यूपी चुनाव में अमित शाह की एंट्री, इसबार सामने हैं तीन चुनौतियां

The CSR Journal Magazine
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी जोर-शोर से शुरू हो चुकी है। सपा अपने ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के जरिए बीजेपी को चुनौती देने की कोशिश कर रही है। वहीं, बीजेपी के अंदर कार्यकर्ताओं की नाराजगी और जातीय संतुलन बिगड़ने जैसी समस्याएं भी सामने आ रही हैं। ऐसे में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की एंट्री होने जा रही है। उनका अनुभव और रणनीतिक कौशल बीजेपी को सत्ता में बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

अमित शाह की महत्वपूर्ण बैठकें

अमित शाह इसी महीने के अंत में यूपी में बीजेपी कार्यसमिति की बैठक में शामिल होंगे। 29 अक्टूबर को प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक और 30 अक्टूबर को कार्यसमिति की बैठक आयोजित होगी। इस बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और अन्य बड़े नेता भी शामिल होंगे। इस दौरान मिशन-2027 के लिए बीजेपी का नया बूथ मैनेजमेंट प्लान तैयार किया जाएगा। अमित शाह की सक्रियता से बीजेपी के भीतर और बाहर सियासी हलचल बढ़ गई है।

क्या अमित शाह नाराज कार्यकर्ताओं को साध पाएंगे?

सवाल यह है कि क्या अमित शाह एक बार फिर नाराज कार्यकर्ताओं को मनाकर, गैर-यादव ओबीसी और गैर-जाटव दलित समीकरणों को दुरुस्त कर पाएंगे? यूपी की राजनीति में अमित शाह का नाम आते ही 2014 और 2017 के चुनावों की याद आती है। जब अमित शाह को यूपी का प्रभारी बनाया गया, तब बीजेपी राज्य में तीसरे-चौथे नंबर की पार्टी थी। उन्होंने अपने रणनीतिक कौशल से पार्टी को मजबूत किया।

अमित शाह का सोशल फॉर्मूला

अमित शाह ने यूपी में बिखरे संगठन को एकजुट करने के लिए 60-40 का सोशल फॉर्मूला लागू किया। उन्होंने सपा और बसपा के पारंपरिक वोटबैंक के मुकाबले बाकी 60 फीसदी आबादी को एकजुट करने की रणनीति बनाई। इस फॉर्मूले ने चुनावी नतीजों में एनडीए को 80 में से 73 सीटें जीतने में मदद की। इसके बाद अमित शाह बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने और 2017 में उनकी बूथ स्तर की रणनीति ने पार्टी को बहुमत दिलाया।

तीन बड़ी चुनौतियां

2017 में बीजेपी की वापसी के बाद यूपी की सत्ता की कमान योगी आदित्यनाथ को सौंपी गई। लेकिन अमित शाह और संगठन मंत्री सुनील बंसल के यूपी से हटने के बाद पार्टी का सोशल इंजीनियरिंग समीकरण प्रभावित हुआ। 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को केवल 33 सीटें मिलीं। कार्यकर्ताओं की शिकायतें बढ़ गईं कि उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। ऐसे में अमित शाह की बैठकों का मुख्य फोकस बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को सीधी तवज्जो देना होगा।

अखिलेश यादव का ‘पीडीए’ कार्ड

अखिलेश यादव का ‘पीडीए’ कार्ड गैर-यादव पिछड़ी जातियों में सेंध लगाने में सफल रहा है। अमित शाह को अनुप्रिया पटेल, संजय निषाद और ओमप्रकाश राजभर जैसे सहयोगियों के साथ मिलकर पिछड़े और दलित वर्ग के वोटबैंक को मजबूत करने की चुनौती का सामना करना होगा। अमित शाह का ट्रैक रिकॉर्ड यह बताता है कि वे चुनाव में केवल जिताऊ उम्मीदवार पर ही दांव लगाते हैं।

मिशन-2027 की रणनीति

अमित शाह की यूपी चुनाव में सीधी एंट्री से यह स्पष्ट है कि बीजेपी मिशन-2027 को हल्के में नहीं ले रही है। 29 और 30 अक्टूबर को होने वाली बैठकों में वे प्रदेश कार्यकारिणी से लेकर जिला संगठन तक के नेताओं के साथ रणनीति बनाएंगे। बूथ की मजबूती, कार्यकर्ताओं का सम्मान और जातिगत समीकरणों की महीन बुनावट कर अमित शाह एक बार फिर यूपी के सियासी रण में बीजेपी को अजेय बनाने की योजना पर काम करेंगे।

Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!

App Store – https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540

Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos