क्रूड की कीमतें बढ़ने के साथ डीजल की डिमांड में तेजी, 15 दिन में 2.7 करोड़ बैरल खर्च

The CSR Journal Magazine
नई दिल्ली: ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल देखने को मिल रहा है। वर्तमान में क्रूड की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास टिक गई हैं। इस बीच, भारत में डीजल की खपत भी तेजी से बढ़ रही है। त्योहारी सीजन के चलते माल ढुलाई में डीजल की खपत में वृद्धि हुई है। ईरान युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर डीजल की कीमतों में भी भारी उथल-पुथल मची हुई है। अमेरिका में भी डीजल की डिमांड और सप्लाई में बड़ा अंतर आ चुका है।

भारत में डीजल की खपत में वृद्धि

आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर के पहले पखवाड़े में सरकारी तेल कंपनियों द्वारा डीजल की बिक्री बढ़कर 36.5 लाख मीट्रिक टन (करीब 2.7 करोड़ बैरल) हो गई है। यह आंकड़ा सितंबर की इसी अवधि से लगभग 26.4% और पिछले साल की तुलना में 25.4% अधिक है। इंडियन फाउंडेशन ऑफ ट्रांसपोर्ट रिसर्च एंड ट्रेनिंग के सीनियर फेलो एसपी सिंह का कहना है कि कृषि क्षेत्र की मांग के कारण डीजल की खपत में वृद्धि हो रही है।

किसानों की बढ़ती डिमांड

भारत में किसान सिंचाई के लिए डीजल से चलने वाले जनरेटर का इस्तेमाल करते हैं। त्योहारी सीजन में डीलर्स ने डीजल खरीदने की दर बढ़ा दी है। नवंबर में दिवाली तक इन्वेंट्री तैयार करने के लिए डीलर्स की खरीदारी में तेजी आई है। सितंबर 2026 में ट्रकों की बिक्री तेजी से बढ़कर 44,323 यूनिट हो गई, जो अगस्त से 33.57% अधिक है।

सरकारी कंपनियों को घाटा

सरकारी तेल कंपनियों इंडियन ऑयल कॉर्प, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने अभी तक खुदरा उपभोक्ताओं को बाजार भाव से कम दर पर ईंधन बेचना जारी रखा है। रेटिंग एजेंसी इक्रा लिमिटेड के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट प्रशांत वशिष्ठ के अनुसार, इन कंपनियों को एक लीटर डीजल पर करीब 20 रुपये का घाटा सहना पड़ता है।

प्राइवेट कंपनियों की स्थिति

दूसरी ओर, प्राइवेट कंपनी नायरा एनर्जी और रिलायंस इंडस्ट्रीज ने कीमतें बढ़ा दी हैं। ये कंपनियां वैश्विक स्तर पर ज्यादा मुनाफे का लाभ उठाने के लिए ईंधन का निर्यात कर रही हैं। सरकारी कंपनियों के मुकाबले निजी खुदरा विक्रेताओं के ईंधन स्टेशनों पर बिकने वाला एक लीटर पेट्रोल और डीजल क्रमशः 3 रुपये और 5 रुपये महंगा है।

बिजली की बढ़ती मांग

वशिष्ठ ने बताया कि बढ़ती बिजली की मांग को पूरा करने के लिए भी डीजल का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस दौरान, जो ग्राहक निजी कंपनियों से ईंधन खरीद रहे थे, वे अब सरकारी कंपनियों के पेट्रोल पंपों पर जा रहे हैं। 1 से 15 अक्टूबर के दौरान सरकारी कंपनियों की पेट्रोल बिक्री बढ़कर 15.5 लाख टन हो गई, जो पिछले महीने की इसी अवधि से 0.9% की वृद्धि है।

आगे की संभावनाएं

त्योहारी सीजन के चलते डीजल की डिमांड में और वृद्धि होने की उम्मीद है। इससे सरकारी कंपनियों पर वित्तीय दबाव बढ़ सकता है। डीजल की बढ़ती खपत और उसके साथ-साथ कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, दोनों ही भारतीय अर्थव्यवस्था पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकते हैं।

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