक स्ट्राइक मिसाइल ब्लैकबीयर्ड का पहला उड़ान परीक्षण सफलतापूर्वक किया है। इस परीक्षण का फुटेज भी जारी किया गया है, जिसमें मिसाइल F/A-18E/F सुपर हॉर्नेट लड़ाकू विमान के पंखों के नीचे दिखाई दे रही है। यह परीक्षण कैस्टेलियन कंपनी द्वारा संचालित मेस कार्यक्रम के तहत किया जा रहा है। ब्लैकबीयर्ड की खासियत है कि यह मैक 5 से अधिक गति से उड़ान भरने में सक्षम है।

सस्ती और प्रभावी हाइपरसोनिक तकनीक

ब्लैकबीयर्ड एक ऐसी मिसाइल है जिसे सस्ते दाम पर बड़ी संख्या में निर्माण करना संभव है। इसकी प्रति यूनिट कीमत लगभग 3 लाख डॉलर यानी लगभग 2.88 करोड़ भारतीय रुपये है। इसका उत्पादन लक्ष्य प्रति वर्ष 500 मिसाइल रखने का है। यह मिसाइल खासकर दुश्मन के जहाजों पर हमले के लिए उपयोगी मानी जा रही है। पारंपरिक हाइपरसोनिक हथियारों की तुलना में ब्लैकबीयर्ड को कम लागत पर बड़े पैमाने पर बनाने पर जोर दिया गया है।

संभावित तैनाती और इंटीग्रेशन की योजना

अमेरिकी नौसेना का लक्ष्य 2028 तक सीमित संख्या में ब्लैकबीयर्ड को तैनात करना है। इसके अलावा, इसे F35 फाइटर जेट में भी इंटीग्रेट किया जाएगा, जिसमें यह अपने इंटरनल वेपन बे में चार ब्लैकबीयर्ड मिसाइल ले जा सकेगा। इससे F35 की स्टील्थ क्षमता में कोई कमी नहीं आएगी और यह नेटवर्क सेंट्रिक युद्ध में कई रणनीतिक लाभ प्रदान करेगा।

मेस कार्यक्रम की विशेषताएं

मेस कार्यक्रम का उद्देश्य सस्ती लेकिन प्रभावी हाइपरसोनिक क्षमता हासिल करना है। पारंपरिक हाइपरसोनिक मिसाइलें महंगी होती हैं और उनकी संख्या सीमित होती है। ब्लैकबीयर्ड को बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए डिज़ाइन किया गया है, और कंपनी द्वारा तेजी से विकास कार्य किया गया है। कई उड़ान परीक्षण पूरे हो चुके हैं और नौसेना इसे अपने मुख्य हाइपरसोनिक स्ट्राइक विकल्प के रूप में देख रही है।

हाइपरसोनिक तकनीक की चुनौतियां

हाइपरसोनिक तकनीक में कई चुनौतियाँ होती हैं, जैसे गर्मी, मार्गदर्शन, और सटीकता बनाए रखना। हालाँकि, कैस्टेलियन ने समय पर कई परीक्षण पूरे करने में सफलता प्राप्त की है। इसकी सफलताएं अमेरिका को एक ऐसी सस्ती हाइपरसोनिक क्षमता देती हैं, जो चीन और रूस जैसे प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ संभावित रूप से लाभकारी साबित हो सकती है।

क्षेत्रीय सुरक्षा पर प्रभाव

भारतीय संदर्भ में देखा जाए तो ब्लैकबीयर्ड जैसी मिसाइलें क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन को प्रभावित कर सकती हैं। अमेरिकी नौसेना का यह कदम भविष्य के युद्ध में गति, दूरी और संख्या के महत्व को उजागर करता है। अगर ब्लैकबीयर्ड समय पर तैयार हो गई, तो यह नौसेना के शस्त्रागार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाएगी।

उत्पादन की योजना और भविष्य की संभावनाएं

अगले चरण में, ब्लैकबीयर्ड का उत्पादन और F/A-18 पर इंटीग्रेशन के लिए डील किए गए हैं। इसके अलावा, इसे सेना के हिमार्स सिस्टम और समुद्री प्लेटफॉर्म पर भी आजमाने की चर्चा की जा रही है। इससे अमेरिका की समुद्री शक्ति को और मजबूती मिलेगी।

Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!

App Store –  https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540 

Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos