UP: Lakhimpur Kheri में बेलर मशीन से पराली प्रबंधन हुआ आसान, किसानों की हो रही कमाई

The CSR Journal Magazine
लखीमपुर खीरी में धान की खेती बड़े पैमाने पर होती है। जैसे ही धान की फसल कटती है, खेतों में बड़ी मात्रा में पराली बच जाती है। पराली का सही प्रबंधन करना किसानों के लिए एक चुनौती बन जाता है। कई बार किसान इसे जलाकर नष्ट कर देते हैं, जिससे वायु प्रदूषण बढ़ता है। ऐसे में बेलर मशीन किसानों के लिए एक वरदान साबित हो रही है। यह मशीन पराली को इकट्ठा कर छोटे-छोटे गठ्ठों में बांधने में मदद करती है, जिससे जलाने की जरूरत कम होती है और किसानों को अतिरिक्त आमदनी का मौका मिलता है।

बेलर मशीन का काम करने का तरीका

बेलर एक आधुनिक कृषि यंत्र है, जिसका उपयोग धान, गन्ना और अन्य फसलों के अवशेषों को इकट्ठा करने के लिए किया जाता है। धान की कटाई के बाद खेत में फैली पराली को व्यवस्थित करना किसानों के लिए कठिन होता है। बेलर मशीन इस काम को आसान बनाती है। सबसे पहले, खेत में रैकर का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे फसल अवशेषों को एक जगह इकट्ठा किया जाता है। इसके बाद बेलर मशीन खेत में चलकर पराली को अपने अंदर खींचती है और उसे गोल या चौकोर आकार के गठ्ठों में बदल देती है।

पराली का सही प्रबंधन

एक एकड़ खेत से करीब 20 क्विंटल पराली निकल सकती है। अगर किसान इस पराली को जलाने के बजाय इकट्ठा करते हैं, तो इसका उपयोग कई कामों में किया जा सकता है। पराली को गठ्ठों में तैयार करने से खेत से अवशेष हटाना आसान हो जाता है, जिससे अगली फसल की बुवाई के लिए खेत तैयार करना भी सरल हो जाता है। पराली हटाने का सही तरीका खेत की स्थिति और मिट्टी की नमी को ध्यान में रखकर तय किया जाना चाहिए।

पराली का उपयोग और फायदे

धान की पराली का उपयोग केवल खेत से अवशेष हटाने तक सीमित नहीं है। उचित प्रबंधन के बाद इसका उपयोग पशुओं के चारे और बायोगैस बनाने में भी किया जा सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में धान की पराली का उपयोग पशुओं के चारे में किया जाता है, लेकिन इसमें पोषण की मात्रा सीमित होती है। इसलिए इसे संतुलित आहार के विकल्प के रूप में देना चाहिए। इसके अलावा, पराली का उपयोग बायोमास ईंधन और बायोगैस उत्पादन में भी किया जा सकता है।

किसानों की बढ़ती आय

बेलर मशीन की मदद से किसान पराली को गठ्ठों में बदलकर बेच सकते हैं। इस समय पराली की कीमत ₹200 प्रति कुंतल है, जिससे किसान आसानी से अतिरिक्त आय कमा सकते हैं। साबिर अली, एक किसान, बताते हैं कि बेलर मशीन ने उनकी जिंदगी बदल दी है। अब उन्हें पराली जलाने की चिंता नहीं है और वे इसे आसानी से बेचकर पैसे कमा रहे हैं। यह मशीन किसानों के लिए एक आधुनिक कृषि यंत्र बन गई है, जो उन्हें पराली की समस्या से छुटकारा दिला रही है।
बेलर मशीन का उपयोग करने के लिए किसानों को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध तकनीक और संसाधनों की जरूरत होती है। जहां पराली की खरीद की व्यवस्था है, वहां किसान इसे गठ्ठों के रूप में बेचकर अपनी आय बढ़ा सकते हैं। इस प्रकार, बेलर मशीन न केवल किसानों के लिए फायदेमंद है, बल्कि यह पर्यावरण के लिए भी लाभकारी साबित हो रही है।

कृषि में बदलाव की दिशा

लखीमपुर खीरी में बेलर मशीन का उपयोग कृषि में एक नई दिशा दिखा रहा है। यह मशीन किसानों को पराली प्रबंधन में मदद कर रही है और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बना रही है। इस प्रकार, बेलर मशीन ने किसानों के लिए एक नई उम्मीद जगाई है और उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का काम किया है।

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